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कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच एसएनसीयू फुल, प्रयागराज रेफर किए जा रहे बच्चे
Sun, 18 Jul 2021 12:10 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jul 2021 12:10 AM IST
सार
कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच मेडिकल कॉलेज में स्थित एसएनसीयू वार्ड फुल हो गया है। सिर्फ 17 बेड होने के कारण मरीजों को भर्ती करने के लिए मारामारी हो रही है।
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विस्तार
कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच मेडिकल कॉलेज में स्थित एसएनसीयू वार्ड फुल हो गया है। सिर्फ 17 बेड होने के कारण मरीजों को भर्ती करने के लिए मारामारी हो रही है। जगह न होने की वजह से चिकित्सक बच्चों को प्रयागराज रेफर कर रहे हैं। उधर, कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए शासन ने जिले के सभी अस्पतालों में दो-दो बेड के एसएनसीयू वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी कुछ नहीं कर सका है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर आने पर भारी मुसीबत खड़ी हो सकती है।
कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए शासन ने पहले से ही स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है। रेफरल सेंटरों के साथ ही जिन अस्पतालों में प्रसव की सुविधा है, वहां दो-दो बेड के एसएनसीयू वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। निजी अस्पतालों में भी एसएनसीयू वार्ड बनाने के लिए कहा है। इसके बाद भी जिले में सिर्फ मेडिकल कॉलेज की महिला विंग में 17 बेड का एसएनसीयू वार्ड तैयार किया गया है।
वहीं, रेफरल सेंटर पट्टी, लालगंज और कुंडा में व्यवस्था के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई है। यहां बच्चों को भर्ती कर इलाज नहीं किया जाता है। चिकित्सक तत्काल बच्चों को मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर देते हैं। यहां बेड का अभाव है। ऐसे में चिकित्सक भर्ती करने से हाथ खड़े कर दे रहे हैं। लोग दबाव डालते हैं तो चिकित्सक तत्काल रेफर कागज थमा देते हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी सिर्फ दो में ही एसएनसीयू की व्यवस्था है। ऐसे में लोग बच्चों को लेकर प्रयागराज के चक्कर काट रहे हैं।
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भारी पड़ सकती है स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
यदि स्वास्थ्य विभाग ऐसे ही लापरवाही बरतता रहा तो कोरोना की तीसरी लहर आने पर बच्चों की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के अफसर हर काम कागज पर ही पूरा कर रहे हैं। शासन ने आदेश दिया है कि जिन निजी और सरकारी अस्पतालों में प्रसव की सुविधा है, वहां बच्चों के प्राथमिक उपचार की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए। मगर हकीकत यह है कि सीएमओ लाइसेंस तो बांटते जा रहे हैं, मगर प्रसव की सुविधा अधिकतर अस्पतालों में नहीं दिखाई जा रही है। सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है।
कुंडा, लालगंज और पट्टी में दो-दो बेड के एसएनसीयू वार्ड की व्यवस्था की गई है। अन्य सेंटरों पर जल्द कर ली जाएगी। निजी अस्पताल संचालकों को भी आदेश दिया गया है कि यदि उनके यहां प्रसव की सुविधा है तो तत्काल एसएनसीयू वार्ड तैयार कर लें। डॉक्टर सीपी शर्मा, एसीएमओ
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कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए शासन ने पहले से ही स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है। रेफरल सेंटरों के साथ ही जिन अस्पतालों में प्रसव की सुविधा है, वहां दो-दो बेड के एसएनसीयू वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। निजी अस्पतालों में भी एसएनसीयू वार्ड बनाने के लिए कहा है। इसके बाद भी जिले में सिर्फ मेडिकल कॉलेज की महिला विंग में 17 बेड का एसएनसीयू वार्ड तैयार किया गया है।
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वहीं, रेफरल सेंटर पट्टी, लालगंज और कुंडा में व्यवस्था के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई है। यहां बच्चों को भर्ती कर इलाज नहीं किया जाता है। चिकित्सक तत्काल बच्चों को मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर देते हैं। यहां बेड का अभाव है। ऐसे में चिकित्सक भर्ती करने से हाथ खड़े कर दे रहे हैं। लोग दबाव डालते हैं तो चिकित्सक तत्काल रेफर कागज थमा देते हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी सिर्फ दो में ही एसएनसीयू की व्यवस्था है। ऐसे में लोग बच्चों को लेकर प्रयागराज के चक्कर काट रहे हैं।
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भारी पड़ सकती है स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
यदि स्वास्थ्य विभाग ऐसे ही लापरवाही बरतता रहा तो कोरोना की तीसरी लहर आने पर बच्चों की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के अफसर हर काम कागज पर ही पूरा कर रहे हैं। शासन ने आदेश दिया है कि जिन निजी और सरकारी अस्पतालों में प्रसव की सुविधा है, वहां बच्चों के प्राथमिक उपचार की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए। मगर हकीकत यह है कि सीएमओ लाइसेंस तो बांटते जा रहे हैं, मगर प्रसव की सुविधा अधिकतर अस्पतालों में नहीं दिखाई जा रही है। सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है।
कुंडा, लालगंज और पट्टी में दो-दो बेड के एसएनसीयू वार्ड की व्यवस्था की गई है। अन्य सेंटरों पर जल्द कर ली जाएगी। निजी अस्पताल संचालकों को भी आदेश दिया गया है कि यदि उनके यहां प्रसव की सुविधा है तो तत्काल एसएनसीयू वार्ड तैयार कर लें। डॉक्टर सीपी शर्मा, एसीएमओ