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उपेक्षा का शिकार है सई अंत्येष्टि स्थल
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Sat, 17 Jan 2015 12:57 AM IST
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प्रतापगढ़। शहर के सई नदी पुल के नीचे बना अंत्येष्टि स्थल नगरपालिका प्रशासन की उपेक्षा का शिकार हो गया है। वहां अभी तक बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पाई है। लोगों को घाट पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। हैरत है कि सब कुछ जानते हुए भी प्रशासन ने आंखें बंद कर रखी हैं।
शहर के साथ ही ग्रामीण इलाकों से लोग सई नदी पुल के नीचे बने अंत्येष्टि स्थल पर शव दहन करने आते हैं। लावारिस लाशों का भी अंतिम संस्कार यहीं किया जाता है। लावारिस शवों के तारणहार मंगलाचरण मिश्र के अनुसार घाट पर कोई सुविधा नहीं है। इस वजह से शवों को जलाने में दिक्कत होती है। जानकारी होने के बाद भी प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। समाज सुधार की बातें करने वाले समाजसेवी संगठन और राजनीतिक दल भी मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
शव को लेकर पुल के नीचे उतरने में लोगों को दिक्कत होती है। सीढ़ी न होने की वजह से लोग ढाल से नीचे उतरते समय गिर जाते हैं। लोगों को शव लेकर घाट तक जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। घाट के पास बिजली की व्यवस्था नहीं है। जिससे लोग रात में वहां अंत्येष्टि क्रिया के लिए नहीं जाते हैं। पानी की व्यवस्था नहीं है। बालू, कंकड़, पत्थर, गंदगी के ढेर में तब्दील स्थान पर लोगों के बैठने की भी व्यवस्था नहीं है।
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शहर के साथ ही ग्रामीण इलाकों से लोग सई नदी पुल के नीचे बने अंत्येष्टि स्थल पर शव दहन करने आते हैं। लावारिस लाशों का भी अंतिम संस्कार यहीं किया जाता है। लावारिस शवों के तारणहार मंगलाचरण मिश्र के अनुसार घाट पर कोई सुविधा नहीं है। इस वजह से शवों को जलाने में दिक्कत होती है। जानकारी होने के बाद भी प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। समाज सुधार की बातें करने वाले समाजसेवी संगठन और राजनीतिक दल भी मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
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शव को लेकर पुल के नीचे उतरने में लोगों को दिक्कत होती है। सीढ़ी न होने की वजह से लोग ढाल से नीचे उतरते समय गिर जाते हैं। लोगों को शव लेकर घाट तक जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। घाट के पास बिजली की व्यवस्था नहीं है। जिससे लोग रात में वहां अंत्येष्टि क्रिया के लिए नहीं जाते हैं। पानी की व्यवस्था नहीं है। बालू, कंकड़, पत्थर, गंदगी के ढेर में तब्दील स्थान पर लोगों के बैठने की भी व्यवस्था नहीं है।
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