Pratapgarh : हिरासत में मौत मामले में एसटीएफ के इंस्पेक्टर को किया गया निलंबित, नामजद मुकदमा दर्ज
अजय सिंह की पत्नी की मांग विवेचना के दौरान एसटीएफ निरीक्षक राघवेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल नीरज पांडेय, राजीव, कांस्टेबल अमित त्रिपाठी, अमर श्रीवास्तव, पुष्प कुमार समेत चालक कृष्णदेव शुक्ला और कुमदेश का नाम मंगलवार को केस में जोड़ दिया गया। उधर, एसटीएफ हिरासत में हुई मौत होने पर निरीक्षक राघवेंद्र सिंह पर निलंबन की गाज गिरी है। एसटीएफ के वरष्ठि पुलिस अधीक्षक ने प्रथम दृष्टया राघवेंद्र सिंह को दोषी मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सांगीपुर थाना क्षेत्र के लखहरा गांव निवासी अजय कुमार सिंह लखनऊ के गोमती नगर थाने का एनडीपीएस एक्ट का वांछित था। रविवार की शाम तीन बजे लखनऊ एसटीएफ के निरीक्षक राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में आई टीम ने आरोपी को उसके घर से हिरासत में लिया। कुछ देर बाद ही अजय की एसटीएफ की हिरासत में मौत हो गई। एनडीपीएस के वांछित अजय मौत के मामले में बेटी जानवी सिंह ने अज्ञात के खिलाफ सोमवार को हत्या का केस दर्ज कराया था।
पत्नी की मांग विवेचना के दौरान एसटीएफ निरीक्षक राघवेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल नीरज पांडेय, राजीव, कांस्टेबल अमित त्रिपाठी, अमर श्रीवास्तव, पुष्प कुमार समेत चालक कृष्णदेव शुक्ला और कुमदेश का नाम मंगलवार को केस में जोड़ दिया गया। उधर, एसटीएफ हिरासत में हुई मौत होने पर निरीक्षक राघवेंद्र सिंह पर निलंबन की गाज गिरी है। एसटीएफ के वरष्ठि पुलिस अधीक्षक ने प्रथम दृष्टया राघवेंद्र सिंह को दोषी मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
मांगों को लेकर 16 घंटे घर के सामने रखा शव, डीएम व एसपी के आश्वासन पर माने
एसटीएफ की हिरासत में एनडीपीएस के आरोपी की मौत से नाराज परिजनों ने मांगों को लेकर शव को अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। तहसील के अफसरों ने मान मनौवल किया, लेकिन बात नहीं बनी। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से मोबाइल पर वार्ता में मिले आश्वासन के बाद परिजन 16 घंटे बाद अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। परिवार के लोग शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए रवाना हुए, तो तीन दिन से परेशान पुलिस, प्रशासन ने राहत की सांस ली। करणी सेना ने पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग उठाई।
लखनऊ के गोमतीनगर थाने का वांछित था अजय
सांगीपुर थाना क्षेत्र के लखहरा गांव निवासी अजय कुमार सिंह लखनऊ के गोमती नगर थाने का एनडीपीएस एक्ट का वांछित था। रविवार की शाम तीन बजे लखनऊ एसटीएफ के निरीक्षक राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में आई टीम ने आरोपी को उसके घर से हिरासत में लिया। आरोप है कि बाद में एसटीएफ की हिरासत में अजय सिंह की मौत हो गई। तीन घंटे बाद परिजनों को मौत की सूचना दी गई तो वह भड़क गए। परिजनों की तहरीर पर एसटीएफ के अज्ञातकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया गया।
दूसरे दिन सोमवार को देर शाम अजय का शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा। परिजनों ने एसटीएफ के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग पूरी होने तक अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। परिवार के लोग घर के सामने शव रखकर विरोध जताने लगे। रात में लालगंज कोतवाल और सांगीपुर एसओ ने परिजनों को समझाया लेकिन वह नहीं माने। मंगलवार की सुबह लालगंज एसडीएम प्रवीण द्विवेदी व सीओ रामसूरत सोनकर भी परिजनों को समझाने पहुंचे, लेकिन परिजनों ने मांगों को लेकर अड़े रहे।
परिवार के लोगों की नाराजगी को देखते हुए पुलिस व पीएसी की तैनाती कर दी गई। हालांकि बाद में पीड़ित परिवार की जिलाधिकारी संजीव रंजन व पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल से वार्ता कराई गई। दोनों अफसरों की ओर से मांगों पर उचित आश्वासन मिलने पर परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। आश्वासन पर 16 घंटे बाद परिवार के लोग अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर मानिकपुर गंगा घाट रवाना हुए। सीओ रामसूरत सोनकर ने बताया के आश्वासन पर परिजनों ने शव को अंतिम संस्कार कर दिया।
अजय के सिर पर मिले हल्की चोट के निशान
अजय की मौत के बाद शव का पैनल ने पोस्टमार्टम हुआ। इसमें जिलाधिकारी ने परिवार के एक सदस्य को भी शामिल होने की अनुमति दी थी। पीएम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट नहीं होने पर हृदय के साथ ही विसरा प्रिजर्व किया गया। पीएम के दौरान मृतक के सिर पर पीछे की ओर हल्की चोट का निशान भी मिला है, लेकिन चिकित्सकों के अनुसार यह चोट मौत की वजह नहीं हो सकती। परिवार वालों ने प्रताड़ित कर हत्या करने का एसटीएफ पर आरोप लगाया है।
बवाल की आशंका पर रूट किया डायवर्ट
एनडीपीएस के आरोपी की हिरासत में मौत के मामले में जब परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार किया तो पुलिस प्रशासन सकते में आ गया। अजय के गांव लखहरा में लोगों का जमावड़ा न लगने पाए, इसके लिए पुलिस ने सांगीपुर-अठेहा मार्ग से वाहनों को डायवर्ट कर दिया। रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसी निजी वाहन को लखहरा के रास्ते होकर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। चार थानों की फोर्स के साथ ही पीएसी की तैनाती की गई थी।...........