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शीतला सप्तमी पर उमड़े श्रद्धालु
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:25 PM IST
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शीतला सप्तमी शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने स्नान के साथ गंगा किनारे दह बैठाई। इस दौरान देवी को ठंडक दी गई। यही नहीं श्रद्धालुओं ने स्नान पूजन के बाद मां ज्वाला देवी का दर्शन किया। हालांकि घाट दूर होने के कारण लोगों को परेशानी रही, लेकिन अव्यवस्थाओं में भी पंाच दिवसीय मेले का समापन हो गया। अलग-अलग जगह स्नान होने के कारण घाट पर भीड़ कम समझ में आई, जबकि रोड पर वाहनों की लंबी कतार लगी रही।
शीतला सप्तमी को श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में गंगा स्नान किया। गंगा घाट पर शुरू हुए शीतला सप्तमी का यह चौथा और मुख्य स्नान दिवस था। हालांकि अधिकतर लोगों ने भोर में चार बजे ही स्नान किया और गंगा के किनारे ही कड़ाई चढ़ाकर रोट बनाया और देवी को चढ़ाने के साथ ही गड्ढा खोदकर उन्हें ठंडक पहुंचाई। इसके बाद लोगों ने मेले में खरीदारी की। मानिकपुर के शहाबाद में स्नान घाट न होने के कारण श्रद्धालुओं ने कालाकांकर, गोतनी सहित अन्य घाटों पर स्नान किया। इसके बाद वहां से निकलकर ज्वाला देवी धाम पहुंचे और वहां भी मां ज्वाला देवी का दर्शन किया। गंगा स्नान पर लोगों की भीड़ का आकलन करके मां ज्वालादेवी धाम पर स्वास्थ्य की सुविधा, खोया पाया सहित पानी पिलाने की भी व्यवस्था की गई थी लेकिन भारी संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंच पाए। ज्यादातर लोगों ने रात में ही पहुंचकर भोर में स्नान किया और दिन में होने वाली गर्मी को देखते हुए अपने साधनों से निकल गए। इस बार ज्वालादेवी में मेला कम होने के कारण समापन भी जल्दी ही हो गया।
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शीतला सप्तमी को श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में गंगा स्नान किया। गंगा घाट पर शुरू हुए शीतला सप्तमी का यह चौथा और मुख्य स्नान दिवस था। हालांकि अधिकतर लोगों ने भोर में चार बजे ही स्नान किया और गंगा के किनारे ही कड़ाई चढ़ाकर रोट बनाया और देवी को चढ़ाने के साथ ही गड्ढा खोदकर उन्हें ठंडक पहुंचाई। इसके बाद लोगों ने मेले में खरीदारी की। मानिकपुर के शहाबाद में स्नान घाट न होने के कारण श्रद्धालुओं ने कालाकांकर, गोतनी सहित अन्य घाटों पर स्नान किया। इसके बाद वहां से निकलकर ज्वाला देवी धाम पहुंचे और वहां भी मां ज्वाला देवी का दर्शन किया। गंगा स्नान पर लोगों की भीड़ का आकलन करके मां ज्वालादेवी धाम पर स्वास्थ्य की सुविधा, खोया पाया सहित पानी पिलाने की भी व्यवस्था की गई थी लेकिन भारी संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंच पाए। ज्यादातर लोगों ने रात में ही पहुंचकर भोर में स्नान किया और दिन में होने वाली गर्मी को देखते हुए अपने साधनों से निकल गए। इस बार ज्वालादेवी में मेला कम होने के कारण समापन भी जल्दी ही हो गया।
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