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जंगली जानवर का दोबारा हमला
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 20 Jan 2015 11:23 PM IST
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जंगली जानवर ने शौच को गए एक अधेड़ पर दोबारा हमला कर दिया। इससे अधेड़ हड़बड़ाकर भागा। उसके शोर पर ग्रामीण भी मौके की तरफ जलती हुई लकड़ियां लेकर भागे। इससे जानवर भाग निकला। ग्रामीणों काफी देर तक उसकी खोज की लेकिन वह नहीं मिला। नवाबगंज थाना क्षेत्र के सोनामऊ गांव निवासी बासदेव यादव (50) पुत्र विशेषर शाम को शौच के लिए गया था। पहले से ही डर के कारण वह साथ में एक डंडा भी लेकर गया था।
वह शौच करने के लिए बैठा ही था कि उस पर जंगली जानवर ने हमला कर दिया। उसने डंडे को आगे किया तो वह उसके मुंह में चला गया। ऐसे में उसे उठकर भागने का मौका मिला और वह शोर मचाते हुए गांव की तरफ भागा। उसे अपने कपड़ों को भी होश नहीं रहा। किसी भी घटना के लिए तैयार गांव के लोगों ने पहले से ही जल रहे अलाव की लकड़ियां लेकर आवाज की दिशा में दौड़ पड़े। ग्रामीणों के शोर के कारण जानवर भाग निकला। लाठी-डंडे के साथ ही जलती हुई लकड़ी और टायर के साथ ग्रामीणों ने काफी देर उसकी खोज की लेकिन उसका पता नहीं चला। बहरहाल दूसरी घटना से ग्रामीण फिर से सहम गए हैं। देर रात लोगों ने अपने जानवरों की सुरक्षा के उपाय करने शुरू कर दिए थे। रविवार को सुबह भगवानदीन पर हुए हमले के बाद से ग्रामीणों वैसे भी डरे हुए थे।
वन विभाग ने जिस पिंजरे को जंगली जानवर पकड़ने को लगाया था वह बंदर पकड़ने वाला था। यही कारण था कि उसमें से जंगली जानवर भाग निकला। वन विभाग के लोगों के अनुसार वन विभाग के पास बड़े जानवरों को पकड़ने के लिए पिंजरा ही नहीं है। बंदर पकड़ने का पिंजरा था जिसका प्रयोग किया गया। इसके चलते वह जंगली जानवर उसे तोड़कर भाग निकला। वैसे भी वन विभाग उसे हिंसक नहीं मान रहा है। उसके अनुसार वह हैना यानी लकड़बग्घा ही है। अगर कोई बड़ा जानवर आता तो उसके पंजे के निशान उसकी मौजूदगी स्पष्ट कर देते। डीएफओ ने बताया कि बड़े जानवर के लक्षण नहीं मिले हैं। हैना होने के संकेत पाए गए हैं। इस पर विभागीय टीम को लगाया गया था। बुधवार से दो अन्य रेंज की टीम लगा दी जाएगी। साथ ही बाहर से पिंजरा मंगवाकर लगवा दिया जाएगा। इसके पूर्व भी वहां हैना का शव मिल चुका है।
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वह शौच करने के लिए बैठा ही था कि उस पर जंगली जानवर ने हमला कर दिया। उसने डंडे को आगे किया तो वह उसके मुंह में चला गया। ऐसे में उसे उठकर भागने का मौका मिला और वह शोर मचाते हुए गांव की तरफ भागा। उसे अपने कपड़ों को भी होश नहीं रहा। किसी भी घटना के लिए तैयार गांव के लोगों ने पहले से ही जल रहे अलाव की लकड़ियां लेकर आवाज की दिशा में दौड़ पड़े। ग्रामीणों के शोर के कारण जानवर भाग निकला। लाठी-डंडे के साथ ही जलती हुई लकड़ी और टायर के साथ ग्रामीणों ने काफी देर उसकी खोज की लेकिन उसका पता नहीं चला। बहरहाल दूसरी घटना से ग्रामीण फिर से सहम गए हैं। देर रात लोगों ने अपने जानवरों की सुरक्षा के उपाय करने शुरू कर दिए थे। रविवार को सुबह भगवानदीन पर हुए हमले के बाद से ग्रामीणों वैसे भी डरे हुए थे।
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वन विभाग ने जिस पिंजरे को जंगली जानवर पकड़ने को लगाया था वह बंदर पकड़ने वाला था। यही कारण था कि उसमें से जंगली जानवर भाग निकला। वन विभाग के लोगों के अनुसार वन विभाग के पास बड़े जानवरों को पकड़ने के लिए पिंजरा ही नहीं है। बंदर पकड़ने का पिंजरा था जिसका प्रयोग किया गया। इसके चलते वह जंगली जानवर उसे तोड़कर भाग निकला। वैसे भी वन विभाग उसे हिंसक नहीं मान रहा है। उसके अनुसार वह हैना यानी लकड़बग्घा ही है। अगर कोई बड़ा जानवर आता तो उसके पंजे के निशान उसकी मौजूदगी स्पष्ट कर देते। डीएफओ ने बताया कि बड़े जानवर के लक्षण नहीं मिले हैं। हैना होने के संकेत पाए गए हैं। इस पर विभागीय टीम को लगाया गया था। बुधवार से दो अन्य रेंज की टीम लगा दी जाएगी। साथ ही बाहर से पिंजरा मंगवाकर लगवा दिया जाएगा। इसके पूर्व भी वहां हैना का शव मिल चुका है।
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