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सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवता लाने की पहल बनी मजाक
Updated Tue, 25 Jul 2017 01:30 AM IST
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सरकारी स्कूल-कॉलेजों में नहीं लगीं बॉयोमीट्रिक मशीनें
रायबरेली। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में सोमवार तक न तो बॉयोमीट्रिक मशीनें लगाई गईं और न ही इसके लिए कोई तैयारी की गई है। ऐेसे में शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की सरकारी पहल यहां पर मजाक बनकर रह गई है। विभागीय अधिकारी भी इसके लिए कोई तेजी नहीं दिखा रहे हैं। अधिकारी बजट न होने का रोना रो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के बॉयोमीट्रिक हाजिरी दर्ज कराने की घोषणा की थी। 25 जुलाई से यह व्यवस्था शुरू होनी है। लेकिन यहां पर अभी इसकी कोई तैयारी नहीं है। यहां पर प्राइमरी, पूर्व माध्यमिक स्कूलों की संख्या 2600, जबकि हाईस्कूल-इंटरमीडिएट स्कूलों की संख्या 313 है। इन सभी स्कूलों में बॉयोमीट्रिक मशीनें लगाई जानी हैं। अब देखना ये है कि स्कूलों में गुरुजी व अन्य कर्मचारी कब बॉयोमीट्रिक मशीन से हाजिरी लगा पाएंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार शुक्ला का कहना है कि स्कूलों में अभी तक बॉयोमीट्रिक मशीनें नहीं लग पाई हैं। इसके लिए बजट तक नहीं आया है। बजट की व्यवस्था होने पर मशीनें लगवाई जाएंगी। स्कूलों में बॉयोमीट्रिक लगाने की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।जिला विद्यालय निरीक्षक गिरधारीलाल कोली का कहना है कि सभी प्रधानाचार्योें को कॉलेजों में बॉयोमीट्रिक मशीन लगवाने के निर्देश दिए गए हैं। इनका दावा है कि एक-दो स्थानों पर मशीनें लग गई हैं, कहां पर लगी हैं, उनको भी नहीं पता। उनका कहना है कि अधिकतर स्कूलोें में यह सुविधा नहीं हो पाई है। जल्द सभी स्कूलों में मशीनें लग जाएंगी।
लापरवाह शिक्षकों के लिए बनेगी मुसीबत
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षक व अन्य कर्मचारियों के लेटलतीफ पहुंचने की शिकायतें आती रहती हैं। वे मनमाने ढंग से नौकरी करते हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था चौपट है। बॉयोमीट्रिक मशीन लग जाने के बाद से उनकी यह मनमानी नहीं चलेगी। यही वजह है कि अंदर ही अंदर सभी यही चाहते हैं कि जितने दिन हो सके यह मशीन न लगे तो उनके लिए राहत है। पर अंदर से सभी यही कहते फिर रहे हैं कि बायोमीट्रिक मशीन लग जाए।
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रायबरेली। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में सोमवार तक न तो बॉयोमीट्रिक मशीनें लगाई गईं और न ही इसके लिए कोई तैयारी की गई है। ऐेसे में शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की सरकारी पहल यहां पर मजाक बनकर रह गई है। विभागीय अधिकारी भी इसके लिए कोई तेजी नहीं दिखा रहे हैं। अधिकारी बजट न होने का रोना रो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के बॉयोमीट्रिक हाजिरी दर्ज कराने की घोषणा की थी। 25 जुलाई से यह व्यवस्था शुरू होनी है। लेकिन यहां पर अभी इसकी कोई तैयारी नहीं है। यहां पर प्राइमरी, पूर्व माध्यमिक स्कूलों की संख्या 2600, जबकि हाईस्कूल-इंटरमीडिएट स्कूलों की संख्या 313 है। इन सभी स्कूलों में बॉयोमीट्रिक मशीनें लगाई जानी हैं। अब देखना ये है कि स्कूलों में गुरुजी व अन्य कर्मचारी कब बॉयोमीट्रिक मशीन से हाजिरी लगा पाएंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार शुक्ला का कहना है कि स्कूलों में अभी तक बॉयोमीट्रिक मशीनें नहीं लग पाई हैं। इसके लिए बजट तक नहीं आया है। बजट की व्यवस्था होने पर मशीनें लगवाई जाएंगी। स्कूलों में बॉयोमीट्रिक लगाने की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।जिला विद्यालय निरीक्षक गिरधारीलाल कोली का कहना है कि सभी प्रधानाचार्योें को कॉलेजों में बॉयोमीट्रिक मशीन लगवाने के निर्देश दिए गए हैं। इनका दावा है कि एक-दो स्थानों पर मशीनें लग गई हैं, कहां पर लगी हैं, उनको भी नहीं पता। उनका कहना है कि अधिकतर स्कूलोें में यह सुविधा नहीं हो पाई है। जल्द सभी स्कूलों में मशीनें लग जाएंगी।
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लापरवाह शिक्षकों के लिए बनेगी मुसीबत
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षक व अन्य कर्मचारियों के लेटलतीफ पहुंचने की शिकायतें आती रहती हैं। वे मनमाने ढंग से नौकरी करते हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था चौपट है। बॉयोमीट्रिक मशीन लग जाने के बाद से उनकी यह मनमानी नहीं चलेगी। यही वजह है कि अंदर ही अंदर सभी यही चाहते हैं कि जितने दिन हो सके यह मशीन न लगे तो उनके लिए राहत है। पर अंदर से सभी यही कहते फिर रहे हैं कि बायोमीट्रिक मशीन लग जाए।
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