{"_id":"59fdf9cf4f1c1bd0538bb2e3","slug":"61509816783-raebareli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनटीपीसी के श्रमिकों को घरों के लिए किया रवाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनटीपीसी के श्रमिकों को घरों के लिए किया रवाना
Updated Sat, 04 Nov 2017 11:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
और श्रमिकों को भी घरों के लिए किया रवाना
- चारदीवारी के बगल में अस्थायी टीनशेड बनाकर रह रहे श्रमिक
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। एनटीपीसी की यूनिट नंबर छह में हुए हादसे ने सैकड़ों श्रमिकों की रोजी-रोटी छीन ली है। गत दिवस गेट तक आए मजदूरों को लंबी छुट्टी दे दी गई, जबकि अब एनटीपीसी के बगल में टीनशेड बनाकर रह रहे मजदूरों को भी उनके घरों के लिए रवाना कर दिया गया। इस टीनशेड को एक निजी कंपनी ने बनवाया था। तकरीबन एक सैकड़ा से ज्यादा मजदूर बुझे मन से अपने घरों को रवाना हो गए।
एनटीपीसी की चारदीवारी से जुड़े स्थान पर एक टीनशेड रखा गया था, जिसमें मेहनत करने के बाद मजदूर खाना बनाने के साथ आराम करते थे। गत दिवस मजदूरी के चक्कर में एनटीपीसी के गेट तक पहुंचे श्रमिकों को यह कहकर वापस कर दिया गया कि वे 20 दिन बाद आएं। इसके अगले दिन यानी शनिवार को चारदीवारी के बगल में रह रहे मजदूरों को यह कहकर घरों को भेज दिया गया कि अभी काम नहीं है। बलिकरन, विनेश कुमार, महादेव का कहना है कि अब उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
टीनशेड में रहने वाले ये मजदूर बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और यूपी के सोनभद्र के रहने वाले थे। अनिल कुमार, राम स्वरूप का कहना है कि लगता है कि अब यहां काम नहीं मिलेगा। यूनिट नंबर छह में हुए हादसे के बाद भले ही मजदूरों में दहशत का माहौल है और वे अंदर जाने में डरते रहते हैं, लेकिन पेट की आग के आगे वे सब कुछ सहने को मजबूर हो जाते हैं। इन मजदूरों का कहना है कि उनसे कहा गया है कि बुलाने पर यहां काम दिया जाएगा। इस संबंध में जीएम का कहना है कि यूनिट शुरू होने पर काम दिलाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
- चारदीवारी के बगल में अस्थायी टीनशेड बनाकर रह रहे श्रमिक
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। एनटीपीसी की यूनिट नंबर छह में हुए हादसे ने सैकड़ों श्रमिकों की रोजी-रोटी छीन ली है। गत दिवस गेट तक आए मजदूरों को लंबी छुट्टी दे दी गई, जबकि अब एनटीपीसी के बगल में टीनशेड बनाकर रह रहे मजदूरों को भी उनके घरों के लिए रवाना कर दिया गया। इस टीनशेड को एक निजी कंपनी ने बनवाया था। तकरीबन एक सैकड़ा से ज्यादा मजदूर बुझे मन से अपने घरों को रवाना हो गए।
एनटीपीसी की चारदीवारी से जुड़े स्थान पर एक टीनशेड रखा गया था, जिसमें मेहनत करने के बाद मजदूर खाना बनाने के साथ आराम करते थे। गत दिवस मजदूरी के चक्कर में एनटीपीसी के गेट तक पहुंचे श्रमिकों को यह कहकर वापस कर दिया गया कि वे 20 दिन बाद आएं। इसके अगले दिन यानी शनिवार को चारदीवारी के बगल में रह रहे मजदूरों को यह कहकर घरों को भेज दिया गया कि अभी काम नहीं है। बलिकरन, विनेश कुमार, महादेव का कहना है कि अब उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
विज्ञापन
टीनशेड में रहने वाले ये मजदूर बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और यूपी के सोनभद्र के रहने वाले थे। अनिल कुमार, राम स्वरूप का कहना है कि लगता है कि अब यहां काम नहीं मिलेगा। यूनिट नंबर छह में हुए हादसे के बाद भले ही मजदूरों में दहशत का माहौल है और वे अंदर जाने में डरते रहते हैं, लेकिन पेट की आग के आगे वे सब कुछ सहने को मजबूर हो जाते हैं। इन मजदूरों का कहना है कि उनसे कहा गया है कि बुलाने पर यहां काम दिया जाएगा। इस संबंध में जीएम का कहना है कि यूनिट शुरू होने पर काम दिलाया जाएगा।
विज्ञापन