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भगवान भरोसे मरीज, न जांच, न इलाज का इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 07 Sep 2016 11:38 PM IST
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सीतापुर जिला अस्पताल में बेड न मिलने से फर्श पर चल रहा इलाज।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में डेंगू के मरीज के इलाज और जांच की कोई सुविधा नहीं है। अगर इस तरह का कोई संदिग्ध मरीज आ भी जाता है उसे बुखार बताकर इलाज किया जाता है। जब तक इलाहाबाद और लखनऊ रेफर किया जाता है तब तक बहुत देर हो जाती है और मरीज की हालत बिगड़ जाती है। जांच किट और वार्ड के अभाव में मरीजों का इलाज यहां के अस्पतालाें में संभव नहीं हो पा रहा है।
कुंडा और पट्टी में डेंगू से मरीज की मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा सक्रिय नहीं हो रहा है। जांच और इलाज न सही मगर दवा और फॉगिंग तो अफसर करा ही सकते हैं। मगर वो भी नहीं हो पा रहा है। स्वच्छता कार्यक्रम के लिये ग्राम पंचायत स्तर की इकाइयां भी उदासीन हैं। दवा आदि का छिड़काव कराने के लिये प्रधान और एएनएम के संयुक्त खाते में भेजे गए सरकारी धन को लोग दबाकर बैठ गए हैं। जिससे गांव में मच्छर और गंदगी से फैलने वाली अन्य तमाम बीमारियां पांव पसार रही हैं।
उधर स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि डेंगू के मच्छर यहां की जलवायु में पनप नहीं सकते हैं। जो भी मरीज है वे बाहर से यहां आए हैं। अगर इस तरह का कोई केस सामने आता है तो उसका इलाज सरकारी या प्राइवेट कहीं पर भी संभव नहीं है। क्योंकि अस्पतालों में शासन स्तर से जांच और बाद में इलाज की सुविधा नहीं प्रदान की गई है। सीएमओ डॉक्टर यूके पांडेय का कहना है कि जहां पर मलेरिया और डेंगू के पॉजिटिव केस मिलते हैं उसी इलाके में ही दवा का छिड़काव किया जा सकता है। पीड़ित और उसके घरवालों को दवा दी जाती है। बताया कि कुुंडा के कई गांव में मलेरिया की शिकायत मिली है। वहां पर दवा आदि का छिड़काव किया जा रहा है। डेंगू के मरीज की जांच और इलाज की सुविधा केवल मेडिकल कॉलेजों में ही है। पट्टी में डेंगू से सदहा के राजबहादुर यादव की मौत हो चुकी है।
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कुंडा और पट्टी में डेंगू से मरीज की मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा सक्रिय नहीं हो रहा है। जांच और इलाज न सही मगर दवा और फॉगिंग तो अफसर करा ही सकते हैं। मगर वो भी नहीं हो पा रहा है। स्वच्छता कार्यक्रम के लिये ग्राम पंचायत स्तर की इकाइयां भी उदासीन हैं। दवा आदि का छिड़काव कराने के लिये प्रधान और एएनएम के संयुक्त खाते में भेजे गए सरकारी धन को लोग दबाकर बैठ गए हैं। जिससे गांव में मच्छर और गंदगी से फैलने वाली अन्य तमाम बीमारियां पांव पसार रही हैं।
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उधर स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि डेंगू के मच्छर यहां की जलवायु में पनप नहीं सकते हैं। जो भी मरीज है वे बाहर से यहां आए हैं। अगर इस तरह का कोई केस सामने आता है तो उसका इलाज सरकारी या प्राइवेट कहीं पर भी संभव नहीं है। क्योंकि अस्पतालों में शासन स्तर से जांच और बाद में इलाज की सुविधा नहीं प्रदान की गई है। सीएमओ डॉक्टर यूके पांडेय का कहना है कि जहां पर मलेरिया और डेंगू के पॉजिटिव केस मिलते हैं उसी इलाके में ही दवा का छिड़काव किया जा सकता है। पीड़ित और उसके घरवालों को दवा दी जाती है। बताया कि कुुंडा के कई गांव में मलेरिया की शिकायत मिली है। वहां पर दवा आदि का छिड़काव किया जा रहा है। डेंगू के मरीज की जांच और इलाज की सुविधा केवल मेडिकल कॉलेजों में ही है। पट्टी में डेंगू से सदहा के राजबहादुर यादव की मौत हो चुकी है।
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