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राशनकार्ड बनवाकर पांच माह से नहीं लिया राशन, 7562 कार्ड निरस्त
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thousand rashan card suspended in pratapgrah
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प्रतापगढ़। राशनकार्ड बनने के बाद भी पांच माह से गेहूं, चावल नहीं लेने वाले 11526 राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया है। 1193 ग्राम पंचायतों और पांच टाउन एरिया के लोगों ने यह राशन कार्ड बनवाया था। इन लाभार्थियों को अंगूठा नहीं लगाने से शासन ने ऐेसे लोगों को अपात्र मानते हुए योजना से बाहर कर दिया है।
जिले के 5,84,256 परिवारों को प्रतिमाह दो चरणों में गेहूं और चावल मिल रहा है। हर माह पहले चरण में प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना के तहत मुफ्त में गेहूं और चावल का वितरण किया जा रहा है। जबकि दूसरे चरण में प्रति यूनिट दो रुपये किग्रा गेहूं और तीन रुपये किग्रा की दर से चावल दिया जा रहा है। जिले में 11,526 परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अपना राशनकार्ड तो बनवा लिया, मगर अब वह राशन नहीं ले रहे हैं।
इसकी पुष्टि ई-पॉस मशीन से हुई है। दरअसल, कोरोना काल में मुंबई, दिल्ली, सूरत और हरियाणा से आने वाले लोगों ने विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाकर अपना राशनकार्ड तो बनवा लिया, मगर स्थितियां सामान्य होते ही वह अपने शहर को चले गए। ऐसे में इन राशनकार्डों पर गेहूं और चावल लेने के लिए कोई बचा ही नहीं है। विभागीय नियम है कि तीन माह तक राशन नहीं लेने वाले परिवारों का राशनकार्ड यह मानकर डिलीट कर दिया जाय कि अब उन्हें राशन की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, विभाग ने तीन माह का समय बीतने के बाद भी राशनकार्ड को निरस्त करने के लिए दो माह तक इंतजार करता रहा।
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निरस्त होने वाले राशनकार्डों में अधिकांश लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने दो प्रांतों में अपना राशनकार्ड बनवा रखा था। ऐसे लोगों का राशनकार्ड पहले ही निरस्त किया जा चुका है। इससे उन लोगों का राशनकार्ड बनने में आसानी होगी, जो पहले से प्रतीक्षा सूची में शामिल थे।
जो लोग नियमित राशन नहीं ले रहे हैं, उनका राशनकार्ड निरस्त किया जाएगा। लगातार तीन माह तक राशन नहीं लेने वालों को चिह्नित किया गया। 11,526 लोग ऐेसे मिले हैं, जो पांच माह से राशन नहीं ले रहे थे। इन लोगों का राशन अब जरूरतमंद लोगों को दिया जाएगा।
एसके पांडेय, एआरओ, जिला आपूर्ति विभाग
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जिले के 5,84,256 परिवारों को प्रतिमाह दो चरणों में गेहूं और चावल मिल रहा है। हर माह पहले चरण में प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना के तहत मुफ्त में गेहूं और चावल का वितरण किया जा रहा है। जबकि दूसरे चरण में प्रति यूनिट दो रुपये किग्रा गेहूं और तीन रुपये किग्रा की दर से चावल दिया जा रहा है। जिले में 11,526 परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अपना राशनकार्ड तो बनवा लिया, मगर अब वह राशन नहीं ले रहे हैं।
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इसकी पुष्टि ई-पॉस मशीन से हुई है। दरअसल, कोरोना काल में मुंबई, दिल्ली, सूरत और हरियाणा से आने वाले लोगों ने विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाकर अपना राशनकार्ड तो बनवा लिया, मगर स्थितियां सामान्य होते ही वह अपने शहर को चले गए। ऐसे में इन राशनकार्डों पर गेहूं और चावल लेने के लिए कोई बचा ही नहीं है। विभागीय नियम है कि तीन माह तक राशन नहीं लेने वाले परिवारों का राशनकार्ड यह मानकर डिलीट कर दिया जाय कि अब उन्हें राशन की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, विभाग ने तीन माह का समय बीतने के बाद भी राशनकार्ड को निरस्त करने के लिए दो माह तक इंतजार करता रहा।
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निरस्त होने वाले राशनकार्डों में अधिकांश लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने दो प्रांतों में अपना राशनकार्ड बनवा रखा था। ऐसे लोगों का राशनकार्ड पहले ही निरस्त किया जा चुका है। इससे उन लोगों का राशनकार्ड बनने में आसानी होगी, जो पहले से प्रतीक्षा सूची में शामिल थे।
जो लोग नियमित राशन नहीं ले रहे हैं, उनका राशनकार्ड निरस्त किया जाएगा। लगातार तीन माह तक राशन नहीं लेने वालों को चिह्नित किया गया। 11,526 लोग ऐेसे मिले हैं, जो पांच माह से राशन नहीं ले रहे थे। इन लोगों का राशन अब जरूरतमंद लोगों को दिया जाएगा।
एसके पांडेय, एआरओ, जिला आपूर्ति विभाग