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सूरत-ए-हाल: अध्यापक चार, बच्चे एक भी नहीं
Thu, 14 Mar 2019 11:54 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 14 Mar 2019 11:54 PM IST
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अध्यापक चार, बच्चे एक भी नहीं
- फोटो : प्रतापगढ़
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क्षेत्र में एक प्राइमरी स्कूल ऐसा भी है, जहां चार अध्यापकों की तैनाती हुई है, मगर बच्चे एक भी स्कूल नहीं आते हैं। हेडमास्टर घूम-घूमकर नेतागीरी करते हैं, तो अध्यापिकाएं कभी-कभार स्कूल आकर हाजिरी लगाकर चली जाती हैं। हालांकि स्कूल के रजिस्टर में 28 बच्चों का नाम अंकित हैं। उनके लिए एमडीएम के तहत आने वाली कनवर्जन कॉस्ट और राशन को हजम किया जा रहा है।
लक्ष्मणपुर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल कुटिलिया मिश्रान में जगत नारायण माली प्रधानाध्यापक, कुसुम देवी के अलावा अनीता मिश्रा और सीता देवी शिक्षामित्र के रुप में तैनात हैं। शिक्षकों की लापरवाही का आलम यह है कि स्कूल में एक भी बच्चा पढ़ने नहीं आता है, मगर रजिस्टर में 28 बच्चों का नाम अंकित है। स्कूल में बच्चे नहीं होने से शिक्षकों के आने और जाने का कोई समय नहीं होता है।
हेडमास्टर कभी-कभी स्कूल आते हैं, तो सहायक अध्यापिका रजिस्टर घर मंगाकर दस्तखत बनाती हैं। गुरुवार को अमर उजाला की टीम स्कूल पहुंची तो दोनों शिक्षामित्र मौजूद मिली। आश्चर्य की बात तो यह है कि 30 मार्च को शैक्षिक सत्र का समापन हो रहा है और अध्यापक पूरे सत्र कागज पर फर्जी रिपोर्ट भेजते रहे।
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ड्रेस, जूता, मोजा के साथ ही एमडीएम के तहत आने वाली कनवर्जन कॉस्ट और राशन को डकारा जा रहा है। जिले के अफसरों को फुर्सत ही नहीं है, कि वह कोई पहल करें। हेडमास्टर जगत नारायण माली ने बताया कि स्कूल के बच्चों को आसपास के निजी स्कूल वाले गुमराह करके अपने यहां पढ़ा रहे हैं, इसीलिए स्कूल नहीं आते हैं।
11 महीने में स्कूल नहीं पहुंचे बीईओ
शिक्षासत्र के 11 माह बीत चुके हैं, मगर खंड शिक्षा अधिकारी गौतम प्रसाद को स्कूल देखने का मौका नहीं
मिला। अगर बीईओ ने स्कूल का निरीक्षण किया होता, तो इसके स्कूल की हकीकत पहले ही सामने आ जाती।
अध्यापकों के खेल में प्रधान भी शामिल
स्कूल बंद होने में गांव के प्रधान के मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। दरअसल, एमडीएम प्रधान और हेडमास्टर मिलकर चलाते हैं। स्कूल में बच्चे नहीं होने के बावजूद 28 बच्चों के लिए राशन और कनवर्जन कॉस्ट लिया जा रहा है। प्रधान का यह दावा है कि बच्चों को प्रतिदिन पका-पकाया भोजन परोसा जा रहा है। ज
बकि हेडमास्टर ने स्वीकार किया कि स्कूल में बच्चे नहीं आ रहे हैं।
स्कूल में एक भी बच्चे नहीं हैं। यह बेहद गंभीर बात है, इस बात की जानकारी मुझे नहीं थी, बीईओ से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तलब कर कार्रवाई की जाएगी। अशोक कुमार सिंह, बीएसए।
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लक्ष्मणपुर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल कुटिलिया मिश्रान में जगत नारायण माली प्रधानाध्यापक, कुसुम देवी के अलावा अनीता मिश्रा और सीता देवी शिक्षामित्र के रुप में तैनात हैं। शिक्षकों की लापरवाही का आलम यह है कि स्कूल में एक भी बच्चा पढ़ने नहीं आता है, मगर रजिस्टर में 28 बच्चों का नाम अंकित है। स्कूल में बच्चे नहीं होने से शिक्षकों के आने और जाने का कोई समय नहीं होता है।
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हेडमास्टर कभी-कभी स्कूल आते हैं, तो सहायक अध्यापिका रजिस्टर घर मंगाकर दस्तखत बनाती हैं। गुरुवार को अमर उजाला की टीम स्कूल पहुंची तो दोनों शिक्षामित्र मौजूद मिली। आश्चर्य की बात तो यह है कि 30 मार्च को शैक्षिक सत्र का समापन हो रहा है और अध्यापक पूरे सत्र कागज पर फर्जी रिपोर्ट भेजते रहे।
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ड्रेस, जूता, मोजा के साथ ही एमडीएम के तहत आने वाली कनवर्जन कॉस्ट और राशन को डकारा जा रहा है। जिले के अफसरों को फुर्सत ही नहीं है, कि वह कोई पहल करें। हेडमास्टर जगत नारायण माली ने बताया कि स्कूल के बच्चों को आसपास के निजी स्कूल वाले गुमराह करके अपने यहां पढ़ा रहे हैं, इसीलिए स्कूल नहीं आते हैं।
11 महीने में स्कूल नहीं पहुंचे बीईओ
शिक्षासत्र के 11 माह बीत चुके हैं, मगर खंड शिक्षा अधिकारी गौतम प्रसाद को स्कूल देखने का मौका नहीं
मिला। अगर बीईओ ने स्कूल का निरीक्षण किया होता, तो इसके स्कूल की हकीकत पहले ही सामने आ जाती।
अध्यापकों के खेल में प्रधान भी शामिल
स्कूल बंद होने में गांव के प्रधान के मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। दरअसल, एमडीएम प्रधान और हेडमास्टर मिलकर चलाते हैं। स्कूल में बच्चे नहीं होने के बावजूद 28 बच्चों के लिए राशन और कनवर्जन कॉस्ट लिया जा रहा है। प्रधान का यह दावा है कि बच्चों को प्रतिदिन पका-पकाया भोजन परोसा जा रहा है। ज
बकि हेडमास्टर ने स्वीकार किया कि स्कूल में बच्चे नहीं आ रहे हैं।
स्कूल में एक भी बच्चे नहीं हैं। यह बेहद गंभीर बात है, इस बात की जानकारी मुझे नहीं थी, बीईओ से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तलब कर कार्रवाई की जाएगी। अशोक कुमार सिंह, बीएसए।