{"_id":"5a3d5d914f1c1b5c0c8b4a4a","slug":"151513971089-raebareli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उच्च शिखर पर पहुंचाती है ईश्वर में अगाध श्रद्धा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उच्च शिखर पर पहुंचाती है ईश्वर में अगाध श्रद्धा
Updated Sat, 23 Dec 2017 01:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उच्च शिखर पर पहुंचाती ईश्वर में अगाध श्रद्धा
इन्हौना (रायबरेली)। अमेठी जिले के सिंहपुर ब्लॉक के बाबा घिसियावन दास की तपस्थली श्रीधाम गंगापुर कुटी खेखरूआ में चल रहे पांच दिवसीय श्रीराम कृष्ण कीरत महायज्ञ एवं महासम्मेलन में अयोध्या धाम से पधारी मानस मर्मज्ञ माता कृष्ण प्रिया ने कहा कि ईश्वर में अगाध श्रद्धा भक्त को उच्च शिखर तक पहुंचाती है। ध्रुव और प्रहलाद जैसे चरित्र आज भी अनुकरणीय हैं। कहा कि भक्त ध्रुव के पिता उत्तानपाद ने ध्रुव की मां सुरुचि के संतान न होने के चलते सुनीति से दूसरा विवाह सुरुचि के दबाव में किया था, परंतु होनी की कौन कहे दोनों रानियों के घर में आने पर उन्हें संतान की प्राप्ति हुई।
कृष्ण प्रिया ने कहा कि सुरुचि का स्वभाव ईश भक्ति तथा धार्मिक प्रयोजन से जुड़ा रहता था। सुनीति चंचल तथा कुरूर स्वाभाव की थी। इसी वजह से महाराज उत्तानपाद पर अपने प्रभाव को बनाकर सुरुचि को महल से निकलवा दिया। मां के संस्कारों ने सुरुचि के पुत्र ध्रुव को इस तरह ईश भक्ति से जोड़ा कि संसार में ध्रुव जैसा भक्त नजर नहीं आया और भक्तों का नाम आने पर ध्रुव का नाम पहले आता है। ध्रुव का भगवान के प्रति अटूट विश्वास ने ही उसे इस शिखर पर पहुंचाया। इस अवसर पर महंत राम बचन दासजी महाराज, कर्ण बाजपेयी, छोटू मिश्र, मनोज आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
इन्हौना (रायबरेली)। अमेठी जिले के सिंहपुर ब्लॉक के बाबा घिसियावन दास की तपस्थली श्रीधाम गंगापुर कुटी खेखरूआ में चल रहे पांच दिवसीय श्रीराम कृष्ण कीरत महायज्ञ एवं महासम्मेलन में अयोध्या धाम से पधारी मानस मर्मज्ञ माता कृष्ण प्रिया ने कहा कि ईश्वर में अगाध श्रद्धा भक्त को उच्च शिखर तक पहुंचाती है। ध्रुव और प्रहलाद जैसे चरित्र आज भी अनुकरणीय हैं। कहा कि भक्त ध्रुव के पिता उत्तानपाद ने ध्रुव की मां सुरुचि के संतान न होने के चलते सुनीति से दूसरा विवाह सुरुचि के दबाव में किया था, परंतु होनी की कौन कहे दोनों रानियों के घर में आने पर उन्हें संतान की प्राप्ति हुई।
कृष्ण प्रिया ने कहा कि सुरुचि का स्वभाव ईश भक्ति तथा धार्मिक प्रयोजन से जुड़ा रहता था। सुनीति चंचल तथा कुरूर स्वाभाव की थी। इसी वजह से महाराज उत्तानपाद पर अपने प्रभाव को बनाकर सुरुचि को महल से निकलवा दिया। मां के संस्कारों ने सुरुचि के पुत्र ध्रुव को इस तरह ईश भक्ति से जोड़ा कि संसार में ध्रुव जैसा भक्त नजर नहीं आया और भक्तों का नाम आने पर ध्रुव का नाम पहले आता है। ध्रुव का भगवान के प्रति अटूट विश्वास ने ही उसे इस शिखर पर पहुंचाया। इस अवसर पर महंत राम बचन दासजी महाराज, कर्ण बाजपेयी, छोटू मिश्र, मनोज आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन