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गरीब छात्राें के रुपये दबाए
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 06 Jun 2015 01:41 AM IST
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प्रतापगढ़। लाखों रुपये बैंक में डंप कर एमडीपीजी कॉलेज प्रशासन गरीब छात्रों के हक पर कुंडली मार बैठा है। कई साल बीतने के बाद भी छात्र और छात्राओं से वसूली गई। यह रकम गरीब विद्यार्थियों के काम नहीं आ सकी। यूजीसी का पैसा भी कॉलेज के जिम्मेदार नहीं खर्च कर रहे। भाजयुमो जिलाध्यक्ष अच्युतानंद पांडे की ओर से मांगी गई आरटीआई में इस बात का खुलासा हुआ है। कॉलेज में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। जांच के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखा है।
अच्युतानंद ने कुछ माह पूर्व वर्ष 2001 से 2013 तक गरीब छात्र निधि का हिसाब और लाभान्वित छात्र और छात्राओं की सूची आरटीआई से कॉलेज से मांगा था। इनके मुताबिक प्राप्त सूचना में गरीब छात्र निधि में करीब 2617493 रुपए प्राप्त होने की बात कही गई। बताया गया कि इसमें से तकरीबन 394289 रुपया खर्च करने दिखाया गया। कहा कि इस निधि में लगभग 2223204 रुपये आज भी कॉलेज के खाते में डंप है। जबकि हर साल इस पैसे से गरीब छात्रों की मदद होनी चाहिए थी। उन्हें इस पैसे से साइकिल, फीस, ड्रेस, आदि दिए जाने की व्यवस्था है।
उनका आरोप है कि दी गई सूचना में लाभान्वित छात्रों की सूची कॉलेज ने नहीं दी। कॉलेज प्रशासन पर आरोप लगाया है कि खाते में डंप धनरशि पर बैंक से मिलने वाले ब्याज की जानकारी भी उन्हें नहीं दी गई। क्रीड़ा शुल्क के नाम पर छात्र व छात्राओं से लाखों रुपया वसूला जाता है। इसमें से एक भी रुपये की जानकारी कॉलेज ने आरटीआई में नहीं दी। कुछ सामग्री खरीदने की बात कही गई है। मगर कौन सी सामग्री कितने में खरी गई यह नहीं बताया गया। आरोप लगाया कि कॉलेज यूजीसी के पैसे का भी दुरुपयोग कर रहा है। कहा कि यूजीसी ने 2007-2008 में अनुदान देने की बात कही है। जबकि महाविद्यालय वर्ष 2004-2005 में अनुदान की बात बता रहा है। अच्युतानंद ने कहा है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि महाविद्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर है। यह भी कहा कि गर्ल्स हास्टल के नाम पर लाखों रुपया खर्च दिखाया गया है। लेकिन आज तक हास्टल बनकर तैयार नहीं हो सका। हास्टल की छत बारिश में टपकती है। उसने इन मामले में जांच की मांग की है।
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जानकारों की मानें तो किसी भी मद की 90 प्रतिशत धनराशि उसी वर्ष खर्च कर देनी चाहिए। शेष 10 प्रतिशतराशि प्रत्येक दशा में अगले वर्ष खर्च हो जानी चाहिए। यही नहीं जिस मद में धनराशि अवशेष है फीस में उस मद की वसूली तब तक नहीं होनी चाहिए जब तक उस मद की धनराशि का पूर्ण उपभोग न कर लिया जाय।
हर चीज का एक नियम है। रही बात गरीब छात्रों की तो जो पात्र थे उन्हें लाभ दिया गया है। जहां जिस मद से आवश्यकता समझी गई पैसा खर्च हुआ। इसमें भ्रष्टाचार जैसी बात कहां से आ गई।
डॉ. एएन त्रिपाठी, प्राचार्य, एमडीपीजी कॉलेज
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अच्युतानंद ने कुछ माह पूर्व वर्ष 2001 से 2013 तक गरीब छात्र निधि का हिसाब और लाभान्वित छात्र और छात्राओं की सूची आरटीआई से कॉलेज से मांगा था। इनके मुताबिक प्राप्त सूचना में गरीब छात्र निधि में करीब 2617493 रुपए प्राप्त होने की बात कही गई। बताया गया कि इसमें से तकरीबन 394289 रुपया खर्च करने दिखाया गया। कहा कि इस निधि में लगभग 2223204 रुपये आज भी कॉलेज के खाते में डंप है। जबकि हर साल इस पैसे से गरीब छात्रों की मदद होनी चाहिए थी। उन्हें इस पैसे से साइकिल, फीस, ड्रेस, आदि दिए जाने की व्यवस्था है।
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उनका आरोप है कि दी गई सूचना में लाभान्वित छात्रों की सूची कॉलेज ने नहीं दी। कॉलेज प्रशासन पर आरोप लगाया है कि खाते में डंप धनरशि पर बैंक से मिलने वाले ब्याज की जानकारी भी उन्हें नहीं दी गई। क्रीड़ा शुल्क के नाम पर छात्र व छात्राओं से लाखों रुपया वसूला जाता है। इसमें से एक भी रुपये की जानकारी कॉलेज ने आरटीआई में नहीं दी। कुछ सामग्री खरीदने की बात कही गई है। मगर कौन सी सामग्री कितने में खरी गई यह नहीं बताया गया। आरोप लगाया कि कॉलेज यूजीसी के पैसे का भी दुरुपयोग कर रहा है। कहा कि यूजीसी ने 2007-2008 में अनुदान देने की बात कही है। जबकि महाविद्यालय वर्ष 2004-2005 में अनुदान की बात बता रहा है। अच्युतानंद ने कहा है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि महाविद्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर है। यह भी कहा कि गर्ल्स हास्टल के नाम पर लाखों रुपया खर्च दिखाया गया है। लेकिन आज तक हास्टल बनकर तैयार नहीं हो सका। हास्टल की छत बारिश में टपकती है। उसने इन मामले में जांच की मांग की है।
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जानकारों की मानें तो किसी भी मद की 90 प्रतिशत धनराशि उसी वर्ष खर्च कर देनी चाहिए। शेष 10 प्रतिशतराशि प्रत्येक दशा में अगले वर्ष खर्च हो जानी चाहिए। यही नहीं जिस मद में धनराशि अवशेष है फीस में उस मद की वसूली तब तक नहीं होनी चाहिए जब तक उस मद की धनराशि का पूर्ण उपभोग न कर लिया जाय।
हर चीज का एक नियम है। रही बात गरीब छात्रों की तो जो पात्र थे उन्हें लाभ दिया गया है। जहां जिस मद से आवश्यकता समझी गई पैसा खर्च हुआ। इसमें भ्रष्टाचार जैसी बात कहां से आ गई।
डॉ. एएन त्रिपाठी, प्राचार्य, एमडीपीजी कॉलेज