फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   UP Election 2022: After fifteen years, Rajabhaiya will get a challenge from SP

UP Election 2022 : कुंडा में राजाभैया को पंद्रह साल बाद सपा से मिलेगी चुनौती, अभी तक सपा नहीं उतारती थी प्रत्याशी

Mon, 15 Nov 2021 04:43 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 15 Nov 2021 04:43 PM IST
सार

2007, 2012 व 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कुंडा और बाबागंज में नहीं उतारे थे प्रत्याशी। राजा भैया सपा की सरकारों में मंत्री पद पर भी रहे। उन्हें सपा का समर्थन मिलता रहा। राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी को वोट देने के बाद अखिलेश यादव और राजाभैया के बीच मतभेद उत्पन्न हो गया। इसके बाद राजाभैया ने अपनी खुद की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का गठन कर लिया।

विज्ञापन
UP Election 2022: After fifteen years, Rajabhaiya will get a challenge from SP
अखिलेश यादव और राजा भैया - फोटो : twitter

विस्तार

जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया को एक बार फिर कुंडा व बाबागंज में सपा से चुनौती मिलेगी। पंद्रह साल तक सपा नेतृत्व ने राजाभैया के खिलाफ विधानसभा में प्रत्याशी नहीं उतारे थे। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा व बसपा की घेरेबंदी के बीच सपा के भी विरोध में आ जाने के बाद कुंडा व बाबागंज में राजाभैया के लिए चुनौती बढ़ सकती है।

विज्ञापन


कुंडा व बाबागंज विधानसभा को राजाभैया का गढ़ कहा जाता है। इन दोनों विधानसभाओं पर लंबे समय से उनका कब्जा है। सपा नेतृत्व से नजदीकियों के चलते पिछले तीन विधानसभा चुनावों में पार्टी ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे। कुंडा से राजाभैया और बाबागंज से विनोद सरोज को अपना समर्थन दिया। वर्ष 2007 में सपा ने दोनों विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे। उस चुनाव में बसपा को जिले में तीन सीटें मिली थीं।

विज्ञापन

काफी ताकत लगाने के बाद भी कुंडा व बाबागंज में बसपा प्रत्याशियों को हार का मुंह देेखना पड़ा था। वर्ष 2012 के चुनाव में भी सपा ने कुंडा व बाबागंज सीट पर राजाभैया व विनोद सरोज को समर्थन दे दिया। इस बार प्रदेश में सपा की सरकार बनी और राजाभैया मंत्री भी बने। 2017 के चुनाव में भी सपा ने दोनों विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारे। हालांकि इस बार सूबे में भाजपा की सरकार बनी।

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राजाभैया ने अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का गठन कर लिया। इस बीच राज्यसभा चुनाव में मतदान को लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व राजाभैया के बीच दूरी बन गई। लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज के समर्थन में आयोजित चुनावी जनसभा में राजाभैया के खिलाफ बयानबाजी की थी। लोकसभा चुनाव के बाद सपा नेतृत्व की निगाहें एक बार फिर कुंडा व बाबागंज पर गड़ गईं।

 सपा अध्यक्ष ने कुंडा नगर पंचायत की चेयरमैन के देवर छविनाथ यादव को जिले की कमान सौंपते हुए दोनों विधानसभाओं में बूथ कमेटी के गठन का निर्देश दिया। बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए करीब एक साल से छविनाथ यादव लगातार प्रयास कर रहे हैं। हालांकि मौजूदा समय में सपा जिलाध्यक्ष छविनाथ यादव जेल में हैं, मगर उनके भाई कुुंडा के पूर्व चेयरमैन गुलशन यादव क्षेत्र में सक्रिय हैं।

कुंडा में राजाभैया व बाबागंज विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे विनोद सरोज को टक्कर देने के लिए सपा रणनीति के तहत काम कर रही है। अब सपा की रणनीति कितनी कारगर हो सकेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed