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मुजफ्फरनगर दंगा: स्टिंग की असलियत परखी जाएगी

Mon, 14 Oct 2013 12:05 AM IST
अमर उजाला, बुलंदशहर
अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Mon, 14 Oct 2013 12:05 AM IST
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Prob on muzaffarnagar riots Sting

मुजफ्फरनगर दंगे पर नौकरशाहों के बयानों संबंधी एक न्यूज चैनल के स्टिंग की असलियत परखने का खाका तैयार हो गया है। तफ्तीश के लिए बनी विधानसभा सदस्यों की समिति 17 अक्तूबर को इसे अंतिम रूप देगी।

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इसके तहत न्यूज चैनल और खुफिया कैमरे पर बोलने वाले पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को नोटिस जारी किया जा रहा है। समिति के सदस्य विधायक दिलनवाज खां ने बताया कि विधानसभा समिति के सदस्य जल्द मुजफ्फरनगर भी जाएंगे।
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मुजफ्फननगर दंगे पर एक न्यूज चैनल के स्टिंग में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने प्रदेश के कद्दावर नेता का नाम कवाल कांड के आरोपियों को छुड़ाने में लिया था।
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स्टिंग में अफसरों का यह भी कहना था कि कवाल कांड की लापरवाही से ही जिले में दंगा भड़का। इस स्टिंग की असलियत परखने को सतीश निगम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विधानसभा सदस्यों की समिति गठित की गई।

समिति में शामिल बुलंदशहर के स्याना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेसी विधायक दिलनवाज खां ने बताया कि 17 अक्तूबर को विधानसभा में ही समिति की पहली बैठक होगी। उसमें जांच के बिंदुओं को फाइनल टच दिया जाएगा।  

ये है संभावित सवाल..

- स्टिंग में पारदर्शिता कितनी है
- स्टिंग किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल से प्रभावित तो नहीं
- कैमरे पर आने वाले अफसरों की भूमिका दंगे रोकने में कैसी रही
- अफसरों ने एक मंत्री के खिलाफ ही क्यों बोला
- इन अफसरों के तैनाती वाले इलाके में दंगे हुए या नहीं
- अफसरों ने सरकारी अभिलेखों में क्या दर्ज किया
- कंट्रोल रूम और थाने के रिकार्ड में क्या दर्ज है
- कार्रवाई से बचने के लिए तो स्टिंग का सहारा नहीं लिया
- बिना जान पहचान वाले लोगों के सामने इतना क्यों बोले

ये था मामला

दंगे के बाद एक न्यूज चैनल ने हेडकांस्टेबल, कई थानेदारों, सीओ और एसपी, एक एसडीएम का स्टिंग किया था। खुलासा हुआ था कि लखनऊ के निर्देश पर पुलिस के हाथ बंधे थे।


वह कार्रवाई नहीं कर सके थे। इस पर देशभर में हल्ला मचा था। इससे सुर्खियों में आए मंत्री को मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने, रासुका लगाने की मांग उठी। यहां तक कि कोर्ट से नोटिस जारी हो चुके हैं।

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