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प्रतापगढ़ में भी हो सकता है कानपुर जैसा हादसा
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:42 PM IST
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रेल हादसों से प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन के अधिकारी और कर्मचारी सबक नहीं ले रहे हैं। उनकी लापरवाही कभी भी यात्रियों की जान पर भारी पड़ सकती है। रेलवे स्टेशन और यार्ड में पटरियों को सुरक्षित रखने वाले नटबोल्ट, पिनडाल्फ क्लिप, पैड गायब हैं। जगह-जगह स्लीपर टूटे हैं। डायमंड क्रासिंगों के अधिकांश पेच ढीले हैं। पटरियां जगह-जगह चटकी हुई हैं। इसके बावजूद अफसरोें की नींद नहीं टूट रही हैं। ऐसे यहां भी कानपुर जैसा हादसा हो सकता है।
कानपुर के निकट इंदौर-पटना एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह पटरियों का टूटना बताया जा रहा है। प्रतापगढ़ में भी जर्जर हो चुकी रेल पटरियों पर ट्रेनों को बिना हिचक दौड़ाया जा रहा है। रेलवे लाइन जवाब दे चुकी है। जर्जर हो चुकी पटरियाें से कभी हादसा हो सकता है। पटरियों को आपस में जोड़ने में सेतु का काम कर रहे नटबोल्ट, पिनडाल्फ क्लिप तक गायब हैं।
जीआरपी के सामने और सुर्खी साइडिंग की डायमंड क्रासिंगों पर खतरा मंडरा रहा है। यहां पर अक्सर प्वाइंट फंस जाता है जिससे ट्रेन हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। स्लीपर टूटकर बिखर चुके हैं। इनको बदलने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। प्वाइंट को लाठी और रॉड से ठोक पीटकर ठीक किया जा रहा है।
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प्रतापगढ़ के तीनों प्लेटफार्म पर रेलवे पटरियां जगह-जगह चटकी हुई हैं। उनके जोड़ तक खुले हुए हैं। लोको के सामने, टीसी आफिस के सामने की पटरियों को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अफसरों की ट्राली इन्हीं पटरियों से गुजरती है, लेकिन उनको यह सब दिखाई नहीं दे रहा है। कई जगह नट-बोल्ट और पिनडाल्फ क्लिप गायब है।
प्लेटफार्म बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही टंग लाइनों की हालत बद से बदतर है। उनकी टंग जगह-जगह से टूट गई है। जिससे सिग्नल के समय अक्सर दोनों पटरियों के बीच गैप रह जाता है। यह गैप खतरनाक साबित हो सकता है। प्रतापगढ़ में इस साल इंजन के पटरियों से उतरने के जो दो हादसे हुए उसमें इसकी तरह की खामियां उभर कर सामने आई हैं। उसके बाद भी अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सई और छवैया नदी पर बने रेलवे पुल की पटरियों की हालत भी दयनीय है। रात के वक्त अराजकतत्वों की आवाजाही से पुल के आसपास बसे गांव में रहने वालों की नींद हराम हो जाती है। पटरियों की सुरक्षा के कोई भी इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रतापगढ़ में ट्रेनों के संचालन को लेकर हाल ही में लखनऊ से आई अफसरों की टीम कर्मचारियों को सतर्कता का पाठ पढ़ाया। मगर उसको लेकर कोई भी सतर्क नहीं दिख रहा है।
सेक्शन के सभी पीडब्ल्यूआई और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश है कि वे अपने क्षेत्र के रेलवे ट्रैक, स्लीपर दुरुस्त रखें। अगर कहीं भी शिकायत मिली तो संबंधित पीडब्ल्यूआई के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अर्जुन सिंह, एडीईएन, प्रतापगढ़।
कानपुर के निकट इंदौर-पटना एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह पटरियों का टूटना बताया जा रहा है। प्रतापगढ़ में भी जर्जर हो चुकी रेल पटरियों पर ट्रेनों को बिना हिचक दौड़ाया जा रहा है। रेलवे लाइन जवाब दे चुकी है। जर्जर हो चुकी पटरियाें से कभी हादसा हो सकता है। पटरियों को आपस में जोड़ने में सेतु का काम कर रहे नटबोल्ट, पिनडाल्फ क्लिप तक गायब हैं।
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जीआरपी के सामने और सुर्खी साइडिंग की डायमंड क्रासिंगों पर खतरा मंडरा रहा है। यहां पर अक्सर प्वाइंट फंस जाता है जिससे ट्रेन हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। स्लीपर टूटकर बिखर चुके हैं। इनको बदलने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। प्वाइंट को लाठी और रॉड से ठोक पीटकर ठीक किया जा रहा है।
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प्रतापगढ़ के तीनों प्लेटफार्म पर रेलवे पटरियां जगह-जगह चटकी हुई हैं। उनके जोड़ तक खुले हुए हैं। लोको के सामने, टीसी आफिस के सामने की पटरियों को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अफसरों की ट्राली इन्हीं पटरियों से गुजरती है, लेकिन उनको यह सब दिखाई नहीं दे रहा है। कई जगह नट-बोल्ट और पिनडाल्फ क्लिप गायब है।
प्लेटफार्म बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही टंग लाइनों की हालत बद से बदतर है। उनकी टंग जगह-जगह से टूट गई है। जिससे सिग्नल के समय अक्सर दोनों पटरियों के बीच गैप रह जाता है। यह गैप खतरनाक साबित हो सकता है। प्रतापगढ़ में इस साल इंजन के पटरियों से उतरने के जो दो हादसे हुए उसमें इसकी तरह की खामियां उभर कर सामने आई हैं। उसके बाद भी अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सई और छवैया नदी पर बने रेलवे पुल की पटरियों की हालत भी दयनीय है। रात के वक्त अराजकतत्वों की आवाजाही से पुल के आसपास बसे गांव में रहने वालों की नींद हराम हो जाती है। पटरियों की सुरक्षा के कोई भी इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रतापगढ़ में ट्रेनों के संचालन को लेकर हाल ही में लखनऊ से आई अफसरों की टीम कर्मचारियों को सतर्कता का पाठ पढ़ाया। मगर उसको लेकर कोई भी सतर्क नहीं दिख रहा है।
सेक्शन के सभी पीडब्ल्यूआई और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश है कि वे अपने क्षेत्र के रेलवे ट्रैक, स्लीपर दुरुस्त रखें। अगर कहीं भी शिकायत मिली तो संबंधित पीडब्ल्यूआई के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अर्जुन सिंह, एडीईएन, प्रतापगढ़।