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10 लाख गरीबों को कैशलेस इलाज के लिए गोल्डन कार्ड का इंतजार
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रायबरेली। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जिले में दम तोड़ रही है। गरीबों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सरकार की मंशा अधूरी रह गई है। 2.60 लाख परिवारों के 13.10 लाख गरीबों को गोल्डन कार्ड देने थे, लेकिन तीन साल में मात्र तीन लाख गोल्डन कार्ड ही जारी हो पाए गए हैं।
ऐसी दशा में 10 लाख से अधिक गरीबों को गोल्डन कार्ड का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें कैशलेस इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वर्ष 2018 से गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लिए योजना संचालित की गई। योजना के तहत चयनित 13.10 लाख गरीबों के नाम गोल्डन कार्ड जारी करना था।
बिना गोल्डन कार्ड के पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज नहीं मिल सकता है। इसके बाद भी गोल्डन कार्ड जारी करने में विभाग कंजूसी कर रहा है।
तीन साल में मात्र तीन लाख लोगों को ही गोल्डन कार्ड दिए गए हैं। इसके लिए तमाम बार अभियान भी चलाया गया, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष गोल्डन कार्ड नहीं बनाए जा सके।
स्थिति यह है कि 10 लाख से अधिक लोगों को अब तक गोल्डन कार्ड नहीं दिया गया है। बिना गोल्डन कार्ड के गरीबों को निशुल्क इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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तीन साल में 10,358 गरीबों को ही मुफ्त इलाज
सितंबर 2018 से अब तक जिले में मात्र 10,358 गरीबों को ही कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकी है। इसमें 6,491 मरीजों को जिले के सरकारी और योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा दी गई।
3,067 मरीजों को कैशलेस इलाज के लिए दूसरे जिलों के चक्कर लगाने पड़े, क्योंकि योजना से जिले के जुड़े निजी अस्पतालों में इलाज संबंधी बंदोबस्त नहीं है। ऐसी दशा में लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज या अन्य बड़े शहरों में जाकर गरीबों को अपना इलाज करवाना पड़ा।
नर्सिंगहोम ने दिया धोखा, सरकारी अस्पतालों ने बचाई लाज
वर्तमान समय में जिले के सात निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए जोड़ा गया है, लेकिन इस निजी अस्पतालों ने धोखा ही दिया है।
तीन साल में जिले के अस्पतालों में 6,491 मरीजों का इलाज किया गया, लेकिन मात्र 1090 मरीजों का इलाज ही निजी अस्पतालों में हो सका।
शेष 5401 मरीजों का इलाज जिले के सरकारी अस्पतालों में मिला। विभाग भी अच्छा काम करने वाले निनी अस्पतालों को योजना से जोड़ने के लिए प्रयास नहीं कर रहा है। पूर्व में कई निजी अस्पतालों को जोड़ा गया, लेकिन उन्होंने काम ही नहीं किया।
अब तक निजी अस्पतालों में इलाज
अस्पताल इन्हें मिला इलाज
आर्यावर्त आई हॉस्पिटल 262
द रिलीफ हॉस्पिटल 110
देव नर्सिंग होम 80
जेएन हॉस्पिटल 69
सिटी नर्सिंग होम 355
अर्पण नर्सिंग होम 10
सरयूदेवी अस्पताल बछरावां 204
कुल 1090
आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की व्यवस्था की गई है। 2.60 लाख परिवारों के 13.10 लाख लोग योजना का लाभ पा सकते हैं। गोल्डन कार्ड लक्ष्य के सापेक्ष जारी नहीं हो पाए हैं। इसके लिए जल्द ही अभियान चलाकर सभी को गोल्डन कार्ड जारी कराए जाएंगे।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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ऐसी दशा में 10 लाख से अधिक गरीबों को गोल्डन कार्ड का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें कैशलेस इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वर्ष 2018 से गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लिए योजना संचालित की गई। योजना के तहत चयनित 13.10 लाख गरीबों के नाम गोल्डन कार्ड जारी करना था।
बिना गोल्डन कार्ड के पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज नहीं मिल सकता है। इसके बाद भी गोल्डन कार्ड जारी करने में विभाग कंजूसी कर रहा है।
तीन साल में मात्र तीन लाख लोगों को ही गोल्डन कार्ड दिए गए हैं। इसके लिए तमाम बार अभियान भी चलाया गया, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष गोल्डन कार्ड नहीं बनाए जा सके।
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स्थिति यह है कि 10 लाख से अधिक लोगों को अब तक गोल्डन कार्ड नहीं दिया गया है। बिना गोल्डन कार्ड के गरीबों को निशुल्क इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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तीन साल में 10,358 गरीबों को ही मुफ्त इलाज
सितंबर 2018 से अब तक जिले में मात्र 10,358 गरीबों को ही कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकी है। इसमें 6,491 मरीजों को जिले के सरकारी और योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा दी गई।
3,067 मरीजों को कैशलेस इलाज के लिए दूसरे जिलों के चक्कर लगाने पड़े, क्योंकि योजना से जिले के जुड़े निजी अस्पतालों में इलाज संबंधी बंदोबस्त नहीं है। ऐसी दशा में लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज या अन्य बड़े शहरों में जाकर गरीबों को अपना इलाज करवाना पड़ा।
नर्सिंगहोम ने दिया धोखा, सरकारी अस्पतालों ने बचाई लाज
वर्तमान समय में जिले के सात निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए जोड़ा गया है, लेकिन इस निजी अस्पतालों ने धोखा ही दिया है।
तीन साल में जिले के अस्पतालों में 6,491 मरीजों का इलाज किया गया, लेकिन मात्र 1090 मरीजों का इलाज ही निजी अस्पतालों में हो सका।
शेष 5401 मरीजों का इलाज जिले के सरकारी अस्पतालों में मिला। विभाग भी अच्छा काम करने वाले निनी अस्पतालों को योजना से जोड़ने के लिए प्रयास नहीं कर रहा है। पूर्व में कई निजी अस्पतालों को जोड़ा गया, लेकिन उन्होंने काम ही नहीं किया।
अब तक निजी अस्पतालों में इलाज
अस्पताल इन्हें मिला इलाज
आर्यावर्त आई हॉस्पिटल 262
द रिलीफ हॉस्पिटल 110
देव नर्सिंग होम 80
जेएन हॉस्पिटल 69
सिटी नर्सिंग होम 355
अर्पण नर्सिंग होम 10
सरयूदेवी अस्पताल बछरावां 204
कुल 1090
आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की व्यवस्था की गई है। 2.60 लाख परिवारों के 13.10 लाख लोग योजना का लाभ पा सकते हैं। गोल्डन कार्ड लक्ष्य के सापेक्ष जारी नहीं हो पाए हैं। इसके लिए जल्द ही अभियान चलाकर सभी को गोल्डन कार्ड जारी कराए जाएंगे।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ