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36 हजार बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़

Sat, 22 Apr 2017 12:19 AM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Sat, 22 Apr 2017 12:19 AM IST
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36 thousand children playing with the health of
fe - फोटो : getty images
गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों के चल रही हौसला पोषण योजना पूरी तरह पटरी से उतर गई है। पूरे साल योजना के नाम पर सिर्फ खानापूरी होती रही। कभी बजट की लेटलतीफी से उधारी से काम चलाने की बात कही गई, तो कभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कारण योजना को बंद करना पड़ा। हालत यह है कि जिले के अतिकुपोषित 36 हजार बच्चों के सेहत की फिक्र किसी को नहीं रही।
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स्वास्थ्य विभाग एवं बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में जिले में 36 हजार 301 बच्चे अति कुपोषित और 93 हजार 210 बच्चे कुपोषित हैं। पूर्व की सपा सरकार में 10 अगस्त 2016 को शुरू की गई इस योजना में गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाना था। इसका बकायदा मीनू भी जारी कर दिया गया। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को दूध, एक दिन मौसमी फल और पौष्टिक भोजन खिलाना होता है। इसी तरह 0 से 3 वर्ष और तीन से छह वर्ष के बच्चों को घी, दूध आदि की व्यवस्था आंगनबाड़ी केंद्रों पर की जानी थी।
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शुरुआती दौर में योजना में बजट की कमी आ गई। विभाग की ओर से बकायदा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उधार से काम चलाने तक का मौखिक आदेश दे दिया गया है। इसके चलते शुरूआती दौर में ही योजना दम तोड़ने लगी। वहीं करीब एक महीने तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन के कारण योजना का क्रियान्वयन नहीं हो सका। पुराना बजट पूरा खर्च हो गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में अभी तक विभाग को बजट ही नहीं मिल सका है। इसके चलते योजना ठप पड़ी है। ऐसे में बच्चों को स्वस्थ बनाने और गर्भवती महिलाओं के उचित देखभाल करने की योजना पूरी तरह से धराशाई होती जा रही है।
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डलमऊ नेवाजगंज की रहने वाली ललिता, सरांय दिलावर की संगीता ने बताया कि हौसला पोषण योजना भोजन तो मिलता है, लेकिन मीनू के हिसाब से नहीं दिया जाता है। इसी तरह डीह कस्बा निवासी राजरानी ने बताया कि पौष्टिक भोजन देने के नाम पर खानापूरी की जाती है। न दूध मिलता है न मौसमी फल दिए जाते हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बजट की कमी होने के चलते बच्चों भी पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है।

जिले में जन्म लेने वाला हर 10वां बच्चा अति कुपोषित हो रहा है। इसकी वजह उचित देखभाल और खानपान का न होना है। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 10.32 फीसदी, जबकि कुपोषित बच्चों की संख्या 30 फीसदी है। जिले में 36301 बच्चे अति कुपोषित और 93210 बच्चे कुपोषित हैं। सलोन, अमावां, डलमऊ, सतांव और शिवगढ़ ब्लॉक में सर्वाधिक अति कुपोषित बच्चें है। जिले के 18 ब्लॉक में से इन पॉच ब्लॉक में करीब 13 हजार अति कुपोषित बच्चे हैं।


जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि कुपोषित बच्चों को पैकेटबंद खाना परोसने को लेकर शासन की ओर से अभी कोई पत्र नहीं मिला है। संभवत: एक, दो दिन में निर्देश आने की संभावना है। शासन से जैसे निर्देश होंगे, उसी अनुसार व्यवस्था की जाएगी।
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