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जिले के 2600 सरकारी स्कूलों का हाल बेहाल
Updated Thu, 31 Aug 2017 11:48 PM IST
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2600 सरकारी स्कूल बेहाल, मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित ढाई लाख विद्यार्थी
रायबरेली। नीचे लिखे ये तीन सीन बताने के लिए काफी हैं कि अव्यवस्थाओं के बीच ढाई लाख से ज्यादा बच्चों का भविष्य संवारने का ताना बाना बुना जा रहा है। लाखों रुपये खर्च होेने के बावजूद स्कूलों की स्थिति ठीक नहीं है। प्रसाधन खंडहर में तब्दील हैं तो स्कूल जर्जर हैं। बारिश में छतें टपक रही हैं। कनेक्शन तो हो गए हैं, लेकिन वायरिंग उखड़ गई है।
हर साल लाखों रुपये का बजट मिलने के बाद भी स्कूलों की हालत में सुधार नहीं आ रहा है। इससे जाहिर है कि मेंटीनेंस के नाम पर धन का गोलमाल किया जा रहा है। मौजूदा समय में जिले में 2600 सरकारी स्कूल हैं। इन स्कूलों में प्रसाधन तो बनवा दिए गए हैं, लेकिन इसमें से एक हजार स्कूलों में प्रसाधन निष्क्रिय हैं। यानि यह प्रसाधन अधूरे पड़े हैं या फिर बन गए हैं तो खंडहर में तब्दील हैं। इसी तरह करीब 1400 स्कूलों में हैंडपंप या शोपीस बने हैं या फिर दूषित पानी दे रहे हैं। कनेक्शन हर स्कूल में हो गए हैं, लेकिन 50 फीसदी स्कूलों में बिजली का उजाला अब तक नहीं हो पाया है। कहीं पर वायरिंग खराब है तो कहीं पर बल्व या फिर बोर्ड खराब हैं। फिर भी यहां पर तैनात अधिकारी मस्त हैं और बच्चे अव्यस्थाओं से त्रस्त हैं। सवाल ये उठता है कि आखिर प्राइमरी स्कूलों की दशा कब सुधरेगी।
सीन एक : टपकती छतें, पानी में बैठ बच्चे करते पढ़ाई
छतोह ब्लॉक क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक स्कूल की हालत पतली है। भवन जर्जर है तो बारिश होने पर छतें टपकती है। फर्श तक में पानी भरा है। इसी में बैठकर बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। सीलन की वजह से दीवार दरक गई है। प्रसाधन जर्जर हालत में है। बावजूद इन्हें ठीक कराने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नतीजतन सीलन के कारण छत दीवारें गिरने का खतरा रहता है। प्रधानाध्यापक रमाकांत त्रिपाठी का कहना है कि इस संबंध में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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सीन दो : बच्चे 400 मीटर दूर जाते पानी पीने
बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय रानीखेड़ा, जहां चारदीवारी तक नहीं बनाई गई है। कुल छात्र 131 हैं, जिनके लिए पेयजल व्यवस्था के लिए एकमात्र इंडिया मार्का हैंडपंप लगा हुआ है, जो दूषित पेयजल उगल रहा है। बच्चों को पानी पीने के लिए लगभग 400 मीटर दूर जाना पड़ रहा है। रसोई घर में सिलेंडर नहीं है। लकड़ी में खाना बनाया जा रहा है। कमरों में पंखे तो लगे हैं, लेकिन कनेक्शन व वायरिंग न होने से छात्रों को गर्मी में ही बैठना पड़ता है। प्रधानाध्यापक रामसुमिरन वर्मा ने बताया कि कई बार लिखित शिकायत तो की गई, लेकिन कोई व्यवस्था अभी तक नहीं की गई। इससे दिक्कत आ रही है।
सीन तीन: विद्यालय में बाउंड्रीवाल ही नहीं
बछरावां क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय बहादुरनगर एवं प्राथमिक विद्यालय बहादुरनगर में विद्यालय में बाउंड्रीवाल ही नहीं है। विद्यालय मेें चहारदीवारी न होने से रसोई घर का सिलेंडर ताला तोड़कर चोरी हो गया है। चरवाहे आए दिन जानवर लेकर परिसर में घुस आते हैं। उत्पात मचाते हैं। प्रधानाध्यापक गंगा प्रसाद त्रिवेदी ने बताया कि बाउंड्रीवाल न होने से पौधरोपण एक भी पेड़ नहीं बचे हैं। आवारा जानवर परिसर में घुस आते हैं। अन्य असुविधाएं भी हैं। इससे अफसरों को अवगत करा दिया गया है। हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पूरे गुलाब सिंह गांव में लगा जर्जर हैंडपंप, जो खारा पानी दे रहा है।इससे यहां पढ़ने वाले बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्रसाधन हर स्कूल में बनवा दिए गए हैं। जिस स्कूल में जो कमी है, उसकी पूरी रिपोर्ट संबंधित क्षेत्र के बीईओ से मांगी गई हैं। बीईओ की रिपोर्ट मिलने के बाद जहां पर जो कमियां होंगी, उसे ठीक करा दी जाएंगी। पूरे प्रयास किए जा रहे हैं कि स्कूल आने वाले बच्चों को बेहतर सुविधा मिले।-संजय कुमार शुक्ला, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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रायबरेली। नीचे लिखे ये तीन सीन बताने के लिए काफी हैं कि अव्यवस्थाओं के बीच ढाई लाख से ज्यादा बच्चों का भविष्य संवारने का ताना बाना बुना जा रहा है। लाखों रुपये खर्च होेने के बावजूद स्कूलों की स्थिति ठीक नहीं है। प्रसाधन खंडहर में तब्दील हैं तो स्कूल जर्जर हैं। बारिश में छतें टपक रही हैं। कनेक्शन तो हो गए हैं, लेकिन वायरिंग उखड़ गई है।
हर साल लाखों रुपये का बजट मिलने के बाद भी स्कूलों की हालत में सुधार नहीं आ रहा है। इससे जाहिर है कि मेंटीनेंस के नाम पर धन का गोलमाल किया जा रहा है। मौजूदा समय में जिले में 2600 सरकारी स्कूल हैं। इन स्कूलों में प्रसाधन तो बनवा दिए गए हैं, लेकिन इसमें से एक हजार स्कूलों में प्रसाधन निष्क्रिय हैं। यानि यह प्रसाधन अधूरे पड़े हैं या फिर बन गए हैं तो खंडहर में तब्दील हैं। इसी तरह करीब 1400 स्कूलों में हैंडपंप या शोपीस बने हैं या फिर दूषित पानी दे रहे हैं। कनेक्शन हर स्कूल में हो गए हैं, लेकिन 50 फीसदी स्कूलों में बिजली का उजाला अब तक नहीं हो पाया है। कहीं पर वायरिंग खराब है तो कहीं पर बल्व या फिर बोर्ड खराब हैं। फिर भी यहां पर तैनात अधिकारी मस्त हैं और बच्चे अव्यस्थाओं से त्रस्त हैं। सवाल ये उठता है कि आखिर प्राइमरी स्कूलों की दशा कब सुधरेगी।
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सीन एक : टपकती छतें, पानी में बैठ बच्चे करते पढ़ाई
छतोह ब्लॉक क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक स्कूल की हालत पतली है। भवन जर्जर है तो बारिश होने पर छतें टपकती है। फर्श तक में पानी भरा है। इसी में बैठकर बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। सीलन की वजह से दीवार दरक गई है। प्रसाधन जर्जर हालत में है। बावजूद इन्हें ठीक कराने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नतीजतन सीलन के कारण छत दीवारें गिरने का खतरा रहता है। प्रधानाध्यापक रमाकांत त्रिपाठी का कहना है कि इस संबंध में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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सीन दो : बच्चे 400 मीटर दूर जाते पानी पीने
बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय रानीखेड़ा, जहां चारदीवारी तक नहीं बनाई गई है। कुल छात्र 131 हैं, जिनके लिए पेयजल व्यवस्था के लिए एकमात्र इंडिया मार्का हैंडपंप लगा हुआ है, जो दूषित पेयजल उगल रहा है। बच्चों को पानी पीने के लिए लगभग 400 मीटर दूर जाना पड़ रहा है। रसोई घर में सिलेंडर नहीं है। लकड़ी में खाना बनाया जा रहा है। कमरों में पंखे तो लगे हैं, लेकिन कनेक्शन व वायरिंग न होने से छात्रों को गर्मी में ही बैठना पड़ता है। प्रधानाध्यापक रामसुमिरन वर्मा ने बताया कि कई बार लिखित शिकायत तो की गई, लेकिन कोई व्यवस्था अभी तक नहीं की गई। इससे दिक्कत आ रही है।
सीन तीन: विद्यालय में बाउंड्रीवाल ही नहीं
बछरावां क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय बहादुरनगर एवं प्राथमिक विद्यालय बहादुरनगर में विद्यालय में बाउंड्रीवाल ही नहीं है। विद्यालय मेें चहारदीवारी न होने से रसोई घर का सिलेंडर ताला तोड़कर चोरी हो गया है। चरवाहे आए दिन जानवर लेकर परिसर में घुस आते हैं। उत्पात मचाते हैं। प्रधानाध्यापक गंगा प्रसाद त्रिवेदी ने बताया कि बाउंड्रीवाल न होने से पौधरोपण एक भी पेड़ नहीं बचे हैं। आवारा जानवर परिसर में घुस आते हैं। अन्य असुविधाएं भी हैं। इससे अफसरों को अवगत करा दिया गया है। हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पूरे गुलाब सिंह गांव में लगा जर्जर हैंडपंप, जो खारा पानी दे रहा है।इससे यहां पढ़ने वाले बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्रसाधन हर स्कूल में बनवा दिए गए हैं। जिस स्कूल में जो कमी है, उसकी पूरी रिपोर्ट संबंधित क्षेत्र के बीईओ से मांगी गई हैं। बीईओ की रिपोर्ट मिलने के बाद जहां पर जो कमियां होंगी, उसे ठीक करा दी जाएंगी। पूरे प्रयास किए जा रहे हैं कि स्कूल आने वाले बच्चों को बेहतर सुविधा मिले।-संजय कुमार शुक्ला, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी