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चहुंओर गूंजता रहा आदिशक्ति का जयकारा
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Mar 2018 12:14 AM IST
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नवरात्रि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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वासंतिक नवरात्र के पहले दिन पौराणिक देवीधामों में भक्ति और आस्था का विहंगम नजारा दिखा। मां शैलपुत्री के दर्शन के लिए देवी मंदिरों में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। हाथों में नारियल-चुनरी लेकर भक्त आदिशक्ति के जयकारे लगाते रहे। विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर मन्नत मांगी। सुबह से देर रात तक देवीधामों में मातारानी के जयकारे गूंजते रहे। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने तगड़े इंतजाम किए थे।
सई नदी के तट पर शहर में स्थित मां बेल्हादेवी धाम में भोर में चार बजे से ही दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। पट खुलने से पहले ही लंबी कतारें लग गई थीं। मुख्य द्वार पर भक्तों की भीड़ धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। सुबह करीब पांच बजे श्रृंगार के बाद घंटा-घड़ियाल की गूंज के बीच महाआरती शुरू हुई। पूरा वातावरण भक्ति और आस्था में सराबोर हो उठा। महाआरती के बाद दर्शन-पूजन का दौर शुरू हुआ। भक्तों ने दर्शन-पूजन कर प्रसाद अर्पित किया।
सुबह 10 बजे के बाद ग्रामीण इलाके के श्रद्धालुओं का रेला उमड़ने लगा। दो बजे के बाद पट बंद कर साफ-सफाई का कार्य हुआ। तीन बजे के बाद का श्रृंगार हुआ। इसके बाद देर रात तक दर्शन चलता रहा।
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घरों में दिनभर गूंजते रहे वैदिक मंत्र
वैसे तो प्रात: 6:02 बजे से शाम 6:08 तक प्रतिपदा थी। घटस्थापना के लिए इसे शुभ बताया गया था। सुबह 6:02 मिनट से 8:30 तक विशिष्ट मुहूर्त था। यह घटस्थापना के लिए शुभ था। इसके बाद सुबह 11:40 से दोपहर 12:29 बजे तक अभिजीत मुहूर्त था। ऐसे में तीनों मुहूर्त को ध्यान में रखकर श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार कलश- स्थापना करते रहे। किसी ने अभिजीत तो किसी ने विशिष्ट तो किसी ने प्रतिपदा में कलश स्थापना की। ऐसे में शाम छह बजे तक घट स्थापना को लेकर घरों में वैदिक मंत्र गूंजते रहे।
सदर चौराहे से धाम तक लगा रहा जाम
सुबह 10 बजे के बाद सदर चौराहे से धाम को जोडने वाली कोहरौटी रोड तक भीषण जाम लग गया। जाम में ई-रिक्शा, बाइक, रिक्शा समेत चार पहिया वाहन फंसे रहे। जिससे पैदल निकलना मुश्किल हो रहा था। पुलिस के जवानों ने घंटों मशक्कत कर किसी तरह जमा समाप्त कराया। हालांकि बीच- बीच में रुक-रुककर जाम लगता रहा।
मां चंद्रिकन देवी धाम में बही भक्ति की बयार
नवरात्र के प्रथम दिन पौराणिक देवी धाम में मां चंद्रिकन के दरबार में दर्शन-पूजन को लेकर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। भोर से ही दर्शन-पूजन को लेकर भक्तों की कतार लगी रही। गेंदा, गुलाब व गुड़हल के फूल-मालाओं से भक्तों ने मां का विग्रह कर नारियल, चुनरी, लड्डू चढ़ाकर आशीर्वाद मांगा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्य गेट से परिसर में जगह-जगह पुलिस की तैनाती रही।
कथा श्रवण से दूर भागती हैं कलुषित भावनाएं
क्षेत्र के चंद्रिकन देवीधाम में नवरात्र के प्रथम दिन सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभांरभ हुआ। कथा वाचक उमादत्त दूबे ने पहले दिन कथा का वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य पर प्रक ाश डाला। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से कलुषित भावनाओं का शमन हो जाता है। अत:करण में जीवन के वास्तविक सार का पता चलता है। इससे सन्मार्ग के मार्ग प्रशस्त होते हैं। सभी को कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने भक्ति के मायने भी बतलाए। कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं, आडंबर के निकट नहीं आते। इस मौके पर मेला प्रशासन के राम सिंह रामू, अध्यक्ष हरि मंगल सिंह, संत राम मिश्र, बृजभवन तिवारी, नागेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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सई नदी के तट पर शहर में स्थित मां बेल्हादेवी धाम में भोर में चार बजे से ही दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। पट खुलने से पहले ही लंबी कतारें लग गई थीं। मुख्य द्वार पर भक्तों की भीड़ धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। सुबह करीब पांच बजे श्रृंगार के बाद घंटा-घड़ियाल की गूंज के बीच महाआरती शुरू हुई। पूरा वातावरण भक्ति और आस्था में सराबोर हो उठा। महाआरती के बाद दर्शन-पूजन का दौर शुरू हुआ। भक्तों ने दर्शन-पूजन कर प्रसाद अर्पित किया।
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सुबह 10 बजे के बाद ग्रामीण इलाके के श्रद्धालुओं का रेला उमड़ने लगा। दो बजे के बाद पट बंद कर साफ-सफाई का कार्य हुआ। तीन बजे के बाद का श्रृंगार हुआ। इसके बाद देर रात तक दर्शन चलता रहा।
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घरों में दिनभर गूंजते रहे वैदिक मंत्र
वैसे तो प्रात: 6:02 बजे से शाम 6:08 तक प्रतिपदा थी। घटस्थापना के लिए इसे शुभ बताया गया था। सुबह 6:02 मिनट से 8:30 तक विशिष्ट मुहूर्त था। यह घटस्थापना के लिए शुभ था। इसके बाद सुबह 11:40 से दोपहर 12:29 बजे तक अभिजीत मुहूर्त था। ऐसे में तीनों मुहूर्त को ध्यान में रखकर श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार कलश- स्थापना करते रहे। किसी ने अभिजीत तो किसी ने विशिष्ट तो किसी ने प्रतिपदा में कलश स्थापना की। ऐसे में शाम छह बजे तक घट स्थापना को लेकर घरों में वैदिक मंत्र गूंजते रहे।
सदर चौराहे से धाम तक लगा रहा जाम
सुबह 10 बजे के बाद सदर चौराहे से धाम को जोडने वाली कोहरौटी रोड तक भीषण जाम लग गया। जाम में ई-रिक्शा, बाइक, रिक्शा समेत चार पहिया वाहन फंसे रहे। जिससे पैदल निकलना मुश्किल हो रहा था। पुलिस के जवानों ने घंटों मशक्कत कर किसी तरह जमा समाप्त कराया। हालांकि बीच- बीच में रुक-रुककर जाम लगता रहा।
मां चंद्रिकन देवी धाम में बही भक्ति की बयार
नवरात्र के प्रथम दिन पौराणिक देवी धाम में मां चंद्रिकन के दरबार में दर्शन-पूजन को लेकर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। भोर से ही दर्शन-पूजन को लेकर भक्तों की कतार लगी रही। गेंदा, गुलाब व गुड़हल के फूल-मालाओं से भक्तों ने मां का विग्रह कर नारियल, चुनरी, लड्डू चढ़ाकर आशीर्वाद मांगा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्य गेट से परिसर में जगह-जगह पुलिस की तैनाती रही।
कथा श्रवण से दूर भागती हैं कलुषित भावनाएं
क्षेत्र के चंद्रिकन देवीधाम में नवरात्र के प्रथम दिन सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभांरभ हुआ। कथा वाचक उमादत्त दूबे ने पहले दिन कथा का वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य पर प्रक ाश डाला। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से कलुषित भावनाओं का शमन हो जाता है। अत:करण में जीवन के वास्तविक सार का पता चलता है। इससे सन्मार्ग के मार्ग प्रशस्त होते हैं। सभी को कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने भक्ति के मायने भी बतलाए। कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं, आडंबर के निकट नहीं आते। इस मौके पर मेला प्रशासन के राम सिंह रामू, अध्यक्ष हरि मंगल सिंह, संत राम मिश्र, बृजभवन तिवारी, नागेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।