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कंडम वाहनों की जांच कराने के लिए तैयार नहीं हैं स्कूल संचालक

Tue, 25 Feb 2020 01:03 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 25 Feb 2020 01:03 AM IST
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School operators are not ready to conduct condom vehicles test
school bus
हाईकोर्ट के सख्त रूख के बावजूद स्कूल संचालक कंडम बसों की जांच कराने को तैयार नहीं है। तभी तो एआरटीओ द्वारा स्कूली वाहनों की जांच के लिए रविवार को लगे शिविर में एक भी कालेज के संचालकों ने अपना वाहन जांच के लिए नहीं भेजा। जबकि उन्हीं वाहनों से स्कूली बच्चों को हर दिन स्कूल लाते व घर पहुंचाते हैं। अधिकांश स्कूली वाहन मानकों को पूरा नहीं कर रहे।
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जिले में उप संभागीय परिवहन कार्यालय में कुल 900 स्कूली वाहनों से स्कूल तक बच्चों को लाया व पहुंचाया जाता है। इसमे 4 सौ बसें हैं अन्य छोटे वाहन शामिल हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्कूली वाहनों की जांच के लिए रविवार को जीआईसी में उप संभागीय परिवहन विभाग की ओर से शिविर लगाया गया।
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जिसमे एक भी स्कूल के संचालकों ने अपना वाहन जांच के लिए नहीं भेजा। जांच के लिए नहीं आने वाले वाहनों में छात्र व छात्राओं की सुरक्षा के लिए जरूरी खुफिया कैमरे, पैनिक बटन व जीपीएस ज्यादातर वाहनों में नहीं लगवाए गए हैं। जांच के दौरान उनकी पोल खुल जाती। इसलिए स्कूल संचालक अपने वाहनों को जांच के लिए शिविर में नहीं भेजे।
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कार्रवाई के बजाय मिल रही मोहलत
स्कूली बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों को बार-बार मोहलत दी जाती है। सवाल उठता है कि कार्रवाई के बजाय खुफिया कैमरा समेत बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संसाधन न लगाने वालों पर विभाग रहमदिल किस कारण से बना है। परिवहन विभाग के अफसर मानते हैं कि प्रतिष्ठित स्कूल परिवहन विभाग के आदेश को नहीं मान रहे हैं।
सुविधा के नाम पर अभिभावकों से लेते हैं मोटी फीस
स्कूल तक बच्चों को ले जाने व घर तक पहुंचाने के लिए स्कूलों की ओर से वाहन संचालित होते हैं। इसके एवज में अभिभावकों से मोटी फीस भी ली जाती है। अक्सर देखने में मिलता है कि स्कूली वाहनों में बसों को क्षमता से अधिक बैठाया जाता है। बहुत से बच्चे खड़े होकर सफर तय करते हैं। कई स्कूल ऐसे हैं, जहां गर्मी के अवकाश में भी वाहनों की फीस अभिभावकों से वसूलते हैं।

उच्च न्यायालय के आदेश पर भी वाहनों में बच्चों की सुरक्षा व सुविधाओं की जांच के लिए शिविर लगा था। जिसमे स्कूली वाहन नहीं आए। ऐसे वाहन स्वामियों व संचालकों को एक सप्ताह के भीतर नोटिस भेजकर जांच के लिए निर्देशित किया जा रहा है। यदि इसके बाद भी मानक के विपरीत चलते मिले तो कार्रवाई होगी। अभिभावकों को भी ऐसे वाहनों में अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहिए।
सुशील मिश्रा, एआरटीओ प्रशासन
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