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बेल्हा लोक महोत्सव में प्रस्तुतियों को देख गदगद रहे दर्शक
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 01 Feb 2015 11:25 PM IST
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बेल्हा लोक महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को दहेज प्रथा के खिलाफ आयोजित नाट्य कार्यक्रमों की मुख्य अतिथि सांसद कुं. हरिवंश सिंह ने सराहना की। शानदार प्रस्तुतियों को देख गदगद दर्शक तालियां पीटते रहे। लोककलाकारों के करतब को लोगों ने खूब सराहा।
सांसद ने कहा कि लोक कलाओं को संरक्षित करने का बेल्हा लोक महोत्सव बेहतर मंच है। इस तरह के कार्यक्रमों को और भव्य रूप दिए जाने की आवश्यकता है। अगले वर्ष वह महोत्सव को बड़ा रूप देने में खुद भी सहयोग करेंगे। कहा कि मिटती कला को जीवंत करने के साथ इस कार्यक्रम में दहेज जैसी कुप्रथा पर चोट करने वाली प्रस्तुति समाज सुधार की सीख देती है। आज दहेज लोभियों ने बेटियों की शादियों को खर्चीला बना दिया है। हर व्यक्ति को दहेज के विरोध में आगे आना होगा। दहेज जैसी कुप्रथा से देर सबेर हर व्यक्ति को जूझना पड़ रहा है।
दहेज का दानव सबसे ज्यादा गरीबों को प्रताड़ित करता है। इसलिए दहेज प्रथा का विरोध होना चाहिए। बच्चों ने जिस तरह से दहेज विरोधी कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उससे अहसास होता है कि आने वाली पीढ़ी में दहेज को लेकर काफी दर्द है। महोत्सव मंच पर राधा-कृष्ण की झांकी का जीवंत मंचन देख लोग भक्तिभावना के रस में डूब गए। हर कोई राधा व कृष्ण का जयकारा लगाने से खुद को नहीं रोक सका। कार्यक्रमों का दौर चलता रहा और दर्शक तालियां पीटते रहे।
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सांसद ने कहा कि लोक कलाओं को संरक्षित करने का बेल्हा लोक महोत्सव बेहतर मंच है। इस तरह के कार्यक्रमों को और भव्य रूप दिए जाने की आवश्यकता है। अगले वर्ष वह महोत्सव को बड़ा रूप देने में खुद भी सहयोग करेंगे। कहा कि मिटती कला को जीवंत करने के साथ इस कार्यक्रम में दहेज जैसी कुप्रथा पर चोट करने वाली प्रस्तुति समाज सुधार की सीख देती है। आज दहेज लोभियों ने बेटियों की शादियों को खर्चीला बना दिया है। हर व्यक्ति को दहेज के विरोध में आगे आना होगा। दहेज जैसी कुप्रथा से देर सबेर हर व्यक्ति को जूझना पड़ रहा है।
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दहेज का दानव सबसे ज्यादा गरीबों को प्रताड़ित करता है। इसलिए दहेज प्रथा का विरोध होना चाहिए। बच्चों ने जिस तरह से दहेज विरोधी कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उससे अहसास होता है कि आने वाली पीढ़ी में दहेज को लेकर काफी दर्द है। महोत्सव मंच पर राधा-कृष्ण की झांकी का जीवंत मंचन देख लोग भक्तिभावना के रस में डूब गए। हर कोई राधा व कृष्ण का जयकारा लगाने से खुद को नहीं रोक सका। कार्यक्रमों का दौर चलता रहा और दर्शक तालियां पीटते रहे।
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