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नहरों की सफाई में खेल

Sun, 27 Aug 2017 12:46 AM IST
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:46 AM IST
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नहरों की सफाई में खेल
नहरों की सफाई में खेल, 18 लाख खर्च फिर भी, झाड़ियों से पटीं नहरें
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रायबरेली। सिंचाई विभाग नहरों की सफाई में खेल कर रहा है। यही वजह है कि हेड से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग खंड 45 के अभियंता 17 नहरों की आंशिक सफाई करने का दावा कर रहे हैं, जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। खरीफ सीजन में नहरों की सफाई के नाम पर लगभग 18 लाख रुपये खर्च हो गए हैं, पर नहरों में झाड़-झंखाड़ ही दिखाई दे रहा है।
किसान हमेशा नहरों की सफाई को लेकर तहसील दिवस से लेकर डीएम तक शिकायत करते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। डीह के किसान रामदेव, सुखराम, अश्वनी पांडेय, विवेक त्रिपाठी, रामजियावन का आरोप है कि नहरों की सफाई में धन का बंदरबांट किया गया है। नहरें झाड़-झंखाड़ से पटी पड़ी है। यही वजह से है कि हेड से टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी पंचायत और बैठक करके नहरों की सफाई कराकर पानी छोड़े जाने की मांग करते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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इन नहरों की हुई सफाई
सिंचाई विभाग खंड 45 के अभियंताओं का दावा है कि डिवीजन से जुड़ी उदयपुर, ताजपुर, नसीराबाद रजबहे के अलावा गोपालपुर, आशापुर, घाटमपुर, टेकारी, रायपुर टोडी, बरेंदा, दुसौती, ताजुद्दीनपुर, पीढ़ी, दाउदनगर समेत 17 नहरों की आंशिक सफाई की गई है। सफाई में लगभग 18 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
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ताक पर रख हुई सफाई
विभागीय अभियंताओं और ठेकेदारों की जुगलबंदी से नहरों की सफाई में खेल हो रहा है। प्रदेश सरकार ने यह आदेश दिया है कि नहरों की सफाई श्रमिकों से कराई जाए, लेकिन ज्यादातर नहरों की सफाई जेसीबी से कराई गई है। उसमें भी खानापूरी की गई। इससे एक ओर जहां प्रदेश सरकार के फरमान का खुलेआम उल्लंघन किया गया, वहीं श्रमिकों को कोई लाभ नहीं मिल सका।


नहरों की सफाई में कोई लापरवाही नहीं हुई है। नियमानुसार बजट के हिसाब से नहरों की सफाई कराई गई है। जहां पर ज्यादा सिल्ट और झाड़-झंखाड़ था, वहां पर प्राथमिकता पर सफाई कराई गई। बजट मिलने पर रबी सीजन में शेष नहरों की सफाई कराई जाएगी।-हरेंद्र कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग खंड 45
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