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प्रतापगढ़ : लखनऊ से टीम ने डॉल्फिन मछली का रेस्क्यू, दो घंटे छकाने के बाद आई जाल में, गंगा में छोड़ी गई

Mon, 23 Jan 2023 01:17 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 23 Jan 2023 01:17 AM IST
सार

क्षेत्र की सगरा रजबहा में दिखी राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन का तीसरे दिन रविवार को रेस्क्यू किया गया। डाॅल्फिन की जान को खतरा भांपते हुए वन विभाग ने लखनऊ से विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय रेस्क्यू टीम बुलाई थी।

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Team from Lucknow rescues dolphin fish, caught in net after two hours, released in Ganga
Pratapgarh News : घंटों मशक्कत के बाद जाल में आई डॉल्फिन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

क्षेत्र की सगरा रजबहा में दिखी राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन का तीसरे दिन रविवार को रेस्क्यू किया गया। डाॅल्फिन की जान को खतरा भांपते हुए वन विभाग ने लखनऊ से विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय रेस्क्यू टीम बुलाई थी। दिन निकलते ही डॉल्फिन को पकड़ने की मशक्कत शुरू हुई। डॉल्फिन ने रेस्क्यू टीम को दो घंटे छकाया। टीम सदस्यों ने नहर में जाल डालकर डॉल्फिन को पकड़ लिया।

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मौके सेे करीब 40 किमी. दूर विशेष प्रबंध कर डॉल्फिन को कालाकांकर ले जाया गया। जहां डॉल्फिन को गंगा नदी में सकुशल छोड़ दिया। अब तीन दिन से हैरान परेशान जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है।लालगंज इलाके की सगरा रजबहा में शुक्रवार की शाम देखी गई राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन देखी गई थी। दो दिन से वन विभाग टीम उसे पकड़ने के लिए परेशान थी। एक बार डॉल्फिन पकड़ में आई भी तो संसाधन नहीं होने से उसे फिर नहर में छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने भी डॉल्फिन को दो बार पकड़ा, लेकिन कार्रवाई के खौफ में छोड़ दिया।

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Team from Lucknow rescues dolphin fish, caught in net after two hours, released in Ganga
डॉल्फिन मछली को वाहन में लादते लोग। - फोटो : अमर उजाला।

डॉल्फिन की जान को खतरा देख जिले के अफसरों ने लखनऊ से रेस्क्यू टीम को बुलाया। शनिवार की देर रात लखनऊ से डॉ. शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में डॉ. सौरभ दीवान, डॉ. अरुणिमा सिंह समेत पांच सदस्यीय टीएसए की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। अंधेरा होने के कारण टीम ने रविवार की सुबह डॉल्फिन को पकड़ने की योजना बनाई।

रविवार को सुबह छह बजे ही टीम सदस्य डॉल्फिन का रेस्क्यू करने नगर किनारे पहुंच गई। सांगीपुर थाना क्षेत्र के हर्षपुर-इटौरी गांव के बीच नहर में जाल डालकर रोकी गई डॉल्फिन को पकड़ने के लिए रेस्क्यू टीम ने पानी में उतरी। जाल डालकर डॉल्फिन को पकड़ने का प्रयास शुरू किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक डॉल्फिन ने रेस्क्यू टीम को दो घंटे तक छकाए रखा।

 

Team from Lucknow rescues dolphin fish, caught in net after two hours, released in Ganga
डॉल्फिन मछली को पकड़ते लोग। - फोटो : अमर उजाला।

इस बीच कई बार तो डॉल्फिन रेस्क्यू टीम के हाथ आते-आते रह गई। आखिरकार दो घंटे चले अभियान में डॉल्फिन को लखनऊ से आई टीम सदस्यों ने जाल डालकर किसी तरह पकड़ लिया। इसके बाद डॉल्फिन को मैजिक डाला में रखकर लालगंज से कालांकाकर गंगा घाट ले जाया गया। जहां डॉल्फिन को मेडिकल परीक्षण के बाद उसको सकुशल गंगा नदी में छोड़ दिया गया। गंगा के जल में डॉल्फिन ऐसे कूदी की जैसे उसको असली ठिकाना मिल गया हो। नहर किनारे रविवार को भी लोगों की भीड़ जुटी रही।

टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. शैलेंद्र सिंह के बताया की डॉल्फिन लगभग आठ फीट की मादा है। मछली को गंगा नदी में रेस्क्यू के जरिये सकुशल पहुंचाने पर अफसरों ने राहत की सांस ली। बता दें कि लालगंज इलाके की सगरा रजबहा में 15 किलोमीटर की रेंज में विशालकाय डॉल्फिन कौतूहल बनी थी। हजारों की भीड़ डॉल्फिन के साथ सेल्फी लेते व वीडियो बनाते दिखी। वन क्षेत्राधिकारी शिव प्रसाद मिश्रा ने बताया कि दो दिन पहले नहर में डॉल्फिन मिली थी। जिसको रेस्क्यू टीम ने पकड़ते हुए सकुशल गंगा नदी ले जाकर छोड़ दिया गया है। मेडिकल जांच में डॉल्फिन पूरी तरह से स्वस्थ पाई गई है।

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Team from Lucknow rescues dolphin fish, caught in net after two hours, released in Ganga
डॉल्फिन को वाहन में लादकर गंगा में छोड़ने के लिए ले जाते लोग। - फोटो : अमर उजाला।

खास प्रबंध कर 40 किमी दूर ले जाई गई डॉल्फिन

डॉल्फिन को रेस्क्यू करने आई लखनऊ की टीम ने 40 किलोमीटर दूर कालाकांकर तक गंगा नदी में पहुंचाने के लिए खास इंतजाम किए थे। उसको पकड़ने के बाद स्ट्रेचर नुमा एक फोम के थैले में रखा गया। जिसमें पहले से पानी भरा था। उस थैले में डॉल्फिन को रखकर एक भीगे कंबल से ढंका गया। जिस वाहन से डॉल्फिन को ले जाया गया, उस पर 500 लीटर पानी भरा टैंक रखा गया था। जिससे पूरे रास्ते डॉल्फिन पर टीम के सदस्य पानी डाल रहे थे। डॉल्फिन को पानी की कमी न होने पाए, इसका भी खास प्रबंध किया गया था।

रातभर निगरानी में करते रहे पुलिसकर्मी व वन गार्ड

रेस्क्यू टीम के इंतजार में नहर में जिस जगह 2 किलोमीटर के दायरे में जाल डालकर डॉल्फिन को रोका गया था। वहां निगरानी के लिए रात भर पुलिस की एक टीम के साथ ही वन विभाग के 12 से अधिक गार्ड लगाए गए थे। अफसरों ने सख्त निर्देश दिए थे कि डॉल्फिन राष्ट्रीय जलीय जीव है, इसलिए वहां दूर-दूर तक कोई फटकने न पाए। डॉल्फिन को किसी प्रकार से नुकसान न पहुंचे, इसके लिए पुलिस के साथ वन विभाग के कर्मचारियों को निगरानी के लिए लगाया गया था। कड़ाके की ठंड में पूरी रात निगरानी करने वाली टीम भी दौड़ती भागती रही।

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