{"_id":"8f0760449e5cee9283c2cbba9fad68c6","slug":"1500-acres-of-agricultural-land-for-the-irrigation-crisis-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"1500 एकड़ खेतिहर भूमि के लिए सिंचाई का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
1500 एकड़ खेतिहर भूमि के लिए सिंचाई का संकट
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Nov 2015 11:38 PM IST
विज्ञापन
सिंचाई की सुविधा न होने से उत्पादन घट रहा है। इससे अन्नदाता परेशान हैं। क्षेत्र के गुलूपुर, अजमतउल्लागंज, चौहनियां, अड़ोबर, पारा, पूरे बैसन समेत अन्य तमाम गांवों में इस समय सिंचाई का भीषण संकट है।
इसकी वजह गुलूपुर माइनर में पानी न आना है। गुनावर, पहाड़पुर, कासो, हिलगी, मोहम्मदामऊ गांवों तक माइनर में पानी आता है, लेकिन पानी कम होने की वजह से किसान सिंचाई नहीं कर पाते।
किसान राम कुमार, शिव बालक, सुबेदार सिंह, सुशीला ने बताया कि 15 साल से माइनर में पानी नहीं आया। सिंचाई विभाग कार्यालय का घेराव किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
शोभा यादव, राम मिलन, राजेश कुमार आदि ने बताया कि निजी नलकूपों के भरोसे खेती हो रही है। इसमें लागत अधिक आती है, इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन शमीम अब्बासी ने कहा कि शासन से सिल्ट सफाई के लिए मिले बजट को ध्यान में रखते हुए नहरों और माइनरों का चयन किया गया है। गुलूपुर माइनर की सफाई भी कराई जाएगी।
विज्ञापन
इसकी वजह गुलूपुर माइनर में पानी न आना है। गुनावर, पहाड़पुर, कासो, हिलगी, मोहम्मदामऊ गांवों तक माइनर में पानी आता है, लेकिन पानी कम होने की वजह से किसान सिंचाई नहीं कर पाते।
विज्ञापन
किसान राम कुमार, शिव बालक, सुबेदार सिंह, सुशीला ने बताया कि 15 साल से माइनर में पानी नहीं आया। सिंचाई विभाग कार्यालय का घेराव किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
शोभा यादव, राम मिलन, राजेश कुमार आदि ने बताया कि निजी नलकूपों के भरोसे खेती हो रही है। इसमें लागत अधिक आती है, इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन शमीम अब्बासी ने कहा कि शासन से सिल्ट सफाई के लिए मिले बजट को ध्यान में रखते हुए नहरों और माइनरों का चयन किया गया है। गुलूपुर माइनर की सफाई भी कराई जाएगी।