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अब एसडीएम देखेंगे, बच्चों को फल मिल रहा है या नहीं
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रायबरेली। मध्याह्न भोजन योजना के तहत जिले के सभी विद्यालयों में बच्चों को नियमित रूप से फल दिया जा रहा है या नहीं, इसका पता लगाने की जिम्मेदारी अब उपजिलाधिकारियों को सौंपी गई है।
प्रत्येक एसडीएम को हर ब्लॉक में 10-10 स्कूल देखने होंगे और अपनी सत्यापन रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को देनी होगी। यह आदेश जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने जारी किया है।
डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों को जारी आदेश में कहा है कि जिले के प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, सहायता प्राप्त विद्यालय, मदरसा तथा माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक सोमवार को ताजा मौसमी फल वितरित किया जाता है या नहीं, इसका पता लगाएं।
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फल वितरण के लिए जिला स्तर से चार रुपये प्रति बच्चे की दर से भुगतान किया जाता है। चूंकि शासन स्तर पर धनराशि देर से प्राप्त हुई है, इसलिए जुलाई से मार्च तक का भुगतान दिया जाना है।
इसलिए सभी एसडीएम को उनके क्षेत्र में आने वाले प्रत्येक ब्लॉक के कम से कम 10 स्कूलों का औचक निरीक्षण कर फल वितरण की हकीकत देखनी होगी।
सत्यापन रिपोर्ट तीन दिन के भीतर बीएसए कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी। बता दें कि जिले के 2705 विद्यालयों के 2.70 लाख बच्चे मध्याह्न भोजन योजना से आच्छादित हैं।
शासन से बजट मिलने के बाद डीएम के निर्देश पर ही बीएसए ने फरवरी के अंतिम सप्ताह में खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से हर ब्लाक के 20-20 स्कूलों का निरीक्षण कराकर फल वितरण का सत्यापन कराया गया था। अब एसडीएम के माध्यम से सत्यापन कराने का आदेश जारी किया गया है।
सत्यापन के बाद ही जारी किया जाएगा बजट
जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि 23 जुलाई से 31 मार्च तक का 2.20 करोड़ रुपये फल वितरण के लिए मिला है। यह बजट 36 सोमवार के लिए उपलब्ध कराया गया है। फरवरी में आए इस बजट को विद्यालयों में तभी भेजा जाएगा, जब सत्यापन रिपोर्ट मिल जाएगी।
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प्रत्येक एसडीएम को हर ब्लॉक में 10-10 स्कूल देखने होंगे और अपनी सत्यापन रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को देनी होगी। यह आदेश जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने जारी किया है।
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डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों को जारी आदेश में कहा है कि जिले के प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, सहायता प्राप्त विद्यालय, मदरसा तथा माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक सोमवार को ताजा मौसमी फल वितरित किया जाता है या नहीं, इसका पता लगाएं।
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फल वितरण के लिए जिला स्तर से चार रुपये प्रति बच्चे की दर से भुगतान किया जाता है। चूंकि शासन स्तर पर धनराशि देर से प्राप्त हुई है, इसलिए जुलाई से मार्च तक का भुगतान दिया जाना है।
इसलिए सभी एसडीएम को उनके क्षेत्र में आने वाले प्रत्येक ब्लॉक के कम से कम 10 स्कूलों का औचक निरीक्षण कर फल वितरण की हकीकत देखनी होगी।
सत्यापन रिपोर्ट तीन दिन के भीतर बीएसए कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी। बता दें कि जिले के 2705 विद्यालयों के 2.70 लाख बच्चे मध्याह्न भोजन योजना से आच्छादित हैं।
शासन से बजट मिलने के बाद डीएम के निर्देश पर ही बीएसए ने फरवरी के अंतिम सप्ताह में खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से हर ब्लाक के 20-20 स्कूलों का निरीक्षण कराकर फल वितरण का सत्यापन कराया गया था। अब एसडीएम के माध्यम से सत्यापन कराने का आदेश जारी किया गया है।
सत्यापन के बाद ही जारी किया जाएगा बजट
जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि 23 जुलाई से 31 मार्च तक का 2.20 करोड़ रुपये फल वितरण के लिए मिला है। यह बजट 36 सोमवार के लिए उपलब्ध कराया गया है। फरवरी में आए इस बजट को विद्यालयों में तभी भेजा जाएगा, जब सत्यापन रिपोर्ट मिल जाएगी।