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Pratapgarh News: अवसाद के मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज में नहीं हैं दवाएं
Thu, 28 Dec 2023 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Thu, 28 Dec 2023 02:23 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइक्रेट्रिक विभाग में अवसाद के मरीजों के लिए दवाएं नहीं हैं। परामर्श के बाद मरीजों को बाहर की दवा लिखी जा रही हैं। एक मरीज को एक माह की दवा लेने के लिए करीब डेढ़ हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कॉलेज में दवा नहीं मिलने की वजह से मरीज परेशान हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में न्यूरो साइक्रेट्रिक डॉ. अमित यादव की तैनाती है। ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 मरीज इलाज कराने आते हैं। परेशानी यह यह कि मेडिकल कॉलेज के दवा भंडार में न्यूरो साइक्रट्रिक की दवाएं ही नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ हैं।
मरीजों के सामने बड़ी परेशानी यह भी है कि जब वह न्यूरो की बीमारी की दवा लेने मेडिकल स्टोर पर जाते हैं तो दुकानदार उन्हें मना कर देते हैं। उनका कहना है कि नारकोटिक्स श्रेणी की दवाएं बेचने में झंझट बहुत है। पर्चे की छाया प्रति लेने के साथ लिखापढ़ी के बाद न्यूरो की दवाएं देने का निर्देश है।
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मरीजों के मुताबिक काफी इंतजार और मिन्नत के बाद मेडिकल स्टोर से दवा मिल पाती है। दवाओं का मूल्य भी मनमाना रहता है, किसी तरह की छूट नहीं दी जाती। मरीजों की इस परेशानी पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।
क्या बोले मरीज
न्यूरो साइक्रेट्रिक के पास मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने गई थी। डॉक्टर ने कुछ दवा सरकारी तो कुछ मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए कहा। सरकारी अस्पताल के दवा काउंटर पर दवा नहीं मिली। मेडिकल स्टोर पर दवा लेनी पड़ी।
संतोषी, दहिलामऊ।
मेरा इलाज प्रयागराज के न्यूरो साइक्रेट्रिक से चल रहा है। मुझे पता चला कि मेडिकल कॉलेज में अब इलाज शुरू हो गया है। डॉक्टर से संपर्क किया। दवा लिखाई, लेकिन दवा मेडिकल कॉलेज में नहीं मिली। मजबूरन में डेढ़ हजार रुपये में एक महीने की दवा बाजार से खरीदनी पड़ी।
आशुतोष कुमार, अजीत नगर
न्यूरो से जुड़ी कुछ दवाएं आ रही हैं, जो नहीं है, उन्हें जल्द ही मंगवा लिया जाएगा। डिमांड भेज दी गई है।
डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज में न्यूरो साइक्रेट्रिक डॉ. अमित यादव की तैनाती है। ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 मरीज इलाज कराने आते हैं। परेशानी यह यह कि मेडिकल कॉलेज के दवा भंडार में न्यूरो साइक्रट्रिक की दवाएं ही नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ हैं।
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मरीजों के सामने बड़ी परेशानी यह भी है कि जब वह न्यूरो की बीमारी की दवा लेने मेडिकल स्टोर पर जाते हैं तो दुकानदार उन्हें मना कर देते हैं। उनका कहना है कि नारकोटिक्स श्रेणी की दवाएं बेचने में झंझट बहुत है। पर्चे की छाया प्रति लेने के साथ लिखापढ़ी के बाद न्यूरो की दवाएं देने का निर्देश है।
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मरीजों के मुताबिक काफी इंतजार और मिन्नत के बाद मेडिकल स्टोर से दवा मिल पाती है। दवाओं का मूल्य भी मनमाना रहता है, किसी तरह की छूट नहीं दी जाती। मरीजों की इस परेशानी पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।
क्या बोले मरीज
न्यूरो साइक्रेट्रिक के पास मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने गई थी। डॉक्टर ने कुछ दवा सरकारी तो कुछ मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए कहा। सरकारी अस्पताल के दवा काउंटर पर दवा नहीं मिली। मेडिकल स्टोर पर दवा लेनी पड़ी।
संतोषी, दहिलामऊ।
मेरा इलाज प्रयागराज के न्यूरो साइक्रेट्रिक से चल रहा है। मुझे पता चला कि मेडिकल कॉलेज में अब इलाज शुरू हो गया है। डॉक्टर से संपर्क किया। दवा लिखाई, लेकिन दवा मेडिकल कॉलेज में नहीं मिली। मजबूरन में डेढ़ हजार रुपये में एक महीने की दवा बाजार से खरीदनी पड़ी।
आशुतोष कुमार, अजीत नगर
न्यूरो से जुड़ी कुछ दवाएं आ रही हैं, जो नहीं है, उन्हें जल्द ही मंगवा लिया जाएगा। डिमांड भेज दी गई है।
डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।