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मारे गए खर और दूषण
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sun, 09 Oct 2016 12:07 AM IST
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न्यूूज
वन में दोनों राजकुमारों के सौंदर्य पर मोहित होकर उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखना रावण की बहन सूपर्णखा को महंगा पड़ी। सीता को डराने के चक्कर मेें उसको लक्ष्मण के हाथों अपनी नाक कटवानी पड़ी। नाक कट जाने के बाद वह रोती-बिलखती हुई खर और दूषण के पास गई। उनको राम और लक्ष्मण का वध करने के लिए भेजा। खर और दूषण दोनाें राम और लक्ष्मण के हाथों मारे जाते हैं।
खर और दूषण मारे गए। राक्षसों के अंत से देवगण हर्षित होकर फूल बरसाने लगे। आकाश में नगाड़े बजने लगे। देवता, मनुष्य और मुनि सबके भय नष्ट हो गए। झांकी गोपाल मंदिर से चलकर घंटाघर, रेलवे स्टेशन, पंजाबी मार्केट होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। इस दौरान सियाराम उमरवैश्य, सुनील सिंह, संजय आदि रहे।
शनिवार को रामलीला समिति के द्वारा निकाली गई खर-दूषण वध की झांकी में इस तरह का नाट्य देखकर शहर के लोग मंत्रमुग्ध हो गए। जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा शहर गुंजायमान हो गया।
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खर और दूषण मारे गए। राक्षसों के अंत से देवगण हर्षित होकर फूल बरसाने लगे। आकाश में नगाड़े बजने लगे। देवता, मनुष्य और मुनि सबके भय नष्ट हो गए। झांकी गोपाल मंदिर से चलकर घंटाघर, रेलवे स्टेशन, पंजाबी मार्केट होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। इस दौरान सियाराम उमरवैश्य, सुनील सिंह, संजय आदि रहे।
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शनिवार को रामलीला समिति के द्वारा निकाली गई खर-दूषण वध की झांकी में इस तरह का नाट्य देखकर शहर के लोग मंत्रमुग्ध हो गए। जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा शहर गुंजायमान हो गया।
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