{"_id":"5d7be82c8ebc3e017553a665","slug":"uproar-over-opd-s-failure-to-form-pratapgarh-news-ald254807974","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओपीडी का पर्चा न बनने पर हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओपीडी का पर्चा न बनने पर हंगामा
विज्ञापन
जिला अस्पताल में पर्चा न मिलने पर सीएमएस कार्यालय में हंगामा करते लोग।
- फोटो : PRATAPGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला अस्पताल में शुक्रवार को ओपीडी का पर्चा न बनने से खफा मरीजों ने जमकर हंगामा किया। ज्यादातर मरीज बगैर इलाज कराए लौट गए। दोपहर एक बजे सीएमएस फोटो स्टेट पर्चा वितरण कराने लगे। तब कहीं जाकर मरीजों को राहत मिली।
जिला अस्पताल में सरकारी अभिलेखों की छपाई करने वाले प्रिंटिंग प्रेस संचालक के करीब साढ़े चार लाख रुपये बकाया हैं। सूत्रों के मुताबिक, बिल भुगतान करने के लिए जिला अस्पताल के एक डाक्टर को हास्ताक्षर करना है। मगर वह हस्ताक्षर करने से इनकार कर दे रहे थे। बीच में भर्ती फार्म, ओपीडी पर्चा, डिस्चार्ज और रेफर स्लीप खत्म हो गई थी। एक कर्मचारी की मदद से किसी तरह इसे मंगाया गया, लेकिन इसका भुगतान नहीं हो सका।
गुरुवार को स्वास्थ्य कर्मचारी ने ओपीडी का पर्चा उठाकर अपने चैंबर में ले जाकर रख दिया। इसके बाद बीएसटी, रेफर और डिस्चार्ज के साथ अन्य रसीद को भी अपने स्टोर में रखकर ताला बंद कर दिया। इससे मरीजों को ओपीडी का पर्चा नहीं मिल रहा था। इसे लेकर मरीजों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस बारे में सीएमएस डा. योगेंद्र यति का कहना है कि बिल का भुगतान मेरे हस्ताक्षर से नहीं होता है। डॉक्टर एसी द्विवेदी को हस्ताक्षर करना था।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला अस्पताल में सरकारी अभिलेखों की छपाई करने वाले प्रिंटिंग प्रेस संचालक के करीब साढ़े चार लाख रुपये बकाया हैं। सूत्रों के मुताबिक, बिल भुगतान करने के लिए जिला अस्पताल के एक डाक्टर को हास्ताक्षर करना है। मगर वह हस्ताक्षर करने से इनकार कर दे रहे थे। बीच में भर्ती फार्म, ओपीडी पर्चा, डिस्चार्ज और रेफर स्लीप खत्म हो गई थी। एक कर्मचारी की मदद से किसी तरह इसे मंगाया गया, लेकिन इसका भुगतान नहीं हो सका।
विज्ञापन
गुरुवार को स्वास्थ्य कर्मचारी ने ओपीडी का पर्चा उठाकर अपने चैंबर में ले जाकर रख दिया। इसके बाद बीएसटी, रेफर और डिस्चार्ज के साथ अन्य रसीद को भी अपने स्टोर में रखकर ताला बंद कर दिया। इससे मरीजों को ओपीडी का पर्चा नहीं मिल रहा था। इसे लेकर मरीजों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस बारे में सीएमएस डा. योगेंद्र यति का कहना है कि बिल का भुगतान मेरे हस्ताक्षर से नहीं होता है। डॉक्टर एसी द्विवेदी को हस्ताक्षर करना था।
विज्ञापन