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137 कुष्ठ रोगी पा रहे पेंशन, 152 मरीज का हो रहा इलाज
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रायबरेली। कुष्ठ रोग के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए रविवार को कुष्ठ निवारण दिवस मनाया गया। साथ ही स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू किया गया।
13 फरवरी तक विविध कार्यक्रम करके लोगों को कुष्ठ रोग से बचाने के लिए जागरूक किया जाएगा। जिले में 137 कुष्ठ रोगियों को स्वस्थ होने के बाद हर महीने तीन-तीन हजार रुपये पेंशन दी जा रही है। वर्तमान समय में 152 मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष हम सबका यह है सपना, कुष्ठ मुक्त भारत हो अपना के नारे के साथ स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान रविवार से शुरू किया गया है।
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कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों एवं भेदभाव को समाप्त करने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलेगा। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग एक दीर्घकालीन संक्रामक रोग है, जो कि माइको बैक्टेरियम लेप्री नामक जीवाणु से फैलता है।
यह रोग हाथों, पैरों की परिधीय तंत्रिका, त्वचा, नाक की म्यूकोसा और श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। यदि कुष्ठ रोग की पहचान और उपचार सही समय से नहीं होता है तो यह स्थायी दिव्यांगता उत्पन्न कर देता है।
उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग में त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। धब्बे संवेदना रहित होते हैं और रोग की शुरुआत बहुत धीमी गति व शांति से होती है। यह तंत्रिकाओं, त्वचा और आंखों को प्रभावित करता है।
सभी संक्रामक रोगों में कुष्ठ रोग अत्यधिक घातक है, क्योंकि इस रोग में स्थाई शारीरिक दिव्यांगता हो सकती है। रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु श्वसन तंत्र जैसे छींकने, खांसने से शरीर में प्रवेश करता है।
यदि शुरुआती चरण में इसका निदान एवं उपचार नहीं किया गया तो स्थायी दिव्यांगता हो सकती है। जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. आरबी यादव ने बताया कि कुष्ठ रोग का इलाज पूरा कर चुके मरीजों को सरकार हर माह 3000 रुपये की पेंशन देती है। वर्तमान में जिले में 137 व्यक्ति पेंशन का लाभ पा रहे हैं। वर्तमान में जिले में कुष्ठ के 152 मरीज निशुल्क इलाज करा रहे हैं।
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13 फरवरी तक विविध कार्यक्रम करके लोगों को कुष्ठ रोग से बचाने के लिए जागरूक किया जाएगा। जिले में 137 कुष्ठ रोगियों को स्वस्थ होने के बाद हर महीने तीन-तीन हजार रुपये पेंशन दी जा रही है। वर्तमान समय में 152 मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष हम सबका यह है सपना, कुष्ठ मुक्त भारत हो अपना के नारे के साथ स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान रविवार से शुरू किया गया है।
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कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों एवं भेदभाव को समाप्त करने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलेगा। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग एक दीर्घकालीन संक्रामक रोग है, जो कि माइको बैक्टेरियम लेप्री नामक जीवाणु से फैलता है।
यह रोग हाथों, पैरों की परिधीय तंत्रिका, त्वचा, नाक की म्यूकोसा और श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। यदि कुष्ठ रोग की पहचान और उपचार सही समय से नहीं होता है तो यह स्थायी दिव्यांगता उत्पन्न कर देता है।
उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग में त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। धब्बे संवेदना रहित होते हैं और रोग की शुरुआत बहुत धीमी गति व शांति से होती है। यह तंत्रिकाओं, त्वचा और आंखों को प्रभावित करता है।
सभी संक्रामक रोगों में कुष्ठ रोग अत्यधिक घातक है, क्योंकि इस रोग में स्थाई शारीरिक दिव्यांगता हो सकती है। रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु श्वसन तंत्र जैसे छींकने, खांसने से शरीर में प्रवेश करता है।
यदि शुरुआती चरण में इसका निदान एवं उपचार नहीं किया गया तो स्थायी दिव्यांगता हो सकती है। जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. आरबी यादव ने बताया कि कुष्ठ रोग का इलाज पूरा कर चुके मरीजों को सरकार हर माह 3000 रुपये की पेंशन देती है। वर्तमान में जिले में 137 व्यक्ति पेंशन का लाभ पा रहे हैं। वर्तमान में जिले में कुष्ठ के 152 मरीज निशुल्क इलाज करा रहे हैं।