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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी अमृत योजना

Tue, 22 May 2018 12:04 AM IST
Updated Tue, 22 May 2018 12:04 AM IST
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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी अमृत योजना
सवा अरब रुपये की अमृत योजना टेस्टिंग में ही फेल
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रायबरेली। शहर में पेयजल संकट से नागरिकों को राहत दिलाने के लिए शुरू की गई अमृत योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। सवा अरब की ये योजना टेस्टिंग में ही फेल हो गई है।


इसके चलते कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से योजना को नगर पालिका के अफसरों को हैंडओवर करने की कोशिश नाकाम हो गई है। नगर पालिका के अफसरों की मानें तो पाइपों में लीकेज हो गया है।
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सड़कों की खुदाई करके पाइपें तो डलवा दी गई हैं, लेकिन सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई। बताया जा रहा है कि योजना में घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग से कार्यदायी संस्था जल निगम सवालों के घेरे में है।
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अमृत योजना के तहत नगर पालिका क्षेत्र में 1.17 करोड़ रुपये लागत से शहर में नई पाइपलाइन बिछाई गई है। पालिका के 34 वार्डों में पाइपलाइनों का नवीनीकरण के साथ ही पेयजल आपूर्ति के लिए ट्यूबवेल और पानी की टंकियां भी बनवाई गई हैं।


पुरानी पाइपलाइन जर्जर होने के कारण पेयजल आपूर्ति सुचारु रूप से नहीं हो पा रही थी। नई पाइपलाइन से नागरिकों को आस बंधी थी कि पेयजल समस्या दूर होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से पिछले डेढ़ महीने से टेस्टिंग का कार्य कराया जा रहा है। टेस्टिंग में ही योजना फेल हो गई। वजह एक महीने के अंदर ही पाइपलाइन में 60 से अधिक स्थान पर लीकेज हो गया।


बालापुर, कृष्णानगर, तिलकनगर, राजकीय कॉलोनी, इंदिरानगर, नेहरूनगर आदि मोहल्लों में पाइप लाइनें लीकेज होने से सड़कों पर पानी भरा है। इससे लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है।


खास बात ये है कि कार्यदायी संस्था के प्रस्ताव को ठुकराते हुए पालिका के अफसरों ने इस योजना के हैंडओवर से इंकार कर दिया है।



शहर के 34 वार्डों में कुल आबादी करीब दो लाख है। अमृत योजना से करीब 40 हजार से अधिक घरों में नलों का कनेक्शन दिया जाना है। वार्ड बढ़ने के कारण अब पाइपलाइन का विस्तार भी किया जा रहा है।


मगर जिस तरह से लीकेज की समस्या आ रही है। इससे जल निगम लखनऊ के अधिकारियों की पोल खुल गई है। वहीं, नगर पालिका की भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।


कार्यदायी संस्था जल निगम ने अमृत योजना में सही ढंग से कार्य नहीं किया। एक तो पाइपलाइनों में लीकेज हैं, जिसकी वजह से पानी सड़कों पर भरा है।


सड़कों की खुदाई करके पाइपलाइनें तो बिछा दी गईं मगर खोदी गई सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई। पाइपलाइनों के इंटर कनेक्शन तक का कार्य नहीं कराया गया। यही तर्क देकर पालिका के अफसरों ने अमृत योजना को हैंडओवर लेने से इंकार कर दिया है।


नगर पालिका के ईओ मुशीर अहमद का कहना है कि, अमृत योजना का कार्य कार्यदायी संस्था जल निगम ने कराया है। योजना का कार्य ठीक ढंग से नहीं होने पर इसे हैंडओवर करने से इंकार कर दिया गया है। पाइपलाइनों में लीकेज हैं। सड़कों की मरम्मत भी नहीं कराई गई। ये सब ठीक होने पर ही इसे हैंडओवर लिया जाएगा।



कार्यदायी संस्था जल निगम के जेई आशीष बिरला का कहना है कि, सवा अरब रुपये की अमृत योजना के तहत कार्य कराया जा रहा है। अभी टेस्टिंग का कार्य कराया जा रहा है। यदि कहीं पर कोई गड़बड़ी है तो उसे ठीक कराया जाएगा।
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