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ढाई लाख आबादी को खल रही टीपीएमयू की कमी
Updated Wed, 30 Aug 2017 01:16 AM IST
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ढाई लाख आबादी झेल रही टीपीएमयू की कमी
रायबरेली। शहर में हो रही बिजली की अघोषित कटौती से करीब ढाई लाख आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कभी कनेक्शन काटने के नाम पर तो कभी फॉल्ट ठीक करने के नाम पर पूरा फीडर बंद कर दिया जाता है। इस समस्या से बचने के लिए आरएपीडीआपी योजना के तहत शहर के सभी ट्रांसफार्मरों में ट्राई पोल मैकेनिकल यूनिट (टीपीएमयू) लगाया जाना था। योजना शुरू हुए दो साल बीत रहे हैं, लेकिन अभी तक टीपीएमयू नहीं लगाए गए हैं।
शहरी क्षेत्र की आबादी करीब ढाई लाख है। यहां पर 40 हजार कनेक्शन हैं। शहर के जर्जर ढांचे से बेहाल नागरिकों की समस्याएं हल नहीं हो सकी हैं। समस्या के निराकरण के लिए वर्ष 2015 में आरएपीडीआरपी योजना शुरू की गई। इस योजना के तहत करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से शहर में बहुत से सुधार कार्य होने थे, लेकिन योजना में जमकर खेल हुआ। आधा अधूरा सामान लगाकर खानापूरी की गई। इसी योजना के तहत 250 व 100 एमबीए के ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। सभी में टीपीएमयू लगाया जाना है, जिसकी कमी आज भी करीब ढाई लाख आबादी को खल रही है। शहर में करीब 32 फीडर हैं। प्रत्येक फीडर से एक चौथाई आबादी को बिजली की आपूर्ति होती है। कनेक्शन काटने या फिर फॉल्ट ठीक करने के नाम पर पूरा फीडर बंद कर दिया जाता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
क्या है टीपीएमयू
एक फीडर में 10 से 15 ट्रांसफार्मर लगे होते हैं। कहीं पर फॉल्ट आता है तो पूरा फीडर बंद कर दिया जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत कनेक्शन काटने में होती है। एक कनेक्शन काटने के लिए पूरा फीडर बंद कर दिया जाता है। टीपीएमयू लगे होने से पूरा फीडर बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके लग जाने से पूरे फीडर के उपभोक्ताओं को समस्याओं से भी नहीं जूझना पड़ेगा।
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जल्द लगाए जाएंगे टीपीएमयू
अधीक्षण अभियंता पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि निर्माण कराने वाली एजेंसी को टीपीएमयू उपलब्ध करा दिए गए हैं। साथ ही लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इनके लग जाने से उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी।
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रायबरेली। शहर में हो रही बिजली की अघोषित कटौती से करीब ढाई लाख आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कभी कनेक्शन काटने के नाम पर तो कभी फॉल्ट ठीक करने के नाम पर पूरा फीडर बंद कर दिया जाता है। इस समस्या से बचने के लिए आरएपीडीआपी योजना के तहत शहर के सभी ट्रांसफार्मरों में ट्राई पोल मैकेनिकल यूनिट (टीपीएमयू) लगाया जाना था। योजना शुरू हुए दो साल बीत रहे हैं, लेकिन अभी तक टीपीएमयू नहीं लगाए गए हैं।
शहरी क्षेत्र की आबादी करीब ढाई लाख है। यहां पर 40 हजार कनेक्शन हैं। शहर के जर्जर ढांचे से बेहाल नागरिकों की समस्याएं हल नहीं हो सकी हैं। समस्या के निराकरण के लिए वर्ष 2015 में आरएपीडीआरपी योजना शुरू की गई। इस योजना के तहत करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से शहर में बहुत से सुधार कार्य होने थे, लेकिन योजना में जमकर खेल हुआ। आधा अधूरा सामान लगाकर खानापूरी की गई। इसी योजना के तहत 250 व 100 एमबीए के ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। सभी में टीपीएमयू लगाया जाना है, जिसकी कमी आज भी करीब ढाई लाख आबादी को खल रही है। शहर में करीब 32 फीडर हैं। प्रत्येक फीडर से एक चौथाई आबादी को बिजली की आपूर्ति होती है। कनेक्शन काटने या फिर फॉल्ट ठीक करने के नाम पर पूरा फीडर बंद कर दिया जाता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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क्या है टीपीएमयू
एक फीडर में 10 से 15 ट्रांसफार्मर लगे होते हैं। कहीं पर फॉल्ट आता है तो पूरा फीडर बंद कर दिया जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत कनेक्शन काटने में होती है। एक कनेक्शन काटने के लिए पूरा फीडर बंद कर दिया जाता है। टीपीएमयू लगे होने से पूरा फीडर बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके लग जाने से पूरे फीडर के उपभोक्ताओं को समस्याओं से भी नहीं जूझना पड़ेगा।
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जल्द लगाए जाएंगे टीपीएमयू
अधीक्षण अभियंता पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि निर्माण कराने वाली एजेंसी को टीपीएमयू उपलब्ध करा दिए गए हैं। साथ ही लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इनके लग जाने से उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी।