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एक जुलाई से भी प्रतापगढ़ से ट्रेनों के संचालन के आसार नहीं
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रेलवे बोर्ड ने एक जुलाई से दो सौ और ट्रेनों को चलाने का फैसला किया है, लेकिन प्रतापगढ़ से ट्रेनों के संचालन के आसार नहीं नजर आ रहे हैं। इससे पहले दो जून से चलाई जा रहीं ट्रेनों में भी प्रतापगढ़ होकर गुजरने वाली एक भी ट्रेन नहीं है। इससे जिले के लोगों को ट्रेन पकडने के लिए प्रयागराज और लखनऊ का चक्कर लगाना पड़ रह है।
महामारी कोरोना वायरस के चलते रेलवे बोर्ड ने 25 मार्च से ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया।
बीच में प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशन ट्रेनों का संचालन किा गया। दो जून से रेलवे ने दो ट्रेनों का संचालन शुरू किया, लेकिन इनमें प्रतापगढ़ से चलने और गुजरने वाली कोई ट्रेन शामिल नहीं थी। दिल्ली जाने वाली पद्मावत एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस, मुंबई जाने वाली उद्योगनगरी के साथ ही कानपुर जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस को नहीं शुरू किया गया। अब एक जुलाई से दो सौ और ट्रेनों का संचालन के लिए रेलवे बोर्ड ने तैयारी शुरू कर दी है। इनमें भी अब तक प्रतापगढ़ से बनकर चलने वाली ट्रेनों का नाम शामिल नहीं किया गया है। ट्रेनों के बारे में रेलवे बोर्ड ने अब तक स्टेशन अधीक्षक को किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी है।
ट्रेनों का संचालन ठप होने से मरीज परेशान
प्रतापगढ़ से बनकर और जंक्शन से होकर गुजरने वाली ट्रेनों का संचालन ठप होने से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। जिले में इलाज की समुचित व्यवस्था न होने के कारण अधिकतर मरीज प्रयागराज या फिर लखनऊ, मुंबई और दिल्ली का चक्कर लगाते हैं। ट्रेनों के संचालन ठप होने के कारण अब उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कतें कैंसर रोगियों को हो रही है। इलाज कराने के लिए वह मुंबई नहीं जा पा रहे हैं।
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व्यापारियों की भी बढ़ गई हैं मुश्किलें
जिलेभर के बड़े व्यापारी सामानों की खरीदारी करने के लिए लखनऊ, कानपुर, बनारस और दिल्ली जाते हैं। महामारी कोरोना वायरस के चलते 25 मार्च से ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया गया। ऐसे में व्यापारी कानपुर, दिल्ली, लखनऊ और बनारस तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। फोन पर आर्डर देकर सामान बुक करवा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट से सामान उठा रहे हैं। व्यापारियों के लिए यह महंगा पड़ रहा है। जबकि टे्रनों से सामान मंगवाने में कम खर्च होता था।
रेलवे को प्रतिदिन ढाई लाख रुपये का नुकसान
महामारी कोरोना वायरस के चलते पद्मावत एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, वीपी पैसेंजर के साथ प्रतापगढ़ होकर गुजरने वाली अन्य ट्रेनों का संचालन न किए जाने से रेल विभाग को प्रतिदिन ढाई लाख से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। आरक्षण काउंटर के एक कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा कमाई पद्मावत एक्सप्रेस से ही होती थी।
एक जुलाई से संचालित होने वाली दो सौ ट्रेनों को लेकर रेलवे बोर्ड ने कोई जानकारी नहीं दी है। वैसे ट्रेनों का संचालन शुरू करना होता तो जानकारी मिल गई होती। टिकट की बिक्री भी शुरू कर दी जाती।
अनिल दूबे, स्टेशन अधीक्षक।
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महामारी कोरोना वायरस के चलते रेलवे बोर्ड ने 25 मार्च से ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया।
बीच में प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशन ट्रेनों का संचालन किा गया। दो जून से रेलवे ने दो ट्रेनों का संचालन शुरू किया, लेकिन इनमें प्रतापगढ़ से चलने और गुजरने वाली कोई ट्रेन शामिल नहीं थी। दिल्ली जाने वाली पद्मावत एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस, मुंबई जाने वाली उद्योगनगरी के साथ ही कानपुर जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस को नहीं शुरू किया गया। अब एक जुलाई से दो सौ और ट्रेनों का संचालन के लिए रेलवे बोर्ड ने तैयारी शुरू कर दी है। इनमें भी अब तक प्रतापगढ़ से बनकर चलने वाली ट्रेनों का नाम शामिल नहीं किया गया है। ट्रेनों के बारे में रेलवे बोर्ड ने अब तक स्टेशन अधीक्षक को किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी है।
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ट्रेनों का संचालन ठप होने से मरीज परेशान
प्रतापगढ़ से बनकर और जंक्शन से होकर गुजरने वाली ट्रेनों का संचालन ठप होने से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। जिले में इलाज की समुचित व्यवस्था न होने के कारण अधिकतर मरीज प्रयागराज या फिर लखनऊ, मुंबई और दिल्ली का चक्कर लगाते हैं। ट्रेनों के संचालन ठप होने के कारण अब उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कतें कैंसर रोगियों को हो रही है। इलाज कराने के लिए वह मुंबई नहीं जा पा रहे हैं।
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व्यापारियों की भी बढ़ गई हैं मुश्किलें
जिलेभर के बड़े व्यापारी सामानों की खरीदारी करने के लिए लखनऊ, कानपुर, बनारस और दिल्ली जाते हैं। महामारी कोरोना वायरस के चलते 25 मार्च से ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया गया। ऐसे में व्यापारी कानपुर, दिल्ली, लखनऊ और बनारस तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। फोन पर आर्डर देकर सामान बुक करवा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट से सामान उठा रहे हैं। व्यापारियों के लिए यह महंगा पड़ रहा है। जबकि टे्रनों से सामान मंगवाने में कम खर्च होता था।
रेलवे को प्रतिदिन ढाई लाख रुपये का नुकसान
महामारी कोरोना वायरस के चलते पद्मावत एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, वीपी पैसेंजर के साथ प्रतापगढ़ होकर गुजरने वाली अन्य ट्रेनों का संचालन न किए जाने से रेल विभाग को प्रतिदिन ढाई लाख से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। आरक्षण काउंटर के एक कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा कमाई पद्मावत एक्सप्रेस से ही होती थी।
एक जुलाई से संचालित होने वाली दो सौ ट्रेनों को लेकर रेलवे बोर्ड ने कोई जानकारी नहीं दी है। वैसे ट्रेनों का संचालन शुरू करना होता तो जानकारी मिल गई होती। टिकट की बिक्री भी शुरू कर दी जाती।
अनिल दूबे, स्टेशन अधीक्षक।