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मैटेरियल की भारी कमी, मरम्मत नहीं हो पा रहे ट्रांसफार्मर
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:31 AM IST
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मैटेरियल की भारी कमी, मरम्मत को रखे 150 ट्रांसफार्मर
रायबरेली। प्रदेश सरकार का 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का फरमान तार-तार हो रहा है। हालत यह है कि ट्रांसफार्मर की मरम्मत करने वाले श्रमिक काम छोड़कर जाने को मजबूर हैं। इसका मुख्य कारण वर्कशॉप में मैटेरियल की भारी कमी है। यहां न तो ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए तार है और नहीं ऑयल। ऐसे में ट्रांसफार्मर की मरम्मत नहीं हो पा रही हैं। खराब ट्रांसफार्मरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रतिदिन 10 से 15 ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं, जबकि चार से पांच ट्रांसफार्मर रिपेयर हो रहे हैं। मौजूदा समय में 150 से ज्यादा ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए रखे हैं। पर्याप्त सामान नहीं मिलने से अब तक चार श्रमिक काम छोड़कर जा चुके हैं।
जिले में विभिन्न क्षमता के करीब 12 हजार ट्रांसफार्मर लगे हैं। इस समय लो-वोल्टेज और ट्रांसफार्मर ओवरलोड होेने फुंक रहे हैं। 100 केवीए ट्रांसफार्मरों की मरम्मत त्रिपुला स्थित वर्कशॉप में होती है। यहां की हालत दयनीय है। वर्कशॉप पहुंचने के लिए कीचड़ युक्त रास्ता है। इसमें बड़े-बड़े गड्ढे हैं। परिसर में खराब ट्रांसफार्मरों का अंबार लगा है। प्रदेश सरकार ने खराब ट्रांसफार्मरों को बदलने का समय 72 घंटे से घटाकर 48 घंटे कर दिया है, लेकिन यहां पर संसाधनों की भारी कमी है। कई महीनों से तार और ऑयल समेत अन्य उपकरण नहीं आए। इससे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। इससे एक ओर जहां उपभोक्ता परेशान हैं, वहीं अभियंताओं को भी समस्या से दो चार होना पड़ रहा है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे वर्कशॉप के श्रमिक
वर्कशॉप में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत करने वाले श्रमिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि दो महीना हो गया, लेकिन पर्याप्त सामान नहीं भेजा गया है। काम नहीं मिलने की वजह से चार श्रमिक काम छोड़कर चले गए हैं। हरदासपुर के वारिश अली, अलीपुर खालसा के सुधीर ने बताया कि एक ट्रांसफार्मर की मरम्मत में 700 रुपये मिलते हैं। 12 घंटे में हम लोग 20 से 25 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कर लेते हैं, लेकिन वर्कशॉप में सामान नहीं होने पर खाली बैठना पड़ता है। रुस्तमपुर के रामप्रसाद यादव, इसराइल ने बताया कि ट्रांसफार्मर मरम्मत के हिसाब से मजदूरी दी जाती है। जुलाई और अगस्त में हर साल समस्या आती है। सब कुछ जानने के बावजूद पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी पहले से कोई तैयारी नहीं करते हैं। अब सामग्री उपलब्ध कराने में तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। इस समय से बमुश्किल से चार या पांच ट्रांसफार्मर ही तैयार हो पाते हैं। श्रमिकों ने बताया कि एचटी तार, एलटी तार, पैकिंग, आयल सील कई महीनों से नहीं आया है। पुराना सामान लगाकर ट्रांसफार्मर मरम्मत कर रहे हैं।
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जीएसटी के चलते मैटेरियल खरीदने में दिक्कत
वर्कशॉप के एसडीओ ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद सामान खरीद करने में दिक्कत आ रही है। कुछ सामान वर्कशॉप भेजा गया है। मामले से उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। मैटेरियल उपलब्ध होते ही वर्कशॉप को भेज दिया गया जाएगा।
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रायबरेली। प्रदेश सरकार का 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का फरमान तार-तार हो रहा है। हालत यह है कि ट्रांसफार्मर की मरम्मत करने वाले श्रमिक काम छोड़कर जाने को मजबूर हैं। इसका मुख्य कारण वर्कशॉप में मैटेरियल की भारी कमी है। यहां न तो ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए तार है और नहीं ऑयल। ऐसे में ट्रांसफार्मर की मरम्मत नहीं हो पा रही हैं। खराब ट्रांसफार्मरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रतिदिन 10 से 15 ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं, जबकि चार से पांच ट्रांसफार्मर रिपेयर हो रहे हैं। मौजूदा समय में 150 से ज्यादा ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए रखे हैं। पर्याप्त सामान नहीं मिलने से अब तक चार श्रमिक काम छोड़कर जा चुके हैं।
जिले में विभिन्न क्षमता के करीब 12 हजार ट्रांसफार्मर लगे हैं। इस समय लो-वोल्टेज और ट्रांसफार्मर ओवरलोड होेने फुंक रहे हैं। 100 केवीए ट्रांसफार्मरों की मरम्मत त्रिपुला स्थित वर्कशॉप में होती है। यहां की हालत दयनीय है। वर्कशॉप पहुंचने के लिए कीचड़ युक्त रास्ता है। इसमें बड़े-बड़े गड्ढे हैं। परिसर में खराब ट्रांसफार्मरों का अंबार लगा है। प्रदेश सरकार ने खराब ट्रांसफार्मरों को बदलने का समय 72 घंटे से घटाकर 48 घंटे कर दिया है, लेकिन यहां पर संसाधनों की भारी कमी है। कई महीनों से तार और ऑयल समेत अन्य उपकरण नहीं आए। इससे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। इससे एक ओर जहां उपभोक्ता परेशान हैं, वहीं अभियंताओं को भी समस्या से दो चार होना पड़ रहा है।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहे वर्कशॉप के श्रमिक
वर्कशॉप में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत करने वाले श्रमिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि दो महीना हो गया, लेकिन पर्याप्त सामान नहीं भेजा गया है। काम नहीं मिलने की वजह से चार श्रमिक काम छोड़कर चले गए हैं। हरदासपुर के वारिश अली, अलीपुर खालसा के सुधीर ने बताया कि एक ट्रांसफार्मर की मरम्मत में 700 रुपये मिलते हैं। 12 घंटे में हम लोग 20 से 25 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कर लेते हैं, लेकिन वर्कशॉप में सामान नहीं होने पर खाली बैठना पड़ता है। रुस्तमपुर के रामप्रसाद यादव, इसराइल ने बताया कि ट्रांसफार्मर मरम्मत के हिसाब से मजदूरी दी जाती है। जुलाई और अगस्त में हर साल समस्या आती है। सब कुछ जानने के बावजूद पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी पहले से कोई तैयारी नहीं करते हैं। अब सामग्री उपलब्ध कराने में तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। इस समय से बमुश्किल से चार या पांच ट्रांसफार्मर ही तैयार हो पाते हैं। श्रमिकों ने बताया कि एचटी तार, एलटी तार, पैकिंग, आयल सील कई महीनों से नहीं आया है। पुराना सामान लगाकर ट्रांसफार्मर मरम्मत कर रहे हैं।
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जीएसटी के चलते मैटेरियल खरीदने में दिक्कत
वर्कशॉप के एसडीओ ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद सामान खरीद करने में दिक्कत आ रही है। कुछ सामान वर्कशॉप भेजा गया है। मामले से उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। मैटेरियल उपलब्ध होते ही वर्कशॉप को भेज दिया गया जाएगा।