फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Where to go for labor, women locked in cnc ward of hospital

कहां जाएं प्रसव पीड़िताएं, महिला अस्पताल के सीएनसी वार्ड में लग गया ताला

Sat, 18 May 2019 12:43 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 May 2019 12:43 AM IST
विज्ञापन
Where to go for labor, women locked in cnc ward of hospital
वार्ड बंद होने से रैन बसेरा में बैठीं प्रसव पीड़िताएं। - फोटो : pratapgarh
जिला महिला अस्पताल के सीएनसी वार्ड में सीएमएस ने ताला लगवा दिया। दरअसल, इस वार्ड का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। ताला लगाए जाने के कारण प्रसव पीड़िताओं के साथ ही प्रसूताओं को परेशान होना पड़ रहा है। उन्हें दर्द से कराहते हुए वार्ड के बजाए रैन बसेरा में बैठना पड़ रहा है। इस ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। 
विज्ञापन


जिला महिला अस्पताल में वर्षों पहले दो बेड के लेबर रूम का निर्माण कराया गया था। इसी से सटा दस बेड का अतिरिक्त सीएनसी वार्ड भी है। प्रसव पीड़िताओं के साथ ही प्रसूताओं और नवजातों को 12 घंटे तक इस वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जाता है। मगर सीएनसी वार्ड इन दिनों पूरी तरह से जर्जर हो गया है।
विज्ञापन


बरसात के दिनों में जहां छत से पानी टपकता है, वहीं गर्मी के दिनों में खुद ही छत का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। इससे वार्ड में भर्ती होने वाली प्रसव पीड़िताओं और प्रसूताओं के साथ ही नवजातों की जान का खतरा बना रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह देख जिला महिला अस्पताल की सीएमएस परेशान हो गईं। मरम्मत करवाने के बजाए दस बेड के सीएनसी वार्ड में सीएमएस ने ताला लगवा दिया। इससे महिला अस्पताल में आने वाली प्रसव पीड़िताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दर्द से कराहते हुए उन्हें रैन बसेरा में बैठना पड़ रहा है। महिला अस्पताल की नर्स बताती हैं कि प्रसव के आधे घंटे के बाद प्रसूताओं और नवजातों को जनरल वार्ड में शिफ्ट करवा दिया जाता है। प्रसव पीड़िताओं को लेबर रूम में उस समय ले जाया जाता है जब यह पता चलता है कि प्रसव होने वाला है। इसके पहले जगह के अभाव के चलते बाहर बैठा दिया जाता है। 

सौ बेड का अस्पताल चालू न होने से मरीज हो रहे परेशान 
जिला महिला अस्पताल के पीछे सौ बेड का अस्पताल बीते तीन वर्ष से बन रहा है। समय सीमा भी पूरी हो गई है। कार्यदायी संस्था ने अभी तक अस्पताल को विभाग को हैंडओवर नहीं किया है। जिसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।

मेडिकल कॉलेज निर्माण के चलते पुराने जर्जर भवन को तोड़े जाने का आदेश शासन की ओर से सीएमएस को मिल गया है। इसके चलते जर्जर सीएनसी वार्ड की भी मरम्मत नहीं करवाई जा रही है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। 


महिला अस्पताल का इमरजेंसी जर्जर हो गया है। सीएनसी वार्ड मरीज भर्ती करने लायक नहीं बचा। मेडिकल कॉलेज निर्माण के दौरान पुराने इमरजेंसी को खाली करने के लिए आदेश भी आ गया है। इसलिए मरम्मत नहीं कराई जा रही है। निर्माणाधीन सौ बेड का अस्पताल चालू होने से मरीजों को सहूलियत मिलेगी। 
रीता दूबे, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed