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Pratapgarh News: रिटायर्ड बीडीओ का बेटा निकला ठगों का सरगना
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कंधई थाना क्षेत्र के दरछुट गांव के रहने वाले सेवानिवृत्त खंड विकास अधिकारी सोमईराम का बेटा गिरीश कुमार ठगों का सरगना निकला। पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी तो उसकी करतूत की जानकारी लोगों को हो सकी। उसकी करतूत से हर कोई हैरत में है।
दरछुट निवासी गिरीश चंद्र ने लखनऊ में रहकर धोखाधड़ी की। गिरीश चंद्र लखनऊ की मानसरोवर कॉलोनी में रहता है। उसने अपने गिरोह के साथ मिलकर फर्जी ई-मेल आईडी का उपयोग कर एकेटीयू के 120 करोड़ रुपये अहमदाबाद की श्री श्रद्धा एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के खाते में ट्रांसफर करा लिए। इस मामले में सामने आया कि गिरीश चंद्र और उसके साथियों ने फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर और खुद को बैंक प्रबंधक बताकर एकेटीयू के अधिकारियों से मुलाकात की। फिर आरोपी ने एकेटीयू का फाइनेंस अफसर बनकर यूनियन बैंक में खाता खुलवाया। इन सभी प्रक्रियाओं के जरिए करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए और 48 घंटे के भीतर ही विभिन्न खातों में भेज दिए गए।
इस बड़े लेन-न पर यूनियन बैंक के डीजीएम को शक हुआ, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य प्रबंधक अनुज कुमार सक्सेना ने 12 जून को साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया। जिसके बाद हरकत में आई लखनऊ पुलिस ठगी करने वाले सात लोगों को पकड़ने में भी कामयाब हुई।
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शुक्रवार को लखनऊ पुलिस दरछुट पहुंची। जिसके बाद परिवार व आसपास के लोगों को गिरीश के करतूत की जानकारी हो सकी। वह लोगों से लखनऊ में खुद की कंपनी खोलने की बात बताता रहा। उसके करीबी लोग भी पुलिस के पचड़े से बचने के लिए घरों से फरार हैं।
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दरछुट निवासी गिरीश चंद्र ने लखनऊ में रहकर धोखाधड़ी की। गिरीश चंद्र लखनऊ की मानसरोवर कॉलोनी में रहता है। उसने अपने गिरोह के साथ मिलकर फर्जी ई-मेल आईडी का उपयोग कर एकेटीयू के 120 करोड़ रुपये अहमदाबाद की श्री श्रद्धा एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के खाते में ट्रांसफर करा लिए। इस मामले में सामने आया कि गिरीश चंद्र और उसके साथियों ने फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर और खुद को बैंक प्रबंधक बताकर एकेटीयू के अधिकारियों से मुलाकात की। फिर आरोपी ने एकेटीयू का फाइनेंस अफसर बनकर यूनियन बैंक में खाता खुलवाया। इन सभी प्रक्रियाओं के जरिए करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए और 48 घंटे के भीतर ही विभिन्न खातों में भेज दिए गए।
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इस बड़े लेन-न पर यूनियन बैंक के डीजीएम को शक हुआ, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य प्रबंधक अनुज कुमार सक्सेना ने 12 जून को साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया। जिसके बाद हरकत में आई लखनऊ पुलिस ठगी करने वाले सात लोगों को पकड़ने में भी कामयाब हुई।
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शुक्रवार को लखनऊ पुलिस दरछुट पहुंची। जिसके बाद परिवार व आसपास के लोगों को गिरीश के करतूत की जानकारी हो सकी। वह लोगों से लखनऊ में खुद की कंपनी खोलने की बात बताता रहा। उसके करीबी लोग भी पुलिस के पचड़े से बचने के लिए घरों से फरार हैं।