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खत्म हुआ इंतजार, झूम के बरसे बदरा
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:46 AM IST
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झूम के बरसे बदरा, सूख रही फसल को मिली संजीवनी
रायबरेली। जिले में शनिवार को बदरा झूमकर बरसे। झमाझम बारिश से धान की फसल को संजीवनी मिल गई। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे। कृषि विभाग के अफसरों की मानें तो बारिश न होने की वजह से धान की फसल खराब हो रही थी। ऐसी बारिश और हुई तो धान का फसल उत्पादन अच्छा होगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (इग्रुआ) फुरसतगंज के मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले में 19 मिमी. वर्षा होना रिकॉर्ड की गई है। इस बार सिर्फ डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की फसल की रोपाई कराई गई है। इसके अलावा उड़द, तिल, मूंगफली आदि की फसल बोई गई है। इधर, बारिश नहीं हो रही थी। इससे खासकर धान की फसल सूख रही थी। शुक्रवार रात मौसम का मिजाज बदला और झमाझम बारिश शुरू हो गई। बारिश शनिवार पूर्वाह्न 11 बजे तक रुक-रुककर होती रही। इससे किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी। उप कृषि निदेशक महेंद्र सिंह का कहना है कि बारिश फसलों के लिए खासकर धान की फसल के लिए अधिक फायदेमंद है। कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर के वैज्ञानिक डॉ. आरके कनौैजिया कहते हैं कि बारिश न होने से धान की फसल में रोग लग रहा था। फसल बर्बाद हो रही थी। बारिश होने से धान की फसल को फायदा हुआ और अब रोग लगना कम हो जाएगा। इसके अलावा अन्य फसलों के लिए भी यह बारिश फायदेमंद है।
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रायबरेली। जिले में शनिवार को बदरा झूमकर बरसे। झमाझम बारिश से धान की फसल को संजीवनी मिल गई। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे। कृषि विभाग के अफसरों की मानें तो बारिश न होने की वजह से धान की फसल खराब हो रही थी। ऐसी बारिश और हुई तो धान का फसल उत्पादन अच्छा होगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (इग्रुआ) फुरसतगंज के मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले में 19 मिमी. वर्षा होना रिकॉर्ड की गई है। इस बार सिर्फ डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की फसल की रोपाई कराई गई है। इसके अलावा उड़द, तिल, मूंगफली आदि की फसल बोई गई है। इधर, बारिश नहीं हो रही थी। इससे खासकर धान की फसल सूख रही थी। शुक्रवार रात मौसम का मिजाज बदला और झमाझम बारिश शुरू हो गई। बारिश शनिवार पूर्वाह्न 11 बजे तक रुक-रुककर होती रही। इससे किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी। उप कृषि निदेशक महेंद्र सिंह का कहना है कि बारिश फसलों के लिए खासकर धान की फसल के लिए अधिक फायदेमंद है। कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर के वैज्ञानिक डॉ. आरके कनौैजिया कहते हैं कि बारिश न होने से धान की फसल में रोग लग रहा था। फसल बर्बाद हो रही थी। बारिश होने से धान की फसल को फायदा हुआ और अब रोग लगना कम हो जाएगा। इसके अलावा अन्य फसलों के लिए भी यह बारिश फायदेमंद है।