{"_id":"5ec6c5648ebc3e9062521639","slug":"without-food-and-water-migrant-laborers-spent-the-night-in-prayagraj","type":"story","status":"publish","title_hn":"बगैर भोजन-पानी के प्रवासी मजदूरों ने प्रयागराज में बिताई रात ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बगैर भोजन-पानी के प्रवासी मजदूरों ने प्रयागराज में बिताई रात
Thu, 21 May 2020 11:46 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 21 May 2020 11:46 PM IST
विज्ञापन
pratapgarh
- फोटो : pratapgarh
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूरत से प्रवासी श्रमिकों को लेकर प्रतापगढ़ आ रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन बुधवार रात साढ़े नौ घंटे प्रयागराज जंक्शन पर खड़ी रही। इससे ट्रेन में सवार मजदूर भूख-प्यास से तड़पते रहे।
सूरत से आ रहे सदर विकास खंड के बबुरहा निवासी सुरेंद्र कुमार, पट्टी के बैजलपुर निवासी कमलेश ने बताया कि बुधवार रात करीब 12.30 बजे ट्रेन प्रयागराज पहुंची। मऊआइमा प्रयागराज निवासी जीतेंद्र ने बताया कि प्रयागराज के रहने वाले लोगों को ट्रेनों से उतरने की अनुमति दी गई। ट्रेन को प्लेटफार्म पर ही रोक दिया गया। करीब साढ़े नौ घंटे बाद गुरुवार सुबह साढ़े नौ बजे ट्रेन खुली।
इस दौरान उसमें सवार श्रमिक भूख-प्यास से तड़पते रहे। विश्वनाथगंज निवासी रोहित ने बताया कि उसके साथ उसका चार वर्षीय बेटा मयंक और पत्नी रेखा देवी थी। भूख के मारे बच्चे का बुरा हाल था। हालांकि रात दो बजे के करीब रेल कर्मचारियों ने एक-एक पैकेट विस्किट उपलब्ध कराया। ट्रेन दोपहर में करीब एक बजे प्रतापगढ़ पहुंची। तब जाकर मजदूरों ने राहत की सांस ली।
विज्ञापन
प्रतापगढ़ स्टेशन के बारे में हमें जानकारी है। अगले स्टेशन पर क्या व्यवस्था की गई थी, मुझे नहीं पता है। दोपहर 12 बजे सूरत से आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन काफी लेट हो गई थी। हालांकि उस पर बहुत मजदूर नहीं थे। फतेहपुर, कौशांबी, चित्रकूट, बांदा के लोगों को प्रयागराज में ही उतार दिया गया था।
अनिल दूबे, स्टेशन अधीक्षक।
विज्ञापन
सूरत से आ रहे सदर विकास खंड के बबुरहा निवासी सुरेंद्र कुमार, पट्टी के बैजलपुर निवासी कमलेश ने बताया कि बुधवार रात करीब 12.30 बजे ट्रेन प्रयागराज पहुंची। मऊआइमा प्रयागराज निवासी जीतेंद्र ने बताया कि प्रयागराज के रहने वाले लोगों को ट्रेनों से उतरने की अनुमति दी गई। ट्रेन को प्लेटफार्म पर ही रोक दिया गया। करीब साढ़े नौ घंटे बाद गुरुवार सुबह साढ़े नौ बजे ट्रेन खुली।
विज्ञापन
इस दौरान उसमें सवार श्रमिक भूख-प्यास से तड़पते रहे। विश्वनाथगंज निवासी रोहित ने बताया कि उसके साथ उसका चार वर्षीय बेटा मयंक और पत्नी रेखा देवी थी। भूख के मारे बच्चे का बुरा हाल था। हालांकि रात दो बजे के करीब रेल कर्मचारियों ने एक-एक पैकेट विस्किट उपलब्ध कराया। ट्रेन दोपहर में करीब एक बजे प्रतापगढ़ पहुंची। तब जाकर मजदूरों ने राहत की सांस ली।
विज्ञापन
प्रतापगढ़ स्टेशन के बारे में हमें जानकारी है। अगले स्टेशन पर क्या व्यवस्था की गई थी, मुझे नहीं पता है। दोपहर 12 बजे सूरत से आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन काफी लेट हो गई थी। हालांकि उस पर बहुत मजदूर नहीं थे। फतेहपुर, कौशांबी, चित्रकूट, बांदा के लोगों को प्रयागराज में ही उतार दिया गया था।
अनिल दूबे, स्टेशन अधीक्षक।