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सूचना के अधिकार अधिनियम का मुख्य
Updated Fri, 27 Oct 2017 12:46 AM IST
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जवाबदेही के प्रति जागरूक करता सूचना का अधिकार अधिनियम
रायबरेली। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का मुख्य उद्देश्य सुशासन को बढ़ावा देना है। यह अधिकार हमें अपने कार्यों को पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और जवाबदेही के प्रति जागरूक करता है। यह न्यायप्रिय शासन का द्योतक है। यह बातें गुरुवार को बचत भवन के सभागार में राज्य सूचना आयुक्त अरविंद सिंह विष्ट ने जन सूचना अधिकारियों को संबोधित करने के दौरान कही। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों से आम जनता की ओर से मांगी गई सूचनाएं समयावधि में देेने की बात कही। यदि लापरवाही की बात सामने आएगी तो कार्रवाई होगी।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि इस अधिकार ने समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी इतना ताकतवर बना दिया है कि वह प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी जनहित संबंधी सूचना मांग सकता है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम ने आमजन को अपने अधिकारों और कर्तव्यों से रू-ब-रू कराया है। उन्होंने जन सूचना अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मांगी गई सूचनाओं को एकत्रित कर प्रार्थी तक पहुंचाने में जन सूचना अधिकारियों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। इस अवसर पर जनपद के जनसूचना अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण देने वाले अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अधिकारियों को इस अधिनियम के बारे में बहुत ही सरलता से बताया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि प्रदेश में 45 हजार से ज्यादा मामले लंबित थे। जिनके निस्तारण में तेजी दिखाई गई है। लखनऊ मंडल में 15 हजार मामले लंबित हैं, जिनके निस्तारण के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
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रायबरेली। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का मुख्य उद्देश्य सुशासन को बढ़ावा देना है। यह अधिकार हमें अपने कार्यों को पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और जवाबदेही के प्रति जागरूक करता है। यह न्यायप्रिय शासन का द्योतक है। यह बातें गुरुवार को बचत भवन के सभागार में राज्य सूचना आयुक्त अरविंद सिंह विष्ट ने जन सूचना अधिकारियों को संबोधित करने के दौरान कही। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों से आम जनता की ओर से मांगी गई सूचनाएं समयावधि में देेने की बात कही। यदि लापरवाही की बात सामने आएगी तो कार्रवाई होगी।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि इस अधिकार ने समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी इतना ताकतवर बना दिया है कि वह प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी जनहित संबंधी सूचना मांग सकता है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम ने आमजन को अपने अधिकारों और कर्तव्यों से रू-ब-रू कराया है। उन्होंने जन सूचना अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मांगी गई सूचनाओं को एकत्रित कर प्रार्थी तक पहुंचाने में जन सूचना अधिकारियों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। इस अवसर पर जनपद के जनसूचना अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण देने वाले अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अधिकारियों को इस अधिनियम के बारे में बहुत ही सरलता से बताया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि प्रदेश में 45 हजार से ज्यादा मामले लंबित थे। जिनके निस्तारण में तेजी दिखाई गई है। लखनऊ मंडल में 15 हजार मामले लंबित हैं, जिनके निस्तारण के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
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