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हिंदी देश की एकता और अस्मिता का सबसे प्रभावशाली माध्यम

Fri, 15 Sep 2017 12:32 AM IST
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:32 AM IST
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हिंदी देश की एकता और अस्मिता का सबसे प्रभावशाली माध्यम
हिंदी देश की एकता का प्रभावशाली माध्यम
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रायबरेली। जिले मेें हिंदी दिवस धूमधाम से मनाया गया। किसी ने गोष्ठी में हिंदी के महत्व को बताया तो किसी ने अंग्रेजी के आगे हिंदी की उपेक्षा पर अपना दर्द बया किया।शैक्षिक संस्थाओं में भाषण और प्रतियोगिताएं कराई गईं, विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। सभी ने हिंदी को नई ऊंचाइयां देने का आह्वान किया।
एनटीपीसी ऊंचाहार में गुरुवार को हिंदी पखवाड़ा शुरू हुआ। इस दौरान समूह महाप्रबंधक राजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि हिंदी देश की एकता और अस्मिता का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। इसके महत्व को देखते हुए भारतीय संविधान में हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा दिया गया है। परियोजना में राजभाषा से संबंधित सभी जिम्मेदारियों का तत्परता के साथ निर्वाह किया जा रहा है। अमेरिका, चीन, जापान जैसे देश अपनी भाषा अपनाकर विकसित हो सकते हैं तो भारत भी हिंदी को अपनाकर विकसित राष्ट्र बन सकता है। साहित्यकार डॉ. राधेश्याम सिंह, प्रबंधक (जन संपर्क) एके. श्रीवास्तव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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एसजेएस पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी सहभागिता बनाते हुए स्पीच, निबंध लेखन के साथ-साथ पोस्टर बना कर हिंदी दिवस की महत्ता को परिभाषित किया। भाषण प्रतियोगिता में कक्षा 3 से 5 के बच्चों ने प्रतिभाग करते हुए, भव्या, आदित्य, वैश्नवी ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाया। प्रबंध निदेशक रमेश बहादुर सिंह ने कहा कि दुर्भाग्य है कि हिंदी अभी तक संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा नहीं बनी, जबकि यह संख्या बल के अनुसार विश्व की तीसरी भाषा है। प्रधानाचार्या डॉ. बीना तिवारी ने हिंदी दिवस की महत्ता व सार्थकता के तमाम पहलुओं पर प्रकाश डाला। विद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी मनोज शर्मा ने बताया कि हिंदी अपने गौरवशाली समृद्ध इतिहास को समेटे हुए आज भी अपनी वास्तविक पहचान से विमुख है। एसजेएस पब्लिक स्कूल महराजगंज में प्रधानाचार्य रश्मि मिश्रा ने कहा कि हिंदी भाषा का सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर नीलू सिंह, अनूप, अभिषेक, विनोद आदि लोग उपस्थित रहे। न्यू स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल इंटरमीडिएट कॉलेज, त्रिपुला में शिक्षक पीएन मिश्र, शुचिता, सुभाषिता, सुगर्विता, मृदुता ने हिंदी का महत्व बताया। विद्यालय प्रबंधक शशिकांत शर्मा, सहप्रबन्धिका रश्मि शर्मा, प्रधानाचार्य शिव लखन प्रजापति ने बताया कि हिंदी का मूल ज्ञान इसके उच्चारण में निहित होता है, जो मनुष्य को हर मंच पर ख्याति अर्जित करने में सहायक होती है।
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फिरोज गांधी महाविद्यालय में हिंदी की दशा और दिशा विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में प्राचार्य डॉ. संजय कुमार पांडेय ने कहा कि हिंदी भाषा सहज और सरल है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिंदी विभाग के अध्यक्ष बद्रीदत्त मिश्र, डॉ. अजय सिंह ने हिंदी भाषा पर विस्तार से चर्चा की। इस मौके पर राकेश गुप्ता, चंपा श्रीवास्तव, संतोष पांडेय, स्नेहलता आदि मौजूद रहे।
स्वामी सत्यमित्रा नंद महाविद्यालय में हिंदी भाषा पर चर्चा करने के साथ भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें सुषमा प्रथम, आरती द्वितीय और चंद्र प्रकाश ने तीसरा स्थान हासिल किया। मुख्य अतिथि एफजी कॉलेज के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामेंद्र पांडेय, डॉ. संतलाल ने कहा कि हिंदी का बहुत महत्व है। महाविद्यालय के प्रबंधक राजेंद्र बाजपेयी ने कहा कि हर किसी को हिंदी की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने अतिथियों का आभार जताया। इस मौके पर डॉ. संतोष मिश्रा, मनोज बाजपेयी, वैशाली चंद्रा, बलवंत कुमार, उदयभान चौधरी आदि मौजूद रहे। पंचशील पीली कॉलेज में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में सूरज प्रथम, कोमल सिंह द्वितीय, शिवाकांत पांडेय को तीसरा स्थान मिला। भाषण प्रतियोगिता में अंजली गुप्ता प्रथम, श्रद्धा सिंह द्वितीय और रुकमणी त्रिवेदी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। सीमा सिंह और अर्चना सिंह ने नाटक प्रस्तुत कर समाज को आइना दिखाया। डॉ. ज्ञान बहादुर, श्रीकांत पांडेय, कृपाशंकर चौरसिया ने हिंदी का महत्व बताया। इस मौके पर विनीता मिश्रा, सुरेश यादव, पूजा सिंह, लवलेश मिश्रा, संदीप मौर्य आदि मौजूद रहे।


अंग्रेज और अंग्रेजी से मुक्ति चाहते थे गांधी जी
रायबरेली। जगतपुर क्षेत्र के टीकर गांव स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की समाधि पर क्षेत्रीय लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए और हिंदी दिवस पर रवींद्र सिंह चौहान ने उपवास रखा। चौहान ने कहा कि गांधी जी अंग्रेजी और अंग्रेजों से मुक्ति चाहते थे। अफसोस है कि हिंदी पर अंग्रेजी हावी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि नेहरू जी की वजह से देश अंग्रेजी भाषा की गुलामी से मुक्त नहीं हो पाया। इस मौके पर क्षेत्रीय लोग भी मौजूद रहे।
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