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यूपी की पंचायतों में लिखी जा रही उभ्भा-बलीपुर जैसे हत्याकांडों की पटकथा

Tue, 13 Apr 2021 07:17 AM IST
Vikas Kumar मनीष मिश्र, अमर उजाला, प्रतापगढ़/सोनभद्र
मनीष मिश्र, अमर उजाला, प्रतापगढ़/सोनभद्र Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 13 Apr 2021 07:17 AM IST
सार

यूपी में 58,758 ग्राम पंचायतें हैं, सभी की कहानी कमोवेश उभ्भा की तरह ही है। ग्राम प्रधानों की सबसे अधिक दिलचस्पी जमीन की खरीद-फरोख्त या उस पर कब्जे की रहती है। यानी लगभग हर पंचायत में उभ्भा नरसंहार और बलीपुर हत्याकांड जैसे मामलों की पटकथा तैयार है।

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screenplay of massacres like ubhbha balipur being written in panchayats of up
उभ्भा गांव मं पुलिस चौकी बनने के बावजूद नरसंहार की दहशत अब भी लोगों में बनी हुई है। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सोनभद्र के उभ्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को हुए नरसंहार की जड़ में 140 बीघा जमीन थी। जमीन पर ग्रामीणों का कब्जा था, पर प्रधान निगाह गड़ाए था। नतीजा हुआ 11 लोगों की मौत। 2012 में भी प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव में दो विस्वा जमीन के विवाद में डीएसपी जिया-उल-हक समेत तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी। झगड़ा मृत ग्राम प्रधान नन्हे यादव और कामतापाल के बीच था।

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प्रदेश में 58,758 ग्राम पंचायतें हैं, सभी की कहानी कमोवेश उभ्भा की तरह ही है। ग्राम प्रधानों की सबसे अधिक दिलचस्पी जमीन की खरीद-फरोख्त या उस पर कब्जे की रहती है। यानी लगभग हर पंचायत में उभ्भा नरसंहार और बलीपुर हत्याकांड जैसे मामलों की पटकथा तैयार है। उभ्भा में घायल महेंद्र सिंह गोंड कहते हैं, हमारे दादा-बाबा जमीन को जोत रहे थे, जमीन दिलाने का वादा करने वाले प्रत्याशी जीतते ही जमीन पर कब्जे का जुगाड़ तलाशने लगे। प्रधान यज्ञदत्त के लोगों द्वारा किए गए नरसंहार को यादें गोंड आदिवासियों में आज भी ताजा है। 
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प्रतापगढ़ के बलीपुर में पूर्व प्रधान नन्हे यादव द्वारा जमीन पर कब्जे को लेकर डीएसपी जिया उल हक की हत्या कर दी गई थी, गोलीबारी में नन्हे यादव भी मारा गया। कामतापाल के पौत्र संजय पाल बताते हैं, हमारा जमीनी विवाद नन्हे यादव से नहीं था, लेकिन वे जमीन पर कब्जा करने की कोशिश में जुट गए। 
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सिर्फ दुद्धी में ही जमीन विवाद के 1200 मामले
सोनभद्र में दुद्धी तहसील के लेखपाल रामनिवास कहते हैं, हमारी तहसील में 1200 मामले ऐसे चल रहे हैं कि नाम किसी और का कब्जा किसी और का। प्रधान को पता होता है कि कौन सी जमीन कहां खाली है। वो अपने लोगों के नाम पट्टा कर देते हैं। चुनाव भी ग्राम समाज की जमीन का पट्टा दिलवाने के नाम पर जीतते हैं। बाराबंकी के फतेहपुर तहसील में लेखपाल पंकज कुमार कहते हैं, प्रधान चकबंदी कमेटी का अध्यक्ष होता है, उसी के हाथ में होता है कि कौन सी जमीन किस मद में छोड़ी जानी है। 

सोनभद्र में 18,275 भूमि विवाद
सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के मुताबिक, भारत में करीब 25 लाख हेक्टेयर भूमि विवाद में फंसी है। 12 आदिवासी बहुल जिलों में जमीन के सर्वाधिक विवाद हैं। इन राज्यों में ही कुल जमीनी विवादों के 18 फीसदी मामलें हैं। सोनभद्र में ही 18,275 मामले जमीन के हैं। 


प्रधान पर निर्भर हैं पंचायत सचिव-लेखपाल
घोरावल तहसील में राजस्व के वकील प्रियांश बताते हैं, एक-एक लेखपाल के पास 20-20 गांव होते हैं, लेखपाल और पंचायत सचिव प्रधान पर ही निर्भर ही रहते हैं। एक समय बाद ग्राम प्रधान भूमाफियागिरी करने लगता है। 

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