Pratapgarh : पत्थर दिल बाप...थप्पड़ जड़े, जमीन पर पटक-पटककर की थी बेटे हत्या, पत्नी को फंसाने की थी योजना
तीस नवंबर की रात जिस बच्चे की हत्या की गई थी, उसका बाप ही कातिल निकला। एक बाग में ले जाकर पहले उसे थप्पड़ जड़े, फिर पैर पकड़ कर जमीन पर पटक-पटककर मार डाला। इतना हीं, चेहरे पर कई बार जूतों से मारा।
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तीस नवंबर की रात जिस बच्चे की हत्या की गई थी, उसका बाप ही कातिल निकला। एक बाग में ले जाकर पहले उसे थप्पड़ जड़े, फिर पैर पकड़ कर जमीन पर पटक-पटककर मार डाला। इतना हीं, चेहरे पर कई बार जूतों से मारा। यह सब उसने पत्नी के प्रेमी को फंसाने के लिए किया। शनिवार को आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी शैलेंद्र लाल के मुताबिक, बेटे की हत्या करने वाले चौबेपुर निवासी बाबूलाल ने बताया कि 11 साल पहले उसकी शादी पूनम वर्मा से हुई थी। शादी के बाद सब कुछ ठीक था। इधर कुछ वर्षों से गांव के ही कुछ लोगों से पत्नी की नजदीकी बढ़ गई थी। इसे लेकर अक्सर झगड़ा होता था। कुछ दिन से वह एक लड़के से बात करती थी, जो उसे बर्दाश्त नहीं था। कई बार समझाया पर मानी नहीं। 24 नवंबर को झगड़ा हुआ तो बच्चों को छोड़कर मायके चली गई।
वह पत्नी को छोड़ना नहीं चाहता था। इसलिए प्रेमी को फंसाने के लिए साजिश रची। 30 नवंबर को पड़ोसी के घर शादी समारोह में बेटे आर्यन (9) और अंश (7) को साथ ले गया। डीजे के शोर के बीच अंश को बहाने से मुर्दाही बाग की ओर ले गया, जहां उसकी हत्या कर सरसों के खेत में सरपत के झुरमुट के बीच फेंक दिया था। फिर वह बरात में चला गया और अफवाह फैलाई की उसका बेटा गायब हो गया है।
पुलिस को सूचना दी गई लेकिन खोजबीन में बेटा मिला नहीं। अगले दिन सुबह उसका शव मिला। लोग उसे अस्पताल लेकर गए, जहां मृत घोषित कर दिया गया। अंतू पुलिस व स्पेशल टीम प्रभारी अर्जुन सिंह ने शुक्रवार की रात उसे चौबेपुर के करीब पकड़ लिया। उसके पास से खून से सनी शर्ट, जूता बरामद हुआ। न्यायालय में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
बार-बार बयान बदलने पर हुआ शक
बच्चे की हत्या के बाद पुलिस ने पिता और उसके दादा को थाने बुलाया था। पूछताछ में बाबूलाल बार-बार बयान बदल रहा था। इससे उस पर शक हुआ। पूछताछ में पत्नी ने दूसरे से प्रेम प्रसंग की बात स्वीकार करते हुए पति पर ही हत्या का आरोप लगाया था। अंतिम संस्कार के बाद बाबूलाल घर से भागा तो शक गहरा गया। पूनम का कहना है कि अब वह उसके साथ नहीं रहेगी।
बड़े बेटे से मिलने आया तो धरा गया
एक दिसंबर की रात घर से भागा बाबूलाल पहले सुल्तानपुर पहुंचा। वहां से लखनऊ गया और दो दिन तक मजदूरी की। बड़े बेटे की याद सताई तो वह ट्रेन पकड़ कर घर के लिए निकला। पुलिस के डर से पहले वह प्रयागराज में उतरा फिर प्रतापगढ़ पहुंचा। बेटे से मिलने के बाद चंडीगढ़ भागने की तैयारी में था।