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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Three years down the TB hospital X-ray machine

तीन साल से टीबी अस्पताल की एक्सरे मशीन खराब

Mon, 02 Feb 2015 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Mon, 02 Feb 2015 11:24 PM IST
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 गांवों में टीबी का इलाज नहीं हो रहा है। वहीं करीब तीन वर्ष से टीबी अस्पताल की एक्सरे मशीन खराब है।  इससे पीड़ितों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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बताया जाता है कि टीबी मरीजों को चिन्हित करने के लिए शहर से लेकर गांव तक स्वास्थ्य विभाग की टीम लगाई गई है। टीम का काम है कि वे मरीज को अस्पताल ले जाएं और जांच कराकर मुफ्त में इलाज कराएं। मगर ऐसा कुछ हो नहीं रहा है। ऐसा मामला शनिवार को क्षय रोग चिकित्सालय में देखने को मिला। एक भट्ठा मजदूर की टीबी के चलते मौत हो गई। कारण यह कि न तो कभी उसका इलाज हुआ था और न ही जांच कराई गई थी। पीएम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी मौन हैं।
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दरअसल शासन ने ऐसे ही लोगों की जांच के लिए क्षय रोग टीम का गठन किया है। उद्देश्य है कि टीम समय-समय पर तहसील और ब्लॉक क्षेत्रों में प्रचार प्रसार करने के साथ मरीजों को चिन्हित कर जांच कराए। उनका इलाज कराए। टीम को नि:शुल्क दवा भी दी जाती है। उद्देश्य की अनदेखी की जा रही है। परिणामस्वरूप मरीज झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाकर खांसी-जुकाम की दवा लेता रहता है।
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 हालत जब अधिक खराब होती है तब वह अस्पताल पहुंचता है। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। फतनपुर के नौड़ेरा गांव स्थित एक भट्ठा पर मजदूरी करने वाला सुल्तानपुर जनपद के गोधुंआ लम्भुआ निवासी शेर बहादुर सिंह टीबी का मरीज था। यह जानकारी किसी को नहीं थी। उसकी हालत बिगड़ी और मौत हो गई। संदिग्ध मान कर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों की पोल खुल गई। इसी तरह नगर कोतवाली के संसारपुर निवासी अरविंद कुमार को भी टीबी हो गई थी। न तो उसके परिजन इस ओर ध्यान दिए और न स्वास्थ्य कर्मियों ने ही जांच कराई। कुछ माह पहले अंरविंद की भी मौत हो गई थी। विभागीय अधिकारी अरविंद की पत्नी व बच्चे की भी जांच कराना उचित नहीं समझे। जब कि अरविंद के बड़ेे भाई की भी मौत टीबी के चलते हुई थी।


वहीं करीब तीन वर्ष से टीबी अस्पताल में लगी एक्सरे मशीन खराब है। विभागीय अधिकारी बनवाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। इससे मरीजों को एक्सरे के लिए या तो जिला अस्पताल या प्राइवेट केंद्र जाना पड़ता है। इस बारे में क्षय रोग अधिकारी राजीव कुमार सिंह से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।
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