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मेडिकल कॉलेज के एसआर और जेआर कागज पर कर रहे मरीजों का इलाज ़

Mon, 21 Feb 2022 01:50 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 21 Feb 2022 01:50 AM IST
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SR and JR of Medical College are treating patients on paper
डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों का इलाज जूनियर और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर कागजों पर ही कर रहे हैं। वे वार्ड में भी जाना उचित नहीं समझ रहे हैं। अस्पताल में पहले से तैनात जिला अस्पताल के डॉक्टरों के भरोसे ही ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज हो रहा है। वार्ड में तो स्टाफ नर्स और वार्डब्वॉय मरीजों का इलाज करते हैं। इससे मरीज परेशान होते हैं।
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मेडिकल कॉलेज में करीब सत्तर जूनियर और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर तैनात हैं। इनमें से महज सात चिकित्सक ही ड्यूटी कर रहे हैं। इनमें कुछ प्रताप बहादुर चिकित्सालय की महिला विंग तो कुछ पुरुष विंग की इमरजेंसी में बैठते हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का इलाज करते हैं। ओपीडी का हाल देखा जाए तो जिला अस्पताल में तैनात रहे चिकित्सक ही मरीजों की जांच और इलाज कर रहे हैं।
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राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के पुरुष विंग में तैनात सर्जन डॉक्टर उमराव सिंह और डॉक्टर एसी त्रिपाठी की जहां सेवा समाप्त कर दी गई है वहीं, फिजिशियन रहे डॉक्टर आरपी चौबे रिटायर हो गए। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एमपी शर्मा का किसी दूसरे मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर चयन हो गया। ऐसे में मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
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ओपीडी से लेकर वार्ड में दूरदराज तक जेआर और एसआर नहीं दिखते हैं। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों की जांच और इलाज स्टाफ नर्स य फिर वार्डब्वॉय करते हैं। इस ओर सीएमएस और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का ध्यान नहीं पड़ रहा है। इससे मेडिकल कॉलेज के संचालन होने के बावजूद मरीजों को किसी प्रकार की सहूलियत नहीं मिल रही है।
रात में ड्यूटी लगवाने के लिए परेेेशान रहते हैं सीनियर रेजीडेंट
ज्यादातर एसआर और जेआर रात में अपनी ड्यूटी लगवाते हैं। रात में सीएमएस और प्राचार्य अपने कमरे से बाहर नहीं निकलते हैं। इसका फायदा जूनियर और सीनियर रेजीडेंट उठाते हैं। विभाग के सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल में ड्यूटी करने के बहाने वे समय से कॉलेज में बने हॉस्टल से निकल पड़ते हैं, मगर अस्पताल आने के बजाय अपने घर चले जाते हैं। इसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ता है।

मेडिकल कॉलेज में कक्षाएं शुरू हो गई हैं। ऐसे में सीनियर रेजीडेंट को कॉलेज में रोक लिया जाता है। जूनियर चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। मैं जब भी अस्पताल जाता हूं, डॉक्टर मौजूद मिलते हैं। रात में यदि डॉक्टर वार्ड से गायब हो जा रहे हैं तो गोपनीय तरीके से जांच करवाकर इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डॉ. आर्य देशदीपक, प्राचार्य
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