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वेंडिंग कमेटी का गठन नहीं, कैसे मिलेगी पटरी दुकानदारों को मदद

Mon, 29 Jun 2020 12:33 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2020 12:33 AM IST
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vending committee was not formed  how did  the shopkeepers get help
कोरोना संक्रमण की महामारी से निपटने के लिए किए गए लॉकडाउन में बेरोजगार हुए पटरी दुकानदारों को फिर से रोजगार से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना लागू की गई है। जिसका संचालन नवसृजित नगर पंचायतों में नहीं हो पा रहा है। इन नगर पंचायतों में सरकार की ओर से अभी तक कोई ग्रांट न मिलने से योजना अधर में लटकी हुई है। पटरी दुकानदार योजना का लाभ लेने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
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जिले की तीन नवसृजित नगर पंचायत कोहड़ौर, पृथ्वीगंज व सुवंसा में भले ही प्रभारी ईओ की तैनाती की गई है, लेकिन अभी नगर पंचायतों का काम प्रारंभ नहीं हो सका है। शासन से ग्रांट न मिलने के कारण सरकार की योजनाओं को अमल में नहीं लाया जा सका है। केवल कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा है।
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नगर पंचायत में तैनात ईओ का खाता शासन की डिमांड पर भेज भी दिया गया, लेकिन अभी तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। पूर्व में शासन ने नगर पंचायतों में शामिल गांवों के विकास की जिम्मेदारी प्रधानों को दे दी थी। इस बीच कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में पटरी दुकानदारों का कारोबार बंद करा दिया गया था। इस दौरान उनकी जमा पूंजी भी खर्च हो गई। पटरी दुकानदारों को राहत देते हुए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना लागू की गई है। यह नवसृजित नगर पंचायतों में भी प्रभावी है। नगर पालिका व नगर पंचायतों में गठित टाऊन वेंडिंग कमेटी ऐसे दुकानदारों को बैंक से 10 हजार रुपये का कर्ज दिलाने के लिए संस्तुति करती।
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पटरी दुकानदार अपना व्यवसाय प्रारंभ करते हुए कर्ज लेने वाले रुपये की अदायगी समय सीमा के भीतर करते। केवल तीन प्रतिशत ब्याज दुकानदारों को देना था। सात प्रतिशत ब्याज सरकार को देना है। कोहड़ौर, पृथ्वीगंज व सुवंसा में अभी तक टाऊन वेंडिंग कमेटी का गठन नहीं हो सका। जिसके चलते पटरी दुकानदार आर्थिक मदद के लिए अपना आवेदन लेकर भटक रहे हैं। यदि प्राप्त आवेदनों का सत्यापन कर भी लिया जाए तो कमेटी की संस्तुति नहीं हो सकती। ईओ कमेटी के अध्यक्ष होंगे। इसमे बैंकर्स व कर्मचारियों के साथ ही नगर पंचायत के संभ्रांत लोगों को शामिल किया जाना है। फिलहाल नगर पंचायतों में अभी तक कमेटी का गठन न होने और सरकार की ओर से कोई ग्रांट न मिलने से नगर पंचायतों में शामिल गांवों के पटरी दुकानदारों को कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
कहीं खुल गए कार्यालय तो कहीं हो रही तलाश
नवसृजित नगर पंचायतों के लिए कहीं कार्यालय खुल गए तो कहीं अभी मकान की तलाश हो रही है। कोहड़ौर व सुवंसा में अस्थायी कार्यालय खोल दिए गए हैं, लेकिन अभी तक पृथ्वीगंज में कार्यालय नहीं खुल सका। केवल ईओ नगर पंचायतों की औपचारिकता निभा रहे हैं। कार्यालय में कर्मचारी भी नहीं रखे जा सके। सूत्रों के अनुसार यदि कर्मचारियों को रख भी लिया जाता है तो उन्हें वेतन कहां से दिया जाएगा। इसलिए अभी तीनों नगर पंचायतों में कर्मचारी भी नहीं रखे जा सके।

नवसृजित नगर पंचायतों के सभी अधिशाषी अधिकारी को पत्र भेजकर कमेटी का गठन करने के लिए एडीएम द्वारा निर्देशित किया जा चुका है। पटरी दुकानदारों के आवेदन सत्यापन कर सभी को कर्ज देने के बैंकर्स से पत्राचार करना है।
मुदित सिंह, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका/ नोडल अधिकारी नगर पंचायत
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