प्रतापगढ़ में टीकाकरण टीम देखकर घर के दरवाजे बंद कर ले रहे लोग
- ग्रामीण इलाकों में वैक्सीन लगने से मौत और नपुंसक होने की अफवाहें, मुनादी और डोर टू डोर संपर्क के बाद भी नहीं हो रहे तैयार
- वैक्सीनेशन टीम से नोकझोंक कर ले रहे लोग, कहीं सरकार की साजिश बताकर किया जा रहा ग्रामीणों को गुमराह
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कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए अधिक से अधिक आबादी के टीकाकरण की मुहिम में जुटे स्वास्थ्य विभाग के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। ग्रामीण इलाकों में कोरोना वैक्सीन लगने के बाद मौत और नपुंसक होने जैसी अफवाहों ने वैक्सीनेशन अभियान में लगे अफसरों की चिंता बढ़ा दी है। तेजी से अफवाहें फैलने के बाद ग्रामीण टीकाकरण टीम को देखते ही अपने घरों के दरवाजे बंद कर ले रहे हैं। मुनादी, डोर टू डोर संपर्क और शिविर लगाने के बाद भी लोग टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं। हाल के दिनों में प्रयागराज के साथ ही प्रतापगढ़ और कौशाम्बी के कई गांवों में इस तरह के मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विशेषज्ञों की राय है कि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन देकर ही कोरोना की चेन तोड़ी जा सकती है। केंद्र और राज्य सरकार भी संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए टीकाकरण पर जोर दे रही है। प्रदेश में एक जून से सभी जिलों में 18 वर्ष से ऊपर के लोगों वैक्सीन देने की तैयारी है, लेकिन इन सबके बीच ग्रामीण इलाकों में फैलीं अफवाहों ने टीकाकरण की राह में अचड़न पैदा कर दी है। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और प्रयागराज जिले के प्रभारी मंत्री डा. महेंद्र सिंह के पैतृक गांव प्रतापगढ़ जिले के करमाही गांव में तीन दिन पहले आंगनबाड़ी केंद्र पर ग्रामीणों के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप लगाया था।
इस बीच किसी ने अफवाह फैला दी कि वैक्सीन लगवाने से कुछ दिन पहले गांव के एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी। जबकि हकीकत यह है बुुजुर्ग ने तीन महीने पहले वैक्सीन लगवाई थी और बीमारी के चलते उसकी स्वाभाविक मौत हुई थी। टीकाकरण टीम दोपहर दो बजे तक इंतजार करती रही, लेकिन एक भी व्यक्ति टीका लगवाने के लिए नहीं पहुंचा। इसी तरह प्रतापगढ़ के ही खूझी कला गांव की दलित बस्ती में लोगों ने यह कहते हुए टीका लगवाने से इनकार कर दिया कि बीस दिन पहले वैक्सीन लेने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत हो गई थी। इसलिए हम लोग वैक्सीन नहीं लगवाएंगे।
बाबा बेलखरनाथधाम सीएचसी के अधीक्षक डॉ. आरिफ हुसैन ने बताया कि लोगों को गुमराह कर दिया गया है कि वैक्सीन लगवाने से मौत हो जा रही है और नपुंसकता आ जाती है। लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह प्रतापगढ़ के ही लालगंज इलाके के रायपुर तियाई, जगन्नाथपुर, सारीपुर, बछवल, असरही, खानापट्टी, खालसा सादात, कला भदारी, हुलासगढ़ में भी लोग वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों पर अफवाह इस कदर हावी है कि वे सीधे कह रहे हैं वैक्सीन लगवाकर मरना नहीं । कुंडा इलाके के कालाकांकर सीएचसी से जुड़े मानिकपुर, परियावां, इब्राहिमपुर, सोनामऊ, लवाना, दयालपुर, नवाबगंज आदि गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने टीकाकरण के लिए कैंप लगाया, लेकिन अधिकांश लोग वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं हुए। कालाकांकर सीएचसी अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर कुछ भ्रांतियां हैं। उन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रयागराज के ही लालगोपालगंज इलाके के मेंडारा, श्रृंगवेरपुर, कचहना, मलंग की तकिया, पलएं, बलाऊ क पुरवा आदि गांवों में भी ग्रामीण वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं। नवाबगंज इलाके के रामपुर, दुबरा जगदीशपुर में भी लोगों ने टीका लगवाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद रामपुर गांव में डीएम और कमिश्नर की पहल पर निगरानी समिति की बैठक में लोगों को समझाया गया।