{"_id":"1ba0c915d9a30042c90d0640fd5e1ace","slug":"shriram-tirahe-missing-on-skates-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीराम तिराहे पर गायब हैं पटरियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीराम तिराहे पर गायब हैं पटरियां
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 18 Dec 2014 11:51 PM IST
विज्ञापन
शहर के श्रीराम तिराहे से लेकर स्टेट बैंक तक की पटरियां दिन में गायब हो जाती हैं। सड़क तक दुकानदार फलों का ठेला लगाते हैं। यदि कोई विरोध करता है तो उसके साथ मारपीट करना ऐसे दुकानदारों का शगल बन चुका है। इससे भी जाम के हालात पैदा होते हैं। चौक से लेकर राजापाल चौराहे तक पहुंचने में बाइक से लोगों को सुबह मात्र तीन मिनट का समय लगता है लेकिन दोपहर होते-होते इस सड़क पर लोगों की भीड़ का ऐसा रेला उमड़ता है कि वाहनों की रफ्तार पर अंकुश लग जाता है। दिन में लोगों को दो किमी से भी कम की दूरी तय करने में दस से बीस मिनट का वक्त लग जाता है। श्रीराम तिराहे से लेकर स्टेट बैंक के करीब तक एक पटरियां दिन में गायब हो जाती हैं।
दुकानदारों से बचने वाले स्थान को फल बेचने वाले ठेला लगाकर कब्जा कर लेते हैं। वे अपने ठेले सड़क पर खड़ा कर सामान बेचते हैं लेकिन इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। फल बेचने वालों की हरकतों से अस्पताल से लेकर श्रीराम तिराहे तक हमेशा जाम की समस्या का सामना लोगों को करना पड़ता है। लोगों की मानें तो ठेला लगाकर फल बेचने वाले लोग इस कदर मनबढ़ हैं कि यदि किसी ने टोका तो वे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। इतना ही नहीं फल का सौदा करने वाले लोगों को हरहाल में फल लेने के लिए मजबूर किया जाता है। यदि लोग फल लेने से इनकार कर देते हैं तो उनके साथ गाली गलौच भी करने से दुकानदार बाज नहीं आते। ठेले पर फल बेचने वालों की एकजुटता के चलते कोई मुंह खोलने का साहस नहीं कर पाता।
श्रीराम तिराहे से लेकर स्टेट बैंक के करीब तक पटरियां पर कब्जा करने वाले ठेला वालों से हर कोई त्रस्त है। यदि ग्रामीणों से कोई फल वाला मारपीट करता है और वह पुलिस के पास शिकायत लेकर जाता है तो मौके पर पहुंचने वाली पुलिस कार्रवाई के बजाय समझौता कराने में अधिक रुचि लेने लगती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दुकानदारों से बचने वाले स्थान को फल बेचने वाले ठेला लगाकर कब्जा कर लेते हैं। वे अपने ठेले सड़क पर खड़ा कर सामान बेचते हैं लेकिन इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। फल बेचने वालों की हरकतों से अस्पताल से लेकर श्रीराम तिराहे तक हमेशा जाम की समस्या का सामना लोगों को करना पड़ता है। लोगों की मानें तो ठेला लगाकर फल बेचने वाले लोग इस कदर मनबढ़ हैं कि यदि किसी ने टोका तो वे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। इतना ही नहीं फल का सौदा करने वाले लोगों को हरहाल में फल लेने के लिए मजबूर किया जाता है। यदि लोग फल लेने से इनकार कर देते हैं तो उनके साथ गाली गलौच भी करने से दुकानदार बाज नहीं आते। ठेले पर फल बेचने वालों की एकजुटता के चलते कोई मुंह खोलने का साहस नहीं कर पाता।
विज्ञापन
श्रीराम तिराहे से लेकर स्टेट बैंक के करीब तक पटरियां पर कब्जा करने वाले ठेला वालों से हर कोई त्रस्त है। यदि ग्रामीणों से कोई फल वाला मारपीट करता है और वह पुलिस के पास शिकायत लेकर जाता है तो मौके पर पहुंचने वाली पुलिस कार्रवाई के बजाय समझौता कराने में अधिक रुचि लेने लगती है।
विज्ञापन