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आधुनिकता के दौर में भी रामलीला का नहीं गिरा ग्राफ
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sun, 07 Oct 2018 02:10 AM IST
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रामलीला
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गोस्वामी तुलसीदास, कबीरदास और स्वामी विवेकानंद के वास्तविक जीवन को नाटक के माध्यम से चित्रण करने वाले वर्ष 2015 में पद्मश्री से सम्मानित शेखर सेन ने कहा है कि हिंदुओं के हृदय में गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान राम के आस्था का मंदिर बनाया है। उन्होंने बेहद सरल भाषा में रामायण लिखकर समाज के सामने सिर्फ आदर्श ही नहीं प्रस्तुत किया, बल्कि लोगों में भक्ति की ज्योति जलाकर भगवान के प्रति आस्था प्रकट की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी रामलीला का मंचन और भजन के ग्राफ में कोई कमी नहीं आई है।
शहर के किशोरी सदन में तुलसीदास के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन करने आए पद्मश्री शेखर सेन ने पत्रकारों से कहा कि अगर गोस्वामी तुलसीदास ने सिर्फ रामायण ही नहीं लिखा, बल्कि गांव-गांव में रामलीलाओं का आयोजन करने के लिए लोगों को प्रेरित करके भगवान राम के आदर्शों को प्रकट किया। वर्ष 2015 में पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे गए शेखर सेन ने बताया कि भारतीयों से अधिक विदेशों में रामायण और गोस्वामी तुलसीदास की उपयोगिता देखने के लिए लोग उमड़ते हैं। अमेरिका, जापान, श्रीलंका में गोस्वामी तुलसीदास के नाटक के मंचन में मिली सफलता से बेहद खुश दिखे। बेल्हा में होने वाले 125 वें कार्यक्रम के लिए उन्होंने कहा कि मेरा उद्देश्य समाज में उन आदर्शों को स्थापित करना है, जो आधुनिकता के दौर में लुप्त होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल हिंदी फिल्मों के हावी होने के बावजूद लोगों में रामलीला के मंचन और भगवान राम के प्रेरणादायी भजन को सुनने की आतुरता बनी हुई है।
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शहर के किशोरी सदन में तुलसीदास के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन करने आए पद्मश्री शेखर सेन ने पत्रकारों से कहा कि अगर गोस्वामी तुलसीदास ने सिर्फ रामायण ही नहीं लिखा, बल्कि गांव-गांव में रामलीलाओं का आयोजन करने के लिए लोगों को प्रेरित करके भगवान राम के आदर्शों को प्रकट किया। वर्ष 2015 में पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे गए शेखर सेन ने बताया कि भारतीयों से अधिक विदेशों में रामायण और गोस्वामी तुलसीदास की उपयोगिता देखने के लिए लोग उमड़ते हैं। अमेरिका, जापान, श्रीलंका में गोस्वामी तुलसीदास के नाटक के मंचन में मिली सफलता से बेहद खुश दिखे। बेल्हा में होने वाले 125 वें कार्यक्रम के लिए उन्होंने कहा कि मेरा उद्देश्य समाज में उन आदर्शों को स्थापित करना है, जो आधुनिकता के दौर में लुप्त होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल हिंदी फिल्मों के हावी होने के बावजूद लोगों में रामलीला के मंचन और भगवान राम के प्रेरणादायी भजन को सुनने की आतुरता बनी हुई है।
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