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Pratapgarh News: प्लास्टिक की बोतलों से साफ होंगी नदियां
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प्लास्टिक की पानी की बोतलों से जिले की नदियों को अविरल करने की तैयारी है। इसके लिए वन विभाग नगर पालिका के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। नमामि गंगे की जिला स्तरीय बैठक में डीएम के समक्ष डीएफओ ने पायलट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। बताया कि नायलॉन की रस्सी में प्लास्टिक की खाली बोतलों को बांधा जाएगा और नदियों में फेंका जाने वाला कचरा इसमें फंसकर एक जगह एकत्रित होगा। जिसे बाद में निकालकर डंपिंग एरिया में ले जाया जाएगा।
पहले चरण में मां बेल्हा देवी मंदिर स्थित घाट पर इसकी शुरुआत होगी। ट्रायल सफल होने पर अन्य नदियों को स्वच्छ रखने में इसका प्रयोग किया जाएगा। डीएफओ आशुतोष गुप्ता ने बताया कि लोग पूजन-सामग्री व मूर्तियों को नदियों में फेंक देते हैं। नदी में फेंका गया कचरा घाटों के किनारे बहकर पहुंच जाता है जिससे नदियों का पानी प्रदूषित होता है।
बताया कि नदियों के निरंतर, अबाधित और प्रदूषण मुक्त प्रवाह (निर्मल धारा) को सुनिश्चित करने के लिए नदी बीचोंबीच एक से दूसरे किनारे तक दो नायलॉन की रस्सी लगाई जाएगी। रस्सी को पानी की ऊपरी सतह पर स्थिर रखने के लिए प्लास्टिक की खाली बोतलों का प्रयोग किया जाएगा।
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फेंका गया कचरा रस्सी व बोतल में फंसकर एकत्र हो जाएगा। इसके बाद नगर पालिका के सफाई कर्मचारी एकत्र कचरे को नदी से निकाल कर डंपिंग एरिया में ले जाएंगे। नमो गंगे ट्रस्ट और विभिन्न सरकारी अभियानों के माध्यम से बांधों, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट से नदियों को मुक्त कर उनके प्राकृतिक प्रवाह को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
इसी महीने सई नदी में होगा ट्रायल
मां बेल्हा देवी धाम स्थित सई नदी में इसी महीने प्रोजेक्ट का ट्रायल किया जाएगा। डीएफओ के अनुसार प्रोजेक्ट में काफी कम कीमत लगेगी। जनपद की सई नदी समेत चमरौधा, बकुलाही, सकरनी, लोनी, परैया व मट्टन नाला में प्रोजेक्ट को लागू करने की कवायद है।
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पहले चरण में मां बेल्हा देवी मंदिर स्थित घाट पर इसकी शुरुआत होगी। ट्रायल सफल होने पर अन्य नदियों को स्वच्छ रखने में इसका प्रयोग किया जाएगा। डीएफओ आशुतोष गुप्ता ने बताया कि लोग पूजन-सामग्री व मूर्तियों को नदियों में फेंक देते हैं। नदी में फेंका गया कचरा घाटों के किनारे बहकर पहुंच जाता है जिससे नदियों का पानी प्रदूषित होता है।
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बताया कि नदियों के निरंतर, अबाधित और प्रदूषण मुक्त प्रवाह (निर्मल धारा) को सुनिश्चित करने के लिए नदी बीचोंबीच एक से दूसरे किनारे तक दो नायलॉन की रस्सी लगाई जाएगी। रस्सी को पानी की ऊपरी सतह पर स्थिर रखने के लिए प्लास्टिक की खाली बोतलों का प्रयोग किया जाएगा।
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फेंका गया कचरा रस्सी व बोतल में फंसकर एकत्र हो जाएगा। इसके बाद नगर पालिका के सफाई कर्मचारी एकत्र कचरे को नदी से निकाल कर डंपिंग एरिया में ले जाएंगे। नमो गंगे ट्रस्ट और विभिन्न सरकारी अभियानों के माध्यम से बांधों, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट से नदियों को मुक्त कर उनके प्राकृतिक प्रवाह को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
इसी महीने सई नदी में होगा ट्रायल
मां बेल्हा देवी धाम स्थित सई नदी में इसी महीने प्रोजेक्ट का ट्रायल किया जाएगा। डीएफओ के अनुसार प्रोजेक्ट में काफी कम कीमत लगेगी। जनपद की सई नदी समेत चमरौधा, बकुलाही, सकरनी, लोनी, परैया व मट्टन नाला में प्रोजेक्ट को लागू करने की कवायद है।