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Pratapgarh News: समितियों पर स्टॉक नहीं, किसानों को खेती पिछड़ने का सता रहा डर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Nov 2024 01:18 AM IST
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There is no stock on the committees, farmers are afraid of falling behind in farming
साधन सहकारी समितियों पर वितरण के लिए डीएपी का स्टॉक नहीं होने से निराश किसान खाली हाथ लौट रहे हैं। खेती पिछड़ने के भय से किसान कालाबाजारी के शिकार हो रहे हैं। रविवार को भी किसान उर्वरक आने की खबर पर समितियों पर पहुंचते रहे।
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सदर विकासखंड के अचलपुर स्थित साधन सहकारी समिति से कादीपुर, भंगवा, महुआर, किशुनदासपुर के ग्रामीण जुड़े हैं। यहां से चलाकपुर, शिवसत समेत आसपास के ग्रामीण भी डीएपी खरीदने के इंतजार में है। रविवार को समिति पर खाद पहुंचने की खबर के बाद किसान पहुंचने लगे। ताला बंद देख निराश होकर किसान प्रमोद दुबे, इसरार, महुआर निवासी मुनीर अहमद भी वापस लौटे। इनका कहना है कि 15 दिन से केंद्र पर खाद नहीं है। खाद मिलने की उम्मीद पर केंद्र आता हूं, लेकिन फिर बैरंग लौटना पड़ता है। यह दर्द सिर्फ अचलपुर साधन सहकारी समिति का ही नहीं है बल्कि संडवाचंद्रिका, आसपुर देवसरा, मानधाता, शिवगढ़ समेत अन्य ब्लॉक क्षेत्र के किसानों का भी है। जहां खाद न होने के कारण किसानों को समितियों से बैरंग लौटना पड़ रहा है।
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जिले मेंं कुल 168 साधन सहकारी समितियां हैं, जिनके माध्यम से करीब साढ़े पांच लाख किसानों को खाद मुहैया कराई जाती है। रबी सीजन की फसलों की बोवाई का दौर चल रहा है, लेकिन खाद के बिना किसान गेहूं समेत अन्य फसलों की बोआई नहीं कर पा रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि किसानों को नैनो डीएपी व एनपीके का प्रयोग भी करना चाहिए। डीएपी समितियों पर भेजी जा रही है।
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अब दूसरे सप्ताह तक खाद मिलने का वादा
कृषि विभाग और सहकारिता विभाग का दावा है कि जिले में खाद संकट की परेशानी जल्दी दूर होगी। इसके लिए एक सप्ताह पहले से रटा रटाया जवाब मिल रहा है कि पत्र भेजा गया है। अभी एक सप्ताह डीएपी आने में वक्त लगेगा। करीब 13 से लेकर 14 सौ मीट्रिक टन डीएपी भेजने के लिए पत्र लिखा गया है। किसानों से अपेक्षा है कि वह मानक के तहत ही बोआई में खाद का प्रयोग करें।






जैविक खाद के नाम पर चकबनतोड़ साधन सहकारी समिति में बिक गई 60 बोरी मिलावटी डीएपी
सदर विकासखंड के चकबनतोड़ साधन सहकारी समिति पर शनिवार को डीएपी वितरण की शुरुआत किसानों को माला पहनाकर की गई। सचिव दिवाकर मिश्रा ने कुल 90 किसानों को इफ्को की डीएपी वितरित की। हालांकि इस दौरान समिति के जिम्मेदारों ने मनमानी की। किसानों के बीच चर्चा रही कि समिति से ही किसानों को 60 बोरी मिलावटी डीएपी की वितरण किया गया। जिसे जैविक डीएपी बताया जाता रहा। जबकि 60 बोरी वितरित डीएपी का कोई ब्यौरा भी अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया। इसे लेकर किसानों ने नाराजगी भी जताई। हंगामा होता देख किसानों को समिति संचालन से जुड़े लोगों ने समझा बुझाकर शांत कराया। जिला कोऑपरेटिव देवेंद्र वर्मन का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वह प्रकरण की जांच कराएंगे। इसके बाद ही कुछ बता पाएंगे।
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