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मदरसों में बच्चे नहीं मिले तो खत्म होगी मान्यता
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 16 Sep 2017 11:28 PM IST
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जिले में कागज पर चलने वाले मदरसों पर जल्द ही गाज गिरने वाली है। योगी सरकार ने फर्जीवाड़ा करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द करने को कहा है। शासन के फरमान पर जिले के मदरसों की जांच करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन करके भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मदरसों में पढ़ाई-लिखाई और परीक्षा प्रणाली सुधार के लिए सूबे की योगी सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए फैसला किया है कि जिस मदरसें में बच्चे पढ़ते हुए नहीं मिलेंगे, उस मदरसे की मान्यता समाप्त करते हुए ग्रांट पर रोक लगा दी जाएगी। जिले की 17 ग्राम पंचायतों में 142 मदरसे हैं। इनमें से सात मदरसे सहायता प्राप्त हैं। जिले के अधिकांश मदरसों का आलम यह है कि वहां न तो बच्चे पढ़ने जाते हैं, और न ही कोई शिक्षक पढ़ाने वाला होता है। मगर परीक्षा देने के लिए विदेशों में रहने वाले परीक्षार्थी मदरसों में पहुंच जाते हैं। अधिकांश मदरसों में एक ही परिवार के सदस्यों को प्रबंध कमेटी में रखा गया है, जहां न तो चुनाव होता है और न ही किसी व्यक्ति को मदरसे की गतिविधि की जानकारी हो पाती है। ऐसे मदरसों को चिह्नित करने के लिए योगी सरकार ने जिले में जांच अभियान चलाने को कहा है। तीन सदस्यीय अधिकारियों की जांच में अगर मौके पर मदरसा चलता हुआ नहीं पाया जाता है, या बच्चे और शिक्षक नहीं मिलते हैं, तो ऐसे मदरसों की मान्यता समाप्त करके ताला लगा दिया जाएगा।
मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आधार से जोड़ने के लिए शासन पहले ही पहल कर चुका है। विभाग की वेबसाइट पर मदरसों का डाटा अपलोड करने के साथ ही शिक्षकों का भी विवरण अपलोड करने को कहा गया है। अधिकांश मदरसों में यह कार्य लगभग पूरा भी हो चुका है।
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मदरसा संचालन के लिए गठित प्रबंध समितियों का विवरण ऑनलाइन होगा। समिति के सभी सदस्यों का नाम, जन्मतिथि, शैक्षिक विवरण के साथ ही मोबाइल भी फीड करना होगा। जो मदरसे फीडिंग नहीं कराएंगे, उनकी मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।मदरसा बोर्ड से होने वाली मुंशी, मौलवी, आलिम, कालिम, फाजिल की परीक्षा में अब नकल नहीं होगी। यूपी बोर्ड की तरह मदरसा बोर्ड को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र लेने के लिए अब मदरसों का चक्कर नहीं लगाना होगा, बल्कि वह ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।
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मदरसों में पढ़ाई-लिखाई और परीक्षा प्रणाली सुधार के लिए सूबे की योगी सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए फैसला किया है कि जिस मदरसें में बच्चे पढ़ते हुए नहीं मिलेंगे, उस मदरसे की मान्यता समाप्त करते हुए ग्रांट पर रोक लगा दी जाएगी। जिले की 17 ग्राम पंचायतों में 142 मदरसे हैं। इनमें से सात मदरसे सहायता प्राप्त हैं। जिले के अधिकांश मदरसों का आलम यह है कि वहां न तो बच्चे पढ़ने जाते हैं, और न ही कोई शिक्षक पढ़ाने वाला होता है। मगर परीक्षा देने के लिए विदेशों में रहने वाले परीक्षार्थी मदरसों में पहुंच जाते हैं। अधिकांश मदरसों में एक ही परिवार के सदस्यों को प्रबंध कमेटी में रखा गया है, जहां न तो चुनाव होता है और न ही किसी व्यक्ति को मदरसे की गतिविधि की जानकारी हो पाती है। ऐसे मदरसों को चिह्नित करने के लिए योगी सरकार ने जिले में जांच अभियान चलाने को कहा है। तीन सदस्यीय अधिकारियों की जांच में अगर मौके पर मदरसा चलता हुआ नहीं पाया जाता है, या बच्चे और शिक्षक नहीं मिलते हैं, तो ऐसे मदरसों की मान्यता समाप्त करके ताला लगा दिया जाएगा।
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मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आधार से जोड़ने के लिए शासन पहले ही पहल कर चुका है। विभाग की वेबसाइट पर मदरसों का डाटा अपलोड करने के साथ ही शिक्षकों का भी विवरण अपलोड करने को कहा गया है। अधिकांश मदरसों में यह कार्य लगभग पूरा भी हो चुका है।
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मदरसा संचालन के लिए गठित प्रबंध समितियों का विवरण ऑनलाइन होगा। समिति के सभी सदस्यों का नाम, जन्मतिथि, शैक्षिक विवरण के साथ ही मोबाइल भी फीड करना होगा। जो मदरसे फीडिंग नहीं कराएंगे, उनकी मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।मदरसा बोर्ड से होने वाली मुंशी, मौलवी, आलिम, कालिम, फाजिल की परीक्षा में अब नकल नहीं होगी। यूपी बोर्ड की तरह मदरसा बोर्ड को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र लेने के लिए अब मदरसों का चक्कर नहीं लगाना होगा, बल्कि वह ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।